जानें कैसे टाइगर ने रोकी एक्सप्रेस-वे निर्माण की रफ्तार...

भारतमाला परियोजना के तहत क्षेत्र में बनने वाला एक्सप्रेस वे की रफ्तार रणथंभौर कारिडोर ईको सेसेंटिव जोन में विचरण करने वाले टाइगर ने रोक दी।

By: pankaj joshi

Published: 22 Apr 2021, 09:29 PM IST

जानें कैसे टाइगर ने रोकी एक्सप्रेस-वे निर्माण की रफ्तार...
सखावदा क्षेत्र में खनन के लिए लीज नहीं मिलने से क्षेत्र की तीनों एक्सप्रेस वे निर्माण कंपनियों का काम अटका
राकेश जैन
patrika.com
लाखेरी.
भारतमाला परियोजना के तहत क्षेत्र में बनने वाला एक्सप्रेस वे की रफ्तार रणथंभौर कारिडोर ईको सेसेंटिव जोन में विचरण करने वाले टाइगर ने रोक दी। निर्माण के दौरान बड़ी मात्रा में उपयोग होने वाली गिट्टी की एसटीपी नहीं मिलने से तीनों कंपनियों के के्रशर शुरू नहीं हुए।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र में 8 लेन एक्सप्रेस वे निर्माण का इंद्रगढ़ क्षेत्र के मुई से हरदेवगंज 27 किमी, हरदेवगंज से पापड़ी मेज नदी तक 11 किमी व पापडी मेज नदी से कोटा जिले के चंबल किनारे तक 27 किमी का निर्माण होगा। इस निर्माण कार्य को डीएमआई, एलएंडटी व जीआर इंफ्रा करेगी। तीनों कंपनियों ने सखावदा क्षेत्र में क्रेशर भी स्थापित कर लिए। पत्थर खनन के लिए तीनों कंपनियों ने खनि विभाग को लीज एसटीपी शार्ट टर्म प्लॉन के लिए आवेदन किया, खनि विभाग ने तीनों कंपनियों को लेटर आफ इंडेट मंशापत्र भी जारी कर दिया।
मंशापत्र की शर्तो के मुताबिक कंपनियों को पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्राप्त करनी थी। इनके क्रेशर व खनन का स्थान चंबल घडियाल अभयारण्य, रणथंभौर बाघ परियोजना व दो अभयारणों के बीच के ईको सेंसेटिव जोन में होने से स्थानीय स्तर पर एसटीपी नहीं मिलेगी। जिससे एलएंडटी को छोडकऱ अन्य कंपनियों के क्रेशर बंद हो गए। एलएंडटी के पास कुछ मात्रा में पत्थर रोड निर्माण में आ रही एक पहाड़ी के काटने की इजाजत मिलने से अल्प मात्रा में प्राप्त हो रहा है जो उसकी आवश्यकताओं को देखते कम है।
दूर से गिट्टी मंगाना महंगा
एक्सप्रेस वे निर्माण में लगी तीनों कंपनियों के लिए कंक्रीट गिट्टी परेशानी बन गई। क्षेत्र में करीब आधा दर्जन छोटे के्रशर है, उनके पास भी नाममात्र की लीज है और इन क्रेशरों की क्षमता कम है। तीनों कंपनियां अगर दूर से गिट्टी मंगवाती है तो लागत बढ़ेगी।
1 लाख टन गिट्टी चाहिए
तीनों निर्माण कंपनियों को सडक़ निर्माण के लिए करीब 1 लाख टन से भी अधिक गिट्टी की आवश्यकता होगी। एलएंडटी को 11 किमी के 8 किमी हिस्से के एलीवेटेड रोड के लिए करीब 50 लाख टन गिट्टी चाहिए। इसी प्रकार जीएमआर व डीएमआई को भी 25-25 लाख टन गिट्टी निर्माण के दौरान चाहिए। इन कंपनियों ने सडक़ निर्माण से पहले अनुमान लगाया था कि 8-10 किमी की रेंज से पत्थर निकालकर गिट्टी बना लेंगे। अब एसटीपी नहीं मिलने से फिलहाल कार्य थम सा गया।
10 किमी तक खनन नहीं हो सकता
वाइल्डलाइफ के सवाईमाधोपुर डीएफओ महेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि तीनों कंपनियों की अनापत्ति प्रमाणपत्र के प्रस्ताव आये थे, तीनों कम्पनियों के प्रस्तावित स्थान रामगढ़ व रणथंभौर अभयारण्य के बीच का क्षेत्र होने, टाइगर के विचरण का क्षेत्र होने, चंबल घडिय़ाल अभयारण्य के नजदीक होने के चलते तीनों कंपनियों को बता दिया कि इस क्षेत्र मेें सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक 10 किमी तक खनन नहीं हो सकता। नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड ही इसमें कुछ करेगा। इसी प्रकार खनि विभाग के माइनिंग इंजीनियर कोटा जगदीश मेहरावत ने बताया कि तीनों कंपनियों के प्रस्ताव आये थे, उन्हें विभिन्न विभागों की जिसमें पर्यावरण विभाग भी शामिल है जिसकी अनापत्ति लाने को कहा है।
नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड में जाएगा मामला
तीनों निर्माण कंपनियों ने जिस क्षेत्र की लीज के लिए आवेदन किया जो अभयारण्यों से जुड़ा है। वर्तमान में ये इलाका सरकार की ओर से नोटिफाइड नहीं होने से यहां पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश जिसमें बफर जोन के लिए 10 किमी तक में खनन की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे में नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड ही इस मामले में कुछ कर सकता है।

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