मूर्तियों की नहीं कोई सार-संभाल

देश को पहचान दिलाने वाले महापुरुष केवल जयंती व पुण्य तिथि पर याद आते हैं। बाद में वर्षभर इन्हें कोई याद नहीं करता।

By: pankaj joshi

Updated: 18 Dec 2020, 07:16 PM IST

मूर्तियों की नहीं कोई सार-संभाल
बूंदी में लगी है महापुरुषों की एक दर्जन मूर्तियां
बूंदी. देश को पहचान दिलाने वाले महापुरुष केवल जयंती व पुण्य तिथि पर याद आते हैं। बाद में वर्षभर इन्हें कोई याद नहीं करता। ऐसी बानगी देखने को मिल रही शहर में लगी महापुरुषों के मूर्ति स्थलों पर। इन स्थानों की कोई सार-संभाल नहीं लेता। जिम्मेदार तो मानो इन्हें आकर देखते ही नहीं। सामाजिक संस्थाएं भी इन्हें गोद लेकर भूल गई। इन स्थलों पर गंदगी के ढेर लग गए। जिन्हें कोई साफ करने नहीं आता।
केस- 1
शहर के हायर सैकण्डरी स्कूल के खेल मैदान में स्थापित नेताजी की प्रतिमा लगी है। बदरंग होने के साथ ही प्रतिमा को सालभर पहले शहर के जागरूक युवाओं ने रंग-रोगन किया था।
केस - 2
शहीर राम कल्याण स्मारक पर आसपास गंदगी जमा हो गई। यहां साफ-सफाई के लिए कोई नहीं आता। संस्था ने इस स्थान को गोद ले रखा है, लेकिन वह भी पूरे साल नहीं आते।
केस - 3
डॉ. भीमराव अम्बेडकर सर्किल की तो चहुंओर से जालियां ही टूट गई। जिसे स्थानीय निकाय ठीक नहीं करा रही। यहां सिर्फ विशेष अवसरों पर ही लोग आते हैं। सर्किल उपेक्षा का शिकार हो रहा है।
केस - 4
नवल सागर झील के निकट स्थित पार्क में लगी गौतम बुद्ध की प्रतिमा बदरंग हो चुकी। यही नहीं पार्क के फव्वारें बंद हो गए। यहां लगा फव्वारा अब खराब हो गया। जिसे अब कोई ठीक नहीं करा रहा।

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