आम लोगों की पहुंच से दूर हो रहा ‘आम’

कोरोना वायरस संक्रमण के कारण गर्मी में आने वाला फलों का राजा आम इन दिनों आम आदमी की पहुंच से दूर हो गया। यह इसलिए हुआ कि बाहरी राज्यों से आम का आना बंद हो गया।

By: pankaj joshi

Published: 16 May 2020, 07:02 PM IST

आम लोगों की पहुंच से दूर हो रहा ‘आम’
कोरोना संक्रमण के डर से खरीद-फरोख्त पर आया असर
बूंदी. कोरोना वायरस संक्रमण के कारण गर्मी में आने वाला फलों का राजा आम इन दिनों आम आदमी की पहुंच से दूर हो गया। यह इसलिए हुआ कि बाहरी राज्यों से आम का आना बंद हो गया।
फल विक्रेताओं के अनुसार मई माह में आम की सभी किस्मों की वैरायटी बाजार में आ जाती थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण सिर्फ बादामी किस्म के आम ही मार्केट में पहुंचे। अन्य किस्म सिर्फ एक तिहाई पहुंच रही जो भी खरीद लायक नहीं बताई। लॉकडाउन के चलते यहां आम का कारोबार पूरी तरह से चौपट हो गया। लिहाजा खाना भी चाहे तो बादाम किस्म के आम ही मिलेंगे। शौकीनों के महंगे आम हापुस या चुनरी ने भी बूंदी से अबके दूरी बना ली। जानकार सूत्रों ने बताया कि कोरोना संक्रमण के डर से अब लोगों ने बाहरी वस्तुओं की खरीद कम कर दी। ऐसे में हर साल लगने वाले आम के भंडारों में सन्नाटें के सिवाय कुछ नहीं दिख रहा। हालांकि इस बार जो आम बाजारों में आ रहे हैं वह बिना कैमिकल के पकाए हुए आ रहे हैं। यानी यह कहा जा सकता है कि शुद्ध आम ही बाजारों में बिक रहे हैं। बूंदी जिले में हर साल आम का 30 से 40 लाख का कारोबार होता है।
आम लोगों से दूर
आमतौर पर मार्च में शुरू होने वाले आम का सीजन जून में खत्म होता है। इस बार माना जा रहा है कि शुरुआत ही नहीं हुई। आम लोगों तक इसकी पहुंच नहीं हो रही। मई माह में दाम सामान्य रहने से सभी घरों तक पहुंच जाया करता था, अबके बमुश्किल ही इसकी खरीद होगी।
देखने को नहीं मिलेंगे दशहरी और तोता
कोविड-19 के चलते इस बार दशहरी समेत तमाम किस्मों के आम के जायके से महरूम रहना पड़ेगा। बगीचों में मजदूर नहीं होने से आम की तुड़ाई मुश्किल हो गई। आम की दशहरी, लंगड़ा, तोता व केसर आदि किस्मों का लोग ज्यादा पसंद करते हैं।
अप्रेल-मई में लग जाता आम का बाजार
शहर में कुछ ठेले वाले 50 से 60 रुपए किलो के भाव से आम बेच रहे है। हालांकि कोरोना के डर से लोगों ने फलों से दूरी बना ली है। यही वजह है कि आम बाजार में नहीं आया। फल विक्रेताओं के मुताबिक लॉकडाउन होने से फल भी नहीं आ रहे, अभी बादामी किस्म का आम ही मिलेगा। जबकि अप्रेल-मई माह में आमों की सभी वैरायटी पहुंच जाया करती थी।
गाडिय़ां आठ से दस दिन में पहुंच रही
फल फ्रूट विक्रेता रामलक्ष्मण राठौर ने बताया कि लॉकडाउन के बीच अधिकतर वाहन चालक आने-जाने को सहत तैयार नहीं होते। रेडजोन में अब कोई प्रवेश नहीं करना चाहता। ऐसे में एक गाड़ी को आने-जाने में आठ से दस दिन का वक्त लग रहा है। कई बार तो बुकिंग होने के बाद ही निरस्त हो रही है।


आम का सीजन मार्च से शुरू हो जाता है। मई आते-आते तो सभी वैरायटी बाजार में पहुंच जाती है। इस बार लॉकडाउन के चलते बाजार में सिर्फ बादामी आम पहुंच पाया है, बाकि एक तिहाई ही लंगड़ा, दशहरी आम पहुंचे हैं जो भी सही नहीं है।’
रामस्वरूप राठौर, अध्यक्ष, फल-फू्रट व्यापार संघ, बूंदी

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