न बाजे बजे, ना शहनाई, बिना घोड़े पर चढ़े दूल्हे ने लिए सात फेरे

न बैंड बाजों का शोर, ना शहनइयों की गूंज, ना दोस्तों व रिश्तेदारों की भीड़।

By: pankaj joshi

Published: 10 May 2020, 09:47 PM IST

न बाजे बजे, ना शहनाई, बिना घोड़े पर चढ़े दूल्हे ने लिए सात फेरे
- माहेश्वरी पंचायत ने दोनों नवयुगल को सौंपा शुभकामना संदेश
बूंदी. न बैंड बाजों का शोर, ना शहनइयों की गूंज, ना दोस्तों व रिश्तेदारों की भीड़।हिंदू परम्परा के तहत सामाजिक दूरी व लॉकडाउन के नियमों की पालना करते हुए अग्नि के समक्ष एक-दूजे का हाथ थामे रखने के लिए रविवार को एक नवयुगल हमसफर बने। बूंदी के गौरव माहेश्वरी ‘बांगड’ ने बारां की अवंतिका के साथ वेदिक मंत्रोच्चार के बीच फेरे लिए। भाजपा के पूर्व जिला प्रवक्ता संजय लाठी, माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष जगदीश जैथलिया व सचिव विजेंद्र माहेश्वरी ने समाज की ओर से दोनों शुभकामना संदेश भेंट किया।
प्रयास लाए रंग, फिर हुए राजी
पहले से निर्धारित तिथि पर वर-वधु विवाह के लिए सहमत नहीं थे, वधु के पिता महेशचंद्र माहेश्वरी को समझाने के लिए राजी करना पड़ा। ऐसे में वर के पिता महावीर प्रसाद बांगड की सलाह व पारिवारिक सदस्य संजय लाठी की पहल पर वर-वधु शादी के लिए राजी हुए। इसके बाद दोनों परिणय सूत्र में बंधे। इस शादी से वैभव का प्रदर्शन व अनावश्यक खर्च में कमी आई। खास बात यह रही कि दूल्हा गौरव दूसरों की शादी की महफिल सजाता था, उसी का विवाह सीमित दायरे में रहकर हुआ।

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