राजस्थान के बूंदी में बना ऐसा बांध जो खुद ही पी रहा पानी...जानकर रह जाएंगे हैरान

बांध ही पानी पी गया! सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन बारिश में पूरी तरह लबालब हुए बांध के पानी को सिंचाई के लिए देने से पहले ही रीतने से किसान और अभियंता हैरत में पड़ गए।

pankaj joshi

December, 0712:28 PM

- सथूर माताजी लघु सिंचाई परियोजना
- बारिश में हुआ लबालब, नहर में पानी छोडऩे से पहले ही आधे से अधिक रीता
- किसान और अभियंता हैरत में पड़े
बूंदी. बांध ही पानी पी गया! सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन बारिश में पूरी तरह लबालब हुए बांध के पानी को सिंचाई के लिए देने से पहले ही रीतने से किसान और अभियंता हैरत में पड़ गए। जी हां! हम बात कर रहे हैं जिले की बहुउद्देशीय सथूर माताजी लघु सिंचाई परियोजना की। चंद्रभागा नदी पर बना यह बांध इस बार बारिश में पूरी तरह से लबालब हो गया था। तब किसानों और ग्रामीणों को बांध से सिंचाई के लिए पानी मिलने और क्षेत्र का जलस्तर गर्मी तक बना रहने में मदद की उम्मीद बंधी थी, लेकिन बांध बारिश थमने के कुछ माह बाद ही रीत गया।
बांध की कुल भराव क्षमता 13 फीट है, जिसमें आधे से कम पानी रह गया। बांध के यों रीतने से जानकार अभियंता भी हैरत में हैं। जबकि किसानों और जनप्रतिनिधियों ने करोड़ों की लागत से तैयार हुई इस परियोजना के काश्तकारों के काम नहीं आने को गंभीर माना। यह बांध हिण्डोली उपखंड क्षेत्र के सथूर के निकट चंद्रभागा नदी पर बना है।
15 वर्ष बाद मिली थी मंजूरी
वर्ष 1995 से लगातार क्षेत्र के ग्रामीण चंद्रभागा नदी पर बांध बनाने की मांग कर रहे थे। 15 वर्ष तक परियोजना के लिए वन विभाग से स्वीकृति नहीं आई। वर्ष 2010 के बाद परियोजना को राज्य सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद वर्ष 2015 में परियोजना का निर्माण शुरू किया गया जो डेढ़ वर्ष बाद पूरा कर लिया गया। बांध के निर्माण पर तीन करोड़ 77 लाख रुपए की लागत आई। वर्ष 2018 में कम बारिश के चलते बांध में पानी की कम आवक हुई, तब बांध बीस दिन बाद ही रीत गया था। ग्रामीणों ने तब भी सवाल खड़े किए थे, लेकिन जिम्मेदारों ने गौर नहीं किया। अब इस वर्ष 2019 में बांध में पर्याप्त पानी भरा। बांध पर चादर भी चली, लेकिन दिसम्बर माह की शुरुआत में बांध का कई फीट पानी रीत गया।
इन गांवों को थी आस
सथूर, बड़ौदिया व बोरखंडी तक करीब 19 किमी लाइप लाइन बिछाई जाएगी। जिससे 173 हैक्टेयर में लिफ्ट से सिंचाई होगी। सथूर, नटावा, हरिपुरा, भीलों का झोंपड़ा, जागा का झोंपड़ा, बड़ौदिया, बोरखंडी, ठीकरदा, रामचंद्रजी का खेड़ा, त्रिशुल्या, दातां, धनावा, रामनिवास गांव के ग्रामीणों को बांध से आस बंधी थी।
शुरुआत में ही उठे थे सवाल
बांध का निर्माण शुरू होने पर जानकारों ने गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए थे। तब नींव में सीमेंट मिलाने का निर्णय हुआ, लेकिन इस काम में कोताही बरती गई। आस-पास चट्टानी इलाका होने से किसानों का तर्क था कि गुणवत्ता पर ध्यान नहीं रखा गया तो बांध किसी काम का नहीं रहेगा, लेकिन इस पर किसी ने गौर नहीं किया। अब यहां किसानों ने दावा किया कि बांध कुछ ही दिनों में पूरी तरह सूख जाएगा।
मिट्टी की परत जमेगी तो रुकेगा
सथूर माताजी लघु सिंचाई परियोजना के सहायक अभियंता दीपक चतुर्वेदी का तर्क है कि बांध में दो-तीन वर्ष तक पानी भरने के बाद मिट्टी की परत जमेगी। उसके बाद ही बांध में पूरी तरह से पानी रुकेगा। अभी फिलहाल बांध में मिट्टी की परत नहीं जमने से संभवत पानी का रिसाव हुआ।
बांध का पानी किसानों को सिंचाई के लिए देने से पहले ही रीत गया। लिफ्ट का काम पूरा नहीं हुआ। बांध निर्माण की शुरुआत में ही गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन अभियंता अनसुना करते रहे। अब परिणाम दो ही वर्ष में सबके सामने आ गए। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
मनमोहन धाभाई, पूर्व सरपंच सथूर
जल्द बांध क्षेत्र का दौरा करेंगे। पूरे मामले को दिखवाया जाएगा। बांध से पानी रीतने के कारणों का पूरा पता लगाया जाएगा।
एजाजुद्दीन अंसारी, अधीक्षण अभियंता

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