पंचतत्व में विलीन हुए ऐलक विश्वोत्तम सागर महाराज, हर आंख दिखी नम

मुनि विश्रांत सागर महाराज के संघस्थ क्षुल्लक विश्वोत्तम सागर महाराज (73) की सोमवार को बूंदी के देवपुरा जैन मंदिर में अल सुबह समाधि हो गई।

By: pankaj joshi

Published: 06 Jan 2020, 09:58 PM IST

बूंदी. मुनि विश्रांत सागर महाराज के संघस्थ क्षुल्लक विश्वोत्तम सागर महाराज (73) की सोमवार को बूंदी के देवपुरा जैन मंदिर में अल सुबह समाधि हो गई। महाराज सुबह शौच करके लौट रहे थे, तभी चक्कर आने से जमीन पर गिर गए। जमीन पर गिरने की आवाज सुनकर यहां सो रहे लोग दौड़ पड़े। सिर पर चोट आने से समाधि हो गई।दोपहर बाद देवपुरा संभवनाथ दिगम्बर जैन मंदिर से अंतिम चकडोल यात्रा निकाली गई। यात्रा में हाड़ौती सहित दूर-दराज से लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। यहां अंतिम दर्शन के दौरान कई जनों की आंखें नम हो गई।
आचार्य गुरुवर विराग सागर महाराज से 3 मई 2012 को जयपुर के भवानी निकेतन में क्षुल्लक की दीक्षा ली थी। क्षुल्लक विश्वोत्तम सागर महाराज सुबह करीब 5 बजे शौच करने निकले थे, तभी मंदिर में आते समय अचानक चक्कर आने से जमीन पर गिर।महाराज को घायल अवस्था में कमरे में लाया गया, जहां मुनि विश्रांत सागर महाराज ने णमोकार मंत्र सुनाया। बाद में चिकित्सक के उपचार के दौरान उनकी समाधि हो गई। जैसे-जैसे जैन समाज में महाराज के समाधि की खबर सुनी सभी लोग मंदिर में पहुंचे, जहां सभी ने महाराज के अंतिम दर्शन कर श्रीफल भेंट किया। दोपहर बाद मंदिर से गाजे-बाजे के साथ अंतिम चकडोल यात्रा रवाना हुई। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गणेश बाग रोड स्थित जैन छात्रावास में पहुंची। जहां पंडित मनीष जैन शास्त्री ने विधि-विधान के साथ धार्मिक क्रियाएं कराई। यहां चौंतरा का खेड़ा निवासी नेमीचंद सोनू कुमार ठोला परिवार ने महाराज को मुखाग्नि दी। इससे पहले चकडोल यात्रा में पालकी को प्रथम बार उठाने का सौभाग्य पारस कुमार जठानीवाल अलोद, इंद्र जठानीवाल अलोद, दिनेश धानोत्या बूंदी व तेजमल लाम्बाबास परिवार बूंदी का गोठड़ा को मिला।

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