पांच साल से अनुपयोगी पड़ी मोर्चरी

जन सुविधाओं के लिए सरकार तो धन लगा देती है लेकिन वह धन कहां खर्च हो रहा है और उसकी उपयोगिता हो रही है या नहीं हो रही है यह देखना सरकारी नुमाइंदों का काम होता है लेकिन देखरेख के अभाव में 5 वर्षों से मोर्चरी के ताले तक नहीं खुल पाए।

By: pankaj joshi

Published: 14 Sep 2020, 07:02 PM IST

पांच साल से अनुपयोगी पड़ी मोर्चरी
केशवरायपाटन. जन सुविधाओं के लिए सरकार तो धन लगा देती है लेकिन वह धन कहां खर्च हो रहा है और उसकी उपयोगिता हो रही है या नहीं हो रही है यह देखना सरकारी नुमाइंदों का काम होता है लेकिन देखरेख के अभाव में 5 वर्षों से मोर्चरी के ताले तक नहीं खुल पाए। पुराने चिकित्सालय भवन में मोर्चरी की व्यवस्था नहीं होने के बाद वहां तो जैसे तैसे काम चला लिया, लेकिन अब नवनिर्मित भवन के पास वर्ष 1914-15 में लाखों रुपए की लागत से मोर्चरी का निर्माण करवाया गया था लेकिन वहां तक जाने के रास्ता नहीं होने से वह अनुपयोगी साबित हो रही है। मोर्चरी के आसपास जंगल हो रहा है और रात में तो वहा जाने से में भी डर लगता है। खुले में रखने पड़ते हैं शव केशोरायपाटन. सीएडी के पास नवनिर्मित चिकित्सा भवन के पीछे 5 साल पहले बनाई मोर्चरी तक पहुंचने का रास्ता नहीं होने से अब भी शवों को खुले में ही रखना पड़ता है। चिकित्सा सूत्रों ने बताया कि मोर्चरी तक जाने का रास्ता नहीं है जिसे शवों को पास में ही खाली स्थान पर रखा जाता है।
मोर्चरी पांच साल पहले बनकर तैयार हो गई थी। उसके बाद वहां जाने के लिए संपर्क सडक़ वह आस-पास सीसी के लिए प्रस्ताव बनाकर भिजवा रहे हैं। प्रस्ताव मंजूर होने के बाद कार्य होगा।
लोकेन्द्र कुमार अग्रवाल, सहायक अभियंता राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन बूंदी

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