घुमंतू परिवारों को पट्टे मिलने का सपना अधूरा

प्रशासन शहरों के संग अभियान में घुमंतू परिवारों को बसाने के लिए आवंटित भूमि पर घुमंतू परिवारों को पट्टे नहीं मिल पाएंगे।

By: pankaj joshi

Published: 14 Oct 2021, 07:46 PM IST

घुमंतू परिवारों को पट्टे मिलने का सपना अधूरा
नैनवां : पांच वर्ष से दो विभागों के बीच घुमा रहे पत्रावली : राजस्व रिकॉर्ड में रास्ता दर्ज हो तो मिले पट्टे
नैनवां. प्रशासन शहरों के संग अभियान में घुमंतू परिवारों को बसाने के लिए आवंटित भूमि पर घुमंतू परिवारों को पट्टे नहीं मिल पाएंगे। प्रशासन की ओर से दो वर्ष से आवंटित भूमि तक पहुंच का रास्ता राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जा रहा। रास्ता दर्ज करने की बजाए पत्रावली को नगरपालिका व राजस्व विभाग के बीच झूला रखा है। छह वर्ष पहले नैनवां के चरागाह से बेघर किए घुमक्कड़ जाति के तीन दर्जन परिवारों को अभी तक घर नहीं मिल पाए। परिवारों को बसाने के लिए जिला कलक्टर ने नगरपालिका को पांच बीघा भूमि आवंटित भी कर रखी है। आवंटित भूमि पर नि:शुल्क पट्टे जारी करने के आदेश भी दे रखे हंै। आवंटित भूमि की पहुंच तक का रास्ता राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने से पट्टे जारी करने में बाधा बना हुआ है। रास्ता दर्ज कराने की नगरपालिका व राजस्व विभाग के बीच झूल रही है। नैनवां नगरपालिका सीमा में 24 नवम्बर 2015 को प्रशासन द्वारा चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने के दौरान कई घुमक्कड़ परिवार बेघर हो गए थे। इन परिवारों को बसाने के लिए जिला कलक्टर ने 25 मई 2016 को राज्य राजमार्ग पर स्थित पांच बीघा सिवायचक भूमि आबादी में परिवर्तित कर नगरपालिका के नाम आवंटित कर तरमीम भी कर दी थी। परिवारों को बसाने के लिए आवंटित भूमि पर भूखंड आवंटन के लिए नगरपालिका ने नक्शा तैयार कर रखा है। नगर नियोजन कार्यालय से स्वीकृत भी हो चुका है। आवंटित भूमि तक जाने के लिए सरकारी रास्ते को रिकॉर्ड में दर्ज करने नहीं किया जा रहा। जिससे प्रशासन शहरों के संग अभियान में घुमंतू जाति के परिवारों को उनके नाम आंवटित भूमि पर ही पट्टे मिलने का सपना पूरा नहीं हो पाएगा।
ऐसे झूला रखी पत्रावली
बेघर हुए घुमन्तू परिवारों का बसाने के लिए जिला कलक्टर ने भूमि की लगान कीमत मात्र 120 रुपए में पांच बीघा भूमि आवंटित कर दी। इस भूमि तक पहुंच के लिए रास्ते के लिए मात्र आधा बीघा से थोड़ी ज्यादा 12 बिस्वा भूमि आवंटित करने के लिए प्रति बीघा सात लाख 65 हजार 900 रुपए की दर से 12 बिस्वा भूमि की डीएलसी दर की दो गुणा राशि चार लाख 59 हजार 540 रुपए की राशि राजकोष में जमा कराने को लिखकर पत्रावली को उलझा दिया। नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी ने 25 जुलाई 2019 को उपखंड अधिकारी को लिखा कि घुमंतू परिवारों के लिए जिला कलक्टर ने भूमि आंवटित कर रखी है।
भूमि पर परिवारों को नि:शुल्क भूखंड उपलब्ध कराने है। नगर नियोजक ने नक्शा प्लान स्वीकृत कर दिया है। भूमि तक जाने के लिए राजस्व नक्शे में रास्ता उपलब्ध नही है। नक्शे में रास्ता उपलब्ध कराएं। इसके जवाब में उपखंड अधिकारी ने दस फरवरी 2020 को अधिशासी अधिकारी को लिखा कि रास्ते की भूमि के लिए डीएलसी दर की दो गुणा भूमि राजकोष में जमा कराएं। मामला जिला कलक्टर के ध्यान में लाया गया तो कलक्टर ने 14 फरवरी 2020 को उपखंड अधिकारी को रास्ते के लिए भूमि आवंटन के प्रस्ताव मांग लिए। इस पर उपखंड अधिकारी ने 29 अप्रेल को तहसीलदार से व तहसीलदार ने 30 अप्रेल को पटवारी से प्रस्ताव मांग लिया। पटवारी द्वारा प्रस्तावित भूमि पर नगरपालिका ने 6 जून को एनओसी भी जारी कर दी थी। रास्ते के लिए भूमि आवंटन में आपत्ति लगाकर पत्रावली को अलग डाल रखा है।
तैयारी धरी रह जाएगी
कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी का काम देख रहे सफाई निरीक्षक केसरलाल वर्मा ने बताया कि आवंटित भूमि पर घुमंतू परिवारों को पट्टे जारी करने की प्रशासन शहरों के संग अभियान में पट्टे जारी करने की तैयारी भी की जा चुकी थी। राजस्व रिकॉर्ड में रास्ता दर्ज नहीं हो पाया तो पट्टे देने की तैयारी धरी रह जाएगी।

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