पढ़े क्यों सूख गई जीवनदायिनी मेज नदी

क्षेत्र की जीवनदायिनी माने जाने वाली मेज नदी में इन दिनों गर्मी की दस्तक के साथ ही पानी रीतने लगा है। अप्रेल माह की शुरुआत के साथ ही नदी में जलस्तर कम होने के साथ कई स्थानों पर नदी सूखने से पैंदा नजर आने से क्षेत्र के ग्रामीणों की आगामी दिनों को लेकर चिंता बढऩे लगी है।

By: pankaj joshi

Published: 15 Apr 2021, 09:18 PM IST

पढ़े क्यों सूख गई जीवनदायिनी मेज नदी
फसलों की कर रहे सिंचाई, आगामी दिनों में बढ़ेगी समस्या
बड़ानयागांव. क्षेत्र की जीवनदायिनी माने जाने वाली मेज नदी में इन दिनों गर्मी की दस्तक के साथ ही पानी रीतने लगा है। अप्रेल माह की शुरुआत के साथ ही नदी में जलस्तर कम होने के साथ कई स्थानों पर नदी सूखने से पैंदा नजर आने से क्षेत्र के ग्रामीणों की आगामी दिनों को लेकर चिंता बढऩे लगी है। पिछली बार क्षेत्र में मानसून कमजोर रहने से नदी में पानी की आवक तो कम हुई थी, लेकिन पिछले दिनों क्षेत्र के गुढ़ाबांध से नहरों में पानी छोडऩे के दौरान सीपेज का पानी नालों के माध्यम से नदी में आने से मेज नदी लबालब भरने के साथ नदी में बने एनिकट पर चादर चलना शुरू हो गया था।
क्षेत्र के लोगों ने बताया कि इन दिनों मेज नदी में ट्यूबवेल डालकर क्षेत्र के मांगली कला, बोरखेड़ा, मांगली खुर्द, अशोकनगर, बिचड़ी चेता आदि गांवों में किसान नदी किनारे स्थित खेतों में सब्जियों की फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। जिसके चलते नदी में लगातार जलस्तर कम होता जा रहा है। नदी से पानी की अवैध निकासी जल्द नहीं थमी तो क्षेत्र में आगामी दिनों में नदी से पूरी तरह पानी रीतने के साथ क्षेत्र में भूजल स्तर में गिरावट होने से क्षेत्र के एक दर्जन गांवों के लोगों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो सकता है।
नदी में पानी सूखने से वन्यजीवों के साथ मवेशियों के सामने भी पेयजल की समस्या उत्पन्न जाएगी। क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से मेज नदी में की जा रही अवैध पानी की निकासी पर शीघ्र रोक लगाने की मांग उठाई।
अतिक्रमण से बिगड़ा नदी का मूल स्वरूप
मेज नदी में गुढाबांध से लेकर अलोद तक नदी किनारे दोनों तरफ अतिक्रमण होने से नदी का मूल स्वरूप दिनोंदिन बिगड़ता जा रहा है। क्षेत्र के गांवों में लोगों ने नदी किनारे अतिक्रमण कर खेती करना शुरू कर दिया है। अतिक्रमण के चलते नदी में बरसाती पानी के आवक के रास्ते पूरी तरह से अवरुद्ध हो चुके हैं। इसके चलते नदी में बरसात के दिनों में पानी की आवक कम हो पाती है। नदी किनारे आसपास हरे पेड़ों को अतिक्रमण कर काट देने से अब नदी किनारे देखने वाली हरियाली भी नजर नहीं आती। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि प्रशासन की ओर नदी पर हो रहे अतिक्रमण को नहीं हटाया तो आगामी दिनों में मेज नदी के अस्तित्व पर पूरी तरह से खतरा मंडरा जाएगा।

pankaj joshi Photographer
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