लॉकडाउन के सन्नाटे में अपना दर्द छिपाए बैठे असहाय

परिवार के दोनों पालनहार की मौत के बाद नैनवां के किसान नगर में 19 वर्ष की कविता व 12 वर्ष का भाई श्यामसुन्दर अकेले रह गए।

By: pankaj joshi

Updated: 01 Apr 2020, 09:31 PM IST

लॉकडाउन के सन्नाटे में अपना दर्द छिपाए बैठे असहाय
नैनवां.परिवार के दोनों पालनहार की मौत के बाद नैनवां के किसान नगर में 19 वर्ष की कविता व 12 वर्ष का भाई श्यामसुन्दर अकेले रह गए। मां का नाम बीपीएल की सूची में था। जिससे दोनों बहिन-भाई को सरकारी सहायता के नाम पर सिर्फ दस किलों गेहूं मिलने के अलावा कुछ नहीं मिलता। कविता दिहाड़ी मजदूरी करके दोनों का पालन-पोषण करने के साथ भाई की पढ़ाई का भी खर्चा उठा रही। अब लॉकडाउन होते ही कविता को मजदूरी मिलना बंद हो गई। जिस दिन लॉकडाउन हुआ उस दिन से दोनों बहिन-भाई अपने मकान में ही कैद होकर रह गए। बीपीएल का गेहूं भी नहीं मिला। दस दिन से मजदूरी भी नहीं जा पाई। ऐसे में अब घर का चूल्हा जलाने के लिए राशन खत्म हो गया। बुधवार को पत्रिका संवाददाता ने इनकी सुध ली। बाद में सूचना सामाजिक संस्थाओं को दी गई, जिन्होंने पहुंचकर दोनों के लिए राशन की व्यवस्था की। कोरोना सामाजिक सहायता समिति के सदस्य प्रमोद जैन ने बताया कि दोनों के लिए राशन की व्यवस्था कर दी। उन्होंने बताया कि दोनों बच्चों के लिए लॉकडाउन के बाद बेहतर व्यवस्था करेंगे।

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