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आधा दर्जन रेस्टोरेंट संचालकों के पास ही मांस बेचने का लाइसेंस, चल रहे दो दर्जन से अधिक

मांस पकाकर बेचने के लिए यों तो रेस्टोरेंट संचालक को लाइसेंस लेना पड़ता है, लेकिन जिम्मेदारों के कार्रवाई नहीं करने से अधिकतर रेस्टारेंट संचालक लाइसेंस बनवाने में रुचि दिखा रहे हैं।

बूंदी

Published: January 20, 2022 06:14:43 pm

बूंदी. मांस पकाकर बेचने के लिए यों तो रेस्टोरेंट संचालक को लाइसेंस लेना पड़ता है, लेकिन जिम्मेदारों के कार्रवाई नहीं करने से अधिकतर रेस्टारेंट संचालक लाइसेंस बनवाने में रुचि दिखा रहे हैं। बूंदी शहर के अलग-अलग हिस्सों में दो दर्जन से अधिक रेस्टोरेंट में मांस परोसा जा रहा है, जबकि लाइसेंस आधा दर्जन के पास ही बताया। कार्रवाई का भय नहीं होने से मांस पकाकर बेचने वाले इन रेस्टोरेंट की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रहा है। इन रेस्टोरेंट को लाइसेंस जारी करने और इनकी जांच के लिए सरकार ने खाद्य सुरक्षा विभाग को अधिकृत कर रखा है।

आधा दर्जन रेस्टोरेंट संचालकों के पास ही मांस बेचने का लाइसेंस, चल रहे दो दर्जन से अधिक
आधा दर्जन रेस्टोरेंट संचालकों के पास ही मांस बेचने का लाइसेंस, चल रहे दो दर्जन से अधिक

जानकार सूत्रों ने बताया कि बूंदी में बिना नियमों के इन रेस्टोरेंट का संचालन किया जा रहा है। इन रेस्टोरेंट में लोगों को खाने के लिए मांस की गुणवत्ता पर भी किसी का ध्यान नहीं है। साथ ही बिना कायदों के इन रेस्टोरेंट के संचालन से आस-पास के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

यह बोले शहर के लोग
सोहनलाल वर्मा ने कहा कि मांस की दुकानें निर्धारित स्थान पर ही लगे। इन्हें यों बीच सडक़ों पर लगाया जाना कतई उचित नहीं हैं।
वर्मा ने बताया कि मांस की दुकानें सुबह ही खुल जाती है, ऐसे में धार्मिक क्रियाएं करने जाने से पहले ही यह दुकानें मन विचलित करती है। मुकेश सिंह ने बताया कि शहर में मांस की दुकानों के तो मानों कोई नियम नहीं रहे। पक्षियों को बिना किसी कायदे और रोक-टोक के काटा जा रहा है। इन दुकानों के बाहर दरवाजे तक नहीं हैं। जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को इन्हें रोकना चाहिए।

अफसरों की जिम्मेदारी तय हों, न्यायालय की शरण लेंगे
विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री मांगीलाल गोचर ने बताया कि बिना स्वीकृति के मनमर्जी से मांस की दुकानों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई हों, इसके लिए न्यायालय की शरण लेंगे। बूंदी में मांस की अवैध दुकानों से उपजे हालात किसी से छिपे नहीं हैं। बावजूद नगर परिषद, खाद्य सुरक्षा, प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही।

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