देखरेख के अभाव में जीर्णशीर्ण होता चारभुजा मंदिर

कस्बे की ऐतिहासिक धरोहर देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण होकर दम तोड़ रही है। इसकी बानगी कस्बे का प्राचीन चारभुजा मंदिर है, जो अपनी पहचान खो रहा है।

By: pankaj joshi

Updated: 17 Apr 2021, 10:13 PM IST

देखरेख के अभाव में जीर्णशीर्ण होता चारभुजा मंदिर
पुरातत्व विभाग का कोई ध्यान नहीं
प्रवीण रायका
patrika.com
बड़ाखेड़ा. कस्बे की ऐतिहासिक धरोहर देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण होकर दम तोड़ रही है। इसकी बानगी कस्बे का प्राचीन चारभुजा मंदिर है, जो अपनी पहचान खो रहा है। इस दिशा में पुरातत्व विभाग का कोई ध्यान नहीं है। मंदिर के पत्थरों में पेड़ पौधे उग चुके हैं। पत्थर टूटकर गिर जाते हैं। इसे संरक्षण की दरकार है।
पत्थरों पर की गई कलाकृतियां करती है आकर्षित
मंदिर में लगे पत्थरों पर उकरी कलाकृति आज भी लोगों को आकर्षित करती है। यह स्थापत्य कला का एक उदाहरण है। मंदिर में लगे शिलालेख के अनुसार यह मंदिर 400 वर्ष पुराना माना जाता है।
मंदिर का इतिहास
कस्बे में मंदिर का निर्माण एक धनी महाजन ने करवाया था, जो माहेश्वरी समाज से था। मंदिर के बारे में एक कहावत प्रचलित थी कि इस मंदिर के निर्माण के समय इसकी नींव में देशी घी डाला गया था। मंदिर के बारे में 90 वर्षीय पंडित सोहन लाल शर्मा बताते हैं कि इस मंदिर पर ऊपर चढऩे के लिए सीढिय़ों का सहारा लेना पड़ता था। अब वह सीढिय़ां जमींदोज हो चुकी है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर लगे हाथी जो टूट कर गिर गए हैं। जिसके बाद में मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया। उसका शिलालेख मंदिर में लगा हुआ है।
ग्रामीणों की जुबानी
कस्बे की दीपिका शर्मा ने बताया कि ऐसी ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के साथ संरक्षण के नियम भी तय करने चाहिए। उसी के तहत कार्य किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार स्थानीय स्तर पर भी व्यवस्था करेंगे। सम्बधित विभाग का इस ओर ध्यान आकृष्ट करवाया जाएगा, ताकि प्राचीन धरोहर को बचाया जा सके।

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