सर्दी के साथ बढ़ी विदेशी पक्षियों की तादाद, आबाद हुए बूंदी के जलाशय

सर्दी बढऩे के साथ ही बूंदी जिले के जलाशयों में देशी-विदेशी परिंदों की तादाद बढऩे लग गई। विदेशी मेहमान परिंदों के आने से जलाशयों पर रौनक लौट आई। सैकड़ों किलोमीटर सुदूर यात्राएं कर मध्य यूरोप और हिमालयन क्षेत्र से विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षी बूंदी पहुंच चुके।

By: Narendra Agarwal

Published: 16 Dec 2020, 11:03 AM IST

बूंदी. सर्दी बढऩे के साथ ही बूंदी जिले के जलाशयों में देशी-विदेशी परिंदों की तादाद बढऩे लग गई। विदेशी मेहमान परिंदों के आने से जलाशयों पर रौनक लौट आई। सैकड़ों किलोमीटर सुदूर यात्राएं कर मध्य यूरोप और हिमालयन क्षेत्र से विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षी बूंदी पहुंच चुके।
जलाशयों पर बड़े आकार के पेलिकन सहित अन्य प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा दिख रहा। जिले के प्रमुख वेटलैंड तालेड़ा क्षेत्र के बरधा बांध, बूंदी की जैतसागर झील, गुढ़ानाथावतान के भीमलत-अभयपुरा बांध, हिण्डोली के रामसागर, गुढ़ा बांध, दुगारी का कनक सागर सहित मेज, कुरेल व चम्बल नदियों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों की जलक्रीड़ा आकर्षण का केंद्र हो गई।

इंडियन स्किम्मर का इंतजार
जिले के गुढ़ाबांध व कनक सागर दुगारी में हर साल दुर्लभ इंडियन स्किम्मर पक्षी आते हैं। अभी तक जिले में इन पक्षियों की साइटिंग नहीं हुई। इस साल कमजोर मानसून के कारण प्रमुख वेटलैंड रामनगर तालाब सूखा रहने से कुरजां भी नहीं आए। वर्तमान में जलाशयों पर पेलिकन, बार हेडेड गूज, ग्रे लेग गूज, सुरखाब, कोमन पोचार्ड, लाल सर पोचार्ड, यूरोपियन पिनटेल, नोर्थन शोवलर आदि प्रवासी परिंदे बड़ी संख्या में पहुंच रहे।
बूंदी जिले में बर्ड वाचिंग के क्षेत्र में टूरिज्म की विपुल संभावनाएं है। जिले के बरधा व अभयपुरा बांध को मत्स्य पालन से मुक्त कर पक्षी संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है।
पृथ्वी सिंह राजावत, पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक, बूंदी

Narendra Agarwal Desk
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