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pradarshan : बूंदी नगर परिषद के निर्णय के विरुद्ध जिला कलक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को सौंपा पत्र

बूंदा मीणा को बूंदी का संस्थापक बताकर नगर परिषद की ओर से यहां पैनोरमा निर्माण कराए जाने का शहर के लोगों ने विरोध किया है। उन्होंने शुक्रवार को जिला कलक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को पत्र सौंपा है।

बूंदी

Published: March 05, 2022 01:07:03 pm

बूंदी. बूंदा मीणा को बूंदी का संस्थापक बताकर नगर परिषद की ओर से यहां पैनोरमा निर्माण कराए जाने का शहर के लोगों ने विरोध किया है। उन्होंने शुक्रवार को जिला कलक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को पत्र सौंपा है।
भंवर ङ्क्षसह राठौड़, लोकेश दाधीच, मनीष ङ्क्षसह सिसोदिया, रमणराज ङ्क्षसह, भंवर त्रिभुवन ङ्क्षसह, दिलराज ङ्क्षसह, राजङ्क्षसह, पंकज गुर्जर, सुखपाल ङ्क्षसह, राघवेन्द्र ङ्क्षसह आदि ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपे 8 पेज के पत्र में बताया कि नगर परिषद बूंदा मीणा को बूंदी का संस्थापक बताकर पैनोरमा स्थापित कर रही जो इतिहास के साथ छेड़छाड़ है। पत्र में बताया कि पैनोरमा में चित्रमाला का प्रस्तुतिकरण किया जाता है। बूंदी में बूंदा मीणा का कभी साम्राज्य नहीं रहा है। अभी जो एक तस्वीर बूंदा मीणा की बताकर प्रसारित की जा रही है उसे बूंदी रियासत के पूर्व नरेश महाराव राजा रघुवीर ङ्क्षसह की होने का दावा किया गया।

pradarshan : बूंदी नगर परिषद के निर्णय के विरुद्ध जिला कलक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को सौंपा पत्र
pradarshan : बूंदी नगर परिषद के निर्णय के विरुद्ध जिला कलक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को सौंपा पत्र


अलग-अलग संगठनों से जुड़े लोगों ने दावा किया कि एक तस्वीर की वेशभूषा में बूंदा मीणा को दर्शाया है वह बूंदी की पूर्व रियासत के पूर्व नरेशों की रही है। वह आदिवासी वेशभूषा नहीं है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार बूंदी की स्थापना वर्ष 1242 में रावदेव ङ्क्षसह हाड़ा ने की थी। जो बम्बावदा से थे। शिलालेखों के आधार पर बूंदी का पूर्व नाम वृंदावती था। पत्र के साथ अलग-अलग तथ्यों से बताया कि बूंदी का नाम बूंदा नाळ के नाम पर पड़ा। जिसका उल्लेख प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर भी होने का दावा किया। पत्र में बताया कि इतिहास में अंकित तथ्यों के आधार पर नगर परिषद बूंदी के प्रमाणित संस्थापक राव देवा ङ्क्षसह की प्रतिमा लगवाए। इस प्रतिमा को रतनबुर्ज के ठीक सामने लगाया जाना चाहिए।

पत्र में चेतावनी दी कि ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पत्र के साथ राजस्थान सरकार की वेबसाइट के अंश, वंशभास्कर के अंश, एनल्स एंड एंटीक्विटि ऑफ राजस्थान -जेम्स टॉड कृत के अंश, राजपूताने का इतिहास आदि की छाया प्रतियां भी सौंपी गई, जिनमें बूंदी की स्थापना और इतिहास लिखा है। इस दौरान विजय ङ्क्षसह, विक्रम ङ्क्षसह, कुलदीप ङ्क्षसह मांगली, नरेन्द्र ङ्क्षसह, अजीत ङ्क्षसह, दिलीप ङ्क्षसह, भूपेन्द्र ङ्क्षसह आदि भी मौजूद थे।

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