बूंदी जिले में इस जगह तीन माह से दो बाघों ने बनाया अपना आशियाना

रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में नर बाघों की बढ़ती संख्या व जिले की अनुकूल प्राकृतिक दशाओं के चलते दो बाघों ने बूंदी के जंगलों में अपनी टेरिटरी बना ली। वन विभाग ने दोनों बाघों की ट्रेकिंग के लिए पुख्ता

By: Narendra Agarwal

Published: 03 Jan 2020, 12:35 PM IST

बूंदी. रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में नर बाघों की बढ़ती संख्या व जिले की अनुकूल प्राकृतिक दशाओं के चलते दो बाघों ने बूंदी के जंगलों में अपनी टेरिटरी बना ली। वन विभाग ने दोनों बाघों की ट्रेकिंग के लिए पुख्ता इंतजाम करते हुए बूंदी से अतिरिक्त जाब्ता लगाकर जंगल में ही अस्थाई चौकी बना दी।
जानकारी के अनुसार करीब तीन माह से टेरिटरी की जंग में रणथम्भौर से बाहर निकले दो युवा नर बाघों ने जिले के लाखेरी क्षेत्र के वन क्षेत्र में अपना नया ठिकाना बना लिया। बाघ टी 110 जिले में प्रादेशिक वन मंडल क्षेत्र स्थित मेज नदी के किनारे खरायता के आसपास तथा दूसरा बाघ टी 115 रणथम्भौर के बफर क्षेत्र के इंद्रगढ़ इलाके में चंबल किनारे सखावदा घाटी इलाके में डेरा जमाए हुए है। दोनों युवा नर बाघ जिले के अलग-अलग वन क्षेत्रों में होने से इनकी निगरानी बूंदी व सवाईमाधोपुर की टीमें कर रही है। कड़ाके की सर्दी व नदी के बीहड़ों की वजह से दोनों बाघों की ट्रेकिंग में लगे वनकर्मियों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। बूंदी जिला मुख्यालय की टीम तो मेज नदी किनारे अस्थाई टेंट लगाकर बाघ की निगरानी में जुटी है। बाघ के नियमित पगमार्क व फोटोट्रेप कैमरे से फोटो लिए जा रहे हैं।

रामगढ़ में आने की उम्मीद
बाघ टी 110 लम्बे समय से जिले में मेज नदी किनारे डेरा डाले हुए है, जिसके रामगढ़ अभयारण्य में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। मेज नदी किनारे इन दिनों किसानों के सिंचाई के लिए लगाए डीजल पंप दिन रात चलने से बाघ का मूवमेंट फिलहाल एक जगह बना हुआ है, लेकिन अब सरसों बड़ी होने से विभाग को उम्मीद हैं कि बाघ शीघ्र रामगढ़ में प्रवेश कर जाएगा। गौरतलब है कि यह बाघ प्रतापगढ़- ढगारिया व खेड़ली-देवजी तक आता जाता रहा है।

जिस क्षेत्र में बाघ टी-110 की गतिविधियां बनी हुई है, वह इलाका मेज नदी का बीहड़ क्षेत्र है तथा वर्तमान में यहां बाघ के लिए पर्याप्त प्रे-बेस होने से यह आगे नहीं बढ़ रहा है। उम्मीद है कि मौसम परिवर्तन व प्रे-बेस कम होने पर यह बाघ शीघ्र बूंदी के रामगढ़ अभयारण्य में प्रवेश कर जाए।
पृथ्वी सिंह राजावत, पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक, बूंदी

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