शिक्षा महकमे में अंधेरगर्दी की हद, सत्र के अंत में संस्था प्रधानों को कहा : किताबें लेने आओ

शिक्षा विभाग में यह कैसी पोल-पट्टी ही चल रही कि किताबें तक समय पर नहीं बांटी गई।

pankaj joshi

20 Mar 2020, 12:19 PM IST

शिक्षा महकमे में अंधेरगर्दी की हद, सत्र के अंत में संस्था प्रधानों को कहा : किताबें लेने आओ
- पांचवीं पास करने वाले कमजोर बच्चों के उपचारात्मक शिक्षण के लिए सत्र की शुरुआत में बांटनी थी
नैनवां. शिक्षा विभाग में यह कैसी पोल-पट्टी ही चल रही कि किताबें तक समय पर नहीं बांटी गई।
प्राथमिक शिक्षा परिषद को प्राथमिक शिक्षा अधिगम स्तर पूर्वता परीक्षा 2018 -19 में पांचवीं कक्षा में सी व डी ग्रेड आने वाले बच्चों को कमजोर मानते हुए उनकी कमजोरी को दूर करने के लिए उनका उपचारात्मक शिक्षण कराना था। इसके लिए ऐसे कक्षा 6 में पढ़ रहे बच्चों के लिए शिक्षा सत्र की शुरुआत में विद्यालयों को पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध करानी थी। सत्र शुरू होने के समय तो प्राथमिक शिक्षा परिषद को विद्यालयों में पाठय-पुस्तकें भेजने की याद नहीं आई। अब पूरा सत्र निकलने के बाद पाठय-पुस्तकें भेजना शुरू हुआ। ऐसे में पाठ्य पुस्तकें विद्यालयों के लिए उपयोग में नहीं आने से रद्दी बनकर रह गई।
शिक्षा सत्र समाप्त होने को आया तब मार्च माह में समग्र शिक्षा अभियान (समसा) कार्यालय की ओर से प्राथमिक शिक्षा परिषद को भेजी पुस्तकों को लेने के लिए संस्था प्रधानों को बुलाया गया। अधिकारियों के आदेश की पालना में आवश्यकता नहीं होने पर भी उन्हें पुस्तकें लेकर जाना पड़ा।
2259 बच्चों को मिलना था उपचारात्मक शिक्षण
नैनवां ब्लॉक के 55 माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों व 82 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पिछले सत्र 2018 -19 में पांचवीं की परीक्षा में चार विषयों गणित, हिंदी, अंग्रेजी व पर्यावरण विषयों में सी व डी ग्रेड प्राप्त करने वाले 2259 बच्चों को कमजोर माना था। पांचवीं पास कर छठी कक्षा में चले गए। छठी कक्षा में पढ़ाई के साथ पांचवीं कक्षा में रही बच्चों की कमजोरी को दूर करने के लिए गणित में 601, हिंदी में 438 , अंग्रेजी में 663 व पर्यावरण में 557 बच्चों को कमजोर मानते हुए उपचारात्मक शिक्षण के लिए सत्र के प्रारम्भ में ही उपलब्ध करानी थी।
अब विद्यालयों के लिए रद्दी
राजस्थान शिक्षक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष छोटूलाल शर्मा ने बताया कि पुस्तकें सत्र के प्रारम्भ में मिलती तो इनका उपयोग भी होता। सत्र की समाप्ति पुस्तकें उपलब्ध कराने से इनका कोई औचित्य नहीं रहा। अब पुस्तकें विद्यालयों में रद्दी बढ़ाने के अलावा कुछ काम नहीं आने वाली। दबाव में पुस्तकें ले जानी पड़ी।
विलम्ब से हुई उपलब्ध
समग्र शिक्षा अभियान (समसा) बूंदी के कार्यक्रम अधिकारी यशवंत शर्मा व हनुमानप्रसाद राठौर ने बताया कि प्राथमिक शिक्षा परिषद ने ही विलम्ब से पुस्तकें उपलब्ध कराई। प्राथमिक शिक्षा परिषद ने 23 दिसम्बर 2019 को जिला कार्यालय को भेजी थी जिनको ब्लॉक कार्यालयों में भिजवा दिया था। इधर, समसा के नैनवां ब्लॉक कार्यालय को पाठय पुस्तकें फरवरी माह के अंत में मिली थी। 31 मार्च से पहले पुस्तकें वितरण करने का दबाव आने से पुस्तकों को वितरण शुरू किया।

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