इस गांव की पहचान है रघुनाथजी महाराज मठ मन्दिर व बावड़ियां...खासियत देखकर आप भी रह जाएंगे दंग

बूंदी जिले से 60 किमी की दूरी पर बसे नोताड़ा गांव की पहचान रघुनाथजी महाराज मठ मंदिर व प्राचीन बावडिय़ों से बनी हुई है। सैकड़ों सालों पुराने मंदिर व बावडिय़ों को लोग आज भी सहेज कर रखे हुए हैं।

By: pankaj joshi

Published: 09 Jun 2021, 09:36 PM IST

इस गांव की पहचान है रघुनाथजी महाराज मठ मन्दिर व बावड़ियां...खासियत देखकर आप भी रह जाएंगे दंग
बावड़ियां को संरक्षण की दरकार
वर्तमान में दसवी पीढ़ी के महन्त महेंद्र दास महाराज मन्दिर का संचालन कर रहे है
नोताड़ा. बूंदी जिले से 60 किमी की दूरी पर बसे नोताड़ा गांव की पहचान रघुनाथजी महाराज मठ मंदिर व प्राचीन बावडिय़ों से बनी हुई है। सैकड़ों सालों पुराने मंदिर व बावडिय़ों को लोग आज भी सहेज कर रखे हुए हैं।
रघुनाथजी महाराज का मठ मन्दिर गांव में प्रवेश करने से कुछ दूरी पर ही स्थित है। यहां मन्दिर परिसर में प्रवेश के दोनों साइड में दो छतरियां बनी हुई है। यह मन्दिर करीब 450 वर्ष पुराना बताया जाता है और मन्दिर में भगवान राम लक्ष्मण व सीता माता की प्रतिमा विराजित है। बताया जाता है कि यहां पर नागा साधु ही मन्दिर के गर्भगृह में प्रवेश करके सेवा पूजा करते हैं। दूसरे व्यक्ति का यहां प्रवेश वर्जित है। शुरुआत में यहां के महन्त ब्रह्मादास महाराज थे। जिन्होंने तीनों मूर्तियों को अपने हाथों से बनाकर विराजमान करवाया था। वर्तमान में दसवी पीढ़ी के महन्त महेंद्र दास महाराज मन्दिर का संचालन कर रहे है। यहां पर कृष्ण जन्माष्टमी, बसन्त पंचमी, रामनवमी, व अन्नकूट महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।
यहां पर महन्त बनने के लिए बच्चे के मां बाप अपने छोटे बच्चे को ही यहां रख जाते हैं। जिसका पालन पोषण यहीं होता है। महन्त की मृत्यु हो जाने के बारह दिन बाद जो महन्त बनता है, उसको रिश्तों का त्याग करना पड़ता है।
गोशाला हो रही संचालित
कस्बे में रघुनाथजी महाराज मठ मन्दिर की ओर से गोशाला भी संचालित कि जा रही हैं। जिसमें करीब 80 गायों की सेवा की जा रही है। महन्त महेंद्र दास महाराज द्वारा पांच बीघा में करीब 50 लाख रुपए की लागत से गोशाला का निर्माण करवाया गया है।
तीन दिवसीय तेजाजी महाराज का मेला है प्रसिद्ध
तीन दिवसीय तेजाजी महाराज का मेला भी क्षेत्र में प्रसिद्ध है। यहां बने मेला मंच पर रामलीला रासलीला के प्रणेता कहे जाने वाले वंृदावन मथुरा के रामस्वरूप शर्मा व फतेहराम शर्मा वृंदावन कई बार कार्यक्रम कर चुके हैं। इस मंच पर राजस्थानी कलाकार ममता वाजपेयी, लक्ष्मी बेनीवाल, रश्मि पंजाबी, कंचन सपेरा सहित कई कलाकार प्रस्तुति दे चुके हैं।
चार बावड़ियां व बारह खम्भों की छतरी भी प्रसिद्ध
गांव में चारों ओर चार बावडिय़ां बनी हुई है। एक बावड़ी गुप्त बताई जाती है। बाकी तीनों में देहीखेड़ा रोड से नोताड़ा में प्रवेश करते वक्त गुरु महाराज की बावड़ी है। जिसमें करीब पांच सौ सीढिय़ां हैं। बावड़ी की लम्बाई करीब 100 फीट है। उधर मालिकपुरा रास्ते पर जिन्द बाबा की बावड़ी है। रघुनाथपुरा रोड पर बालाजी महाराज की बावड़ी है। इन्हें देखरेख की दरकार है। साथ ही यहां बनी बारह खम्भों की छतरी गांव की सौंदर्यता बढ़ा रही है। इसका जीर्णाेद्धार यहां के बंशी बाबा ने करवाया है।

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