राखी बांधने से पहले इस बार बहने पढ़ लें यह खबर, कौन सा योग बढ़ाएगा प्रेम

भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन इस बार विशेष शुभ संयोग के बीच मनाया जाएगा। इस बार राखी का त्योहार राजयोग में आएगा। भद्रा नहीं रहने से पूरे दिन राखी बांधी जा सकेगी।

By: Narendra Agarwal

Updated: 21 Aug 2021, 05:54 PM IST

धनिष्ठ नक्षत्र के साथ शोभन, गजकेसरी व राजयोग बनेगा

बूंदी. भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन इस बार विशेष शुभ संयोग के बीच मनाया जाएगा। इस बार राखी का त्योहार राजयोग में आएगा। भद्रा नहीं रहने से पूरे दिन राखी बांधी जा सकेगी। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि 21 अगस्त को शाम 7 बजे शुरू होगी, जो कि 22 अगस्त शाम 5.32 बजे तक रहेगी। रविवार के दिन धनिष्ठा नक्षत्र का होना विशेष फलदायी रहेगा।
ज्योतिषाचार्य अमित जैन ने बताया कि रक्षाबंधन पर पडऩे वाले विशेष शुभ संयोग में से पहला संयोग धनिष्ठ नक्षत्र के साथ शोभन, गजकेसरी, राजयोग रहेगा। जो इस दिन की शुभता में वृद्धिकारक रहेंगे। इन योगों के चलते राखी बंधवाना भाई की सुख-समृद्धि की वृद्धि करता है। दूसरा इसी दिन हर कार्य के लिए शुभ माने जाने वाला शोभन योग का संयोग बन रहा है। यह दोनों ही संयोग शुभ फलदायी है। हर वर्ष रक्षाबंधन पर अशुभ माने जाने वाली भद्रा का प्रभाव रहता है, लेकिन इस बार भद्रा नहीं है। सुबह से शाम तक शुभ मुहूर्त में बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती है। बहनें, रविवार को दिनभर किसी भी मुहूर्त में रक्षा सूत्र बांध सकती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रावण की बहन ने भद्रा काल में ही उसे रक्षा सूत्र बांध दी थी। जिससे रावण का सर्वनाश हो गया था। लेकिन इस वर्ष खास बात यह कि अशुभ माना जाने वाला भद्रा योग का भी साया रक्षाबंधन के दिन नहीं पड़ेगा। यह अशुभ योग भी इस वर्ष बहनों को भाइयों के कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने में बाधक नहीं रहेगा।

राज योग : राजयोग में किया गया शुभ कार्य मंगलकारी रहता है। इस विशेष योग में रक्षाबंधन करना सभी भाई-बहनों के लिए सिद्धदायक रहेगा।
शोभन योग : शोभन योग को शुभ कार्यों और यात्रा पर जाने के लिए अति उत्तम कहा गया है। इस योग में शुरू की गई यात्रा अत्यंत सुखद व मंगलकारी होती है।
धनिष्ठा नक्षत्र : धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है। मान्यता है कि धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वाला भाई अपने बहन के प्रति विशेष लगाव रखता है।

शुभता की होगी वृद्धि
ज्योतिषाचार्य के अनुसार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रंग-बिरंगी राखियां बांध अपना स्नेह, आशीर्वाद और रक्षा की कामना करती हैं। ऐसे तो रक्षासूत्र के सभी रंग अच्छे होते हैं, यदि राशि के अनुसार रंग की राखी बांधी जाए तो वह भाई के लिए विशेष लाभदायी होता है। राशि के अनुरूप रंग की बांधी जाए तो इससे भाई और बहन के लिए शुभ रहता है। इसलिए बहनों को राशि के हिसाब से रंग का चयन कर भाइयों की कलाई पर राखी बांधनी चाहिए। राखी के रंगों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जब भी कोई कार्य शुभ समय में किया जाता है, तो उस कार्य की शुभता में वृद्धि होती है और निश्चिततौर पर फल मिलता है।

 

राशि के अनुसार राखी का रंग
मेष - लाल रंग की राखी बांधे
वृषभ - क्रीम रंग की राखी
मिथुन - हरे रंग की राखी
कर्क - क्रीम या सफेद रंग की राखी
सिंह - नारंगी रंग की राखी
कन्या - हरे रंग की राखी
तुला - क्रीम रंग की राखी
वृश्चिक - लाल रंग की राखी
धनु - सुनहरे पीले रंग की राखी
मकर - नीले रंग की राखी
कुंभ - नीले रंग की राखी
मीन - सुनहरे पीले रंग की राखी

राखी बांधने के मुहूर्त
सुबह 7.41 से दोपहर 12.30 बजे तक चर, लाभ, अमृत का चौघडिय़ा रहेगा। साथ ही अभिजित मुहूर्त दोपहर 12.4 से 12.55 बजे तक होगा। दोपहर 2.6 से अपराह्न 3.42 बजे शुभ का चौघडिय़ा। इसके अलावा प्रदोष काल में शाम 7 से 9 बजे राखी बांधी जा सकती है।

Narendra Agarwal Desk
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