मांगली कला के आलू की धूम ऑस्ट्रेलिया तक

सब्जियों की पैदावार के लिए प्रसिद्ध बड़ानयागांव क्षेत्र के किसानों के लिए आलू की आधुनिक खेती वरदान साबित हो रही है।

By: Narendra Agarwal

Published: 22 Feb 2021, 04:35 PM IST

बड़ानयागांव. सब्जियों की पैदावार के लिए प्रसिद्ध बड़ानयागांव क्षेत्र के किसानों के लिए आलू की आधुनिक खेती वरदान साबित हो रही है। क्षेत्र में कृषि विभाग की पहल पर किसानों का आलू की आधुनिक खेती के प्रति रुझान बढऩे से क्षेत्र के किसानों को आधुनिक खेती से बंपर पैदावार मिलने के साथ आर्थिक मजबूती मिल रही है। क्षेत्र के किसानों ने इस बार नवंबर माह में खेतों को तैयार कर करीब पांच सौ बीघा जमीन पर आलू की खेती की थी। जिससे क्षेत्र के किसानों को इन दिनों अच्छी पैदावार मिल रही है। बड़ानयागांव मांगली कला व मांगली खुर्द के किसानों ने आलू की खेती बीज लगाने से लेकर उपज निकालने तक सब कुछ आधुनिक तरीका से मशीनों की सहायता से कर रहे हैं। आलू की खेती में फसल की सिंचाई ड्रिप सिस्टम से बूंद बूंद पद्धति से किसान करते हैं। मांगली कला के किसान कुशाल सैनी, भवानी शंकर सैनी आदि ने बताया कि इस बार क्षेत्र के किसानों ने सीधे अपने स्तर पर आलू का बीज आगरा से उन्नत किस्म कुफरी 3792 ई मंगवाकर खेतों में आधुनिक मशीनों की सहायता से 6 क्विंटल प्रति बीघा के हिसाब से लगाया। आलू की फसल 90 से 110 दिनों में तैयार होने के बाद पैदावार शुरू हो जाती है। किसान मशीन की सहायता से आलू की उपज निकालकर उसकी ग्रेडिंग करने के बाद प्रदेश की विभिन्न मंडियों में बेचने के लिए भेज रहे हैं। किसानों ने बताया कि क्षेत्र के उन्नत किस्म के आलू की क्वालिटी देसी किस्म के मुकाबले अच्छी होने से आलू के प्रोडक्ट निर्माता कंपनियों में अच्छी मांग रहती है।

ऑस्ट्रेलिया पहुंचा मांगली कला का आलू
बड़ानयागांव क्षेत्र के मांगली कला गांव के आलू की पैदावार प्रदेश व देश में पहुंचने के बाद ऑस्ट्रेलिया तक भी पहुंच गई। यहां गांव में पिछले दो वर्षों से ऑस्ट्रेलिया की एक चिप्स निर्माता कंपनी एक दर्जन से अधिक किसानों से अनुबंध कर आधुनिक तरीके से आलू की खेती करवाकर सीधे किसानों से उपज खरीद रही थी। क्षेत्र के किसानों को आलू की पैदावार में फायदा भी मिला। इस बार कोरोना काल के चलते ऑस्ट्रेलिया की कंपनी ने यहां के किसानों से आलू की पैदावार नहीं करवाई। ऐसे में किसानों ने अपने स्तर पर ही इस बार आधुनिक तरीके से आलू की फसल तैयार की है।

एक बीघा में 70 से 80 क्विंटल मिल रही पैदावार
किसानों ने बताया कि फसल किसी प्रकार के रोग के चपेट में नहीं आए तो प्रति बीघा 70 से 80 क्विंटल तक आलू की पैदावार मिल जाती है। किसानों ने बताया कि मंडियों में इस समय आलू की उपज के दाम कम मिल रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय किसानों को उपज अच्छी से मिलने से फायदा मिलने की उम्मीद है।
आलू की आधुनिक तरीके से उन्नत किस्म के बीज की खेती करने से क्षेत्र के किसानों को अच्छी पैदावार मिलने के साथ फायदा भी मिल रहा है। क्षेत्र के किसानों का आलू की खेती की ओर रुझान बढऩे से हर वर्ष फसल का रकबा बढ़ता जा रहा है। क्षेत्र में आलू की उपज की प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित हो जाए, तो किसानों को और ज्यादा फायदा मिल सकता है।
सुरेंद्र कुमार गौतम, कृषि पर्यवेक्षक

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