सूखने के कगार पर जिकजेक डेम

इस बार अच्छी बरसात नहीं होने से कस्बे की शंकरपुरा बस्ती के समीप स्थित जिकजेक डेम सूखने के कगार पर पहुंच गया है।

By: pankaj joshi

Updated: 20 Nov 2020, 07:08 PM IST

सूखने के कगार पर जिकजेक डेम
पाळ के नजदीक डाबरे में 2-3 फीट पानी
लाखेरी. इस बार अच्छी बरसात नहीं होने से कस्बे की शंकरपुरा बस्ती के समीप स्थित जिकजेक डेम सूखने के कगार पर पहुंच गया है। जानकारी के अनुसार जिकजेक डेम की पाळ के नजदीक डाबरे में 2-3 फीट पानी भरा हुआ है तो आसपास के कुओ में दिनों दिन जल दोहन होने से रोजाना पानी पैंदे में बैठता जा रहा है। कभी लबालब भरे रहने वाले डेम में चारों ओर मिट्टी के टीले ही टीले नजर आते है और पानी एक डाबरे में नजर आता है। वहां पर स्थित चौकीदार ने बताया कि डेम का पानी रोज बैठ रहा है और जनवरी तक पूरा डेम सूखने के कगार पर पहुंच जाएगा। पानी रीतने से डेम में चारों ओर पत्थर व गंदगी नजर आ रही है। बीते वर्ष डेम लबालब भर गया था और इस वर्ष बरसात नहीं होने से सूखने के कगार पर है। डेम के सूखने से जंगली जंतुओं व मवेशियों को पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी वहीं कुओं का जलस्तर भी बैठ जाएगा व रिचार्ज की आवक भी कम हो जाएगी जिससे खेती किसानीभ्भी प्रभावित होगी।
अंगे्रजों ने बनाया था
करीब 400 बीघा क्षेत्रफल में फैला डेम पहाडी से बहकर आने वाले पानी से भरता है जो जिकजेक की आकृति में बना हुआ है। इसका निर्माण वर्ष 1935 में हुआ था। इसकी जिकजेक आकृति आज भी पूर्णतया सुरक्षित है व उस समय की अंगे्रज इंजीनियरों के कुशलनिर्माण की कला का आकर्षक नमूना है। वर्ष 2000 से पूर्व में ये बंधे की कच्ची पाळ से टूट भी गया था जिसको मरममत करा कर सही करवाया गया है।
समिति कर रही है प्रयास
कस्बे में अल सुबह मार्निंग वाक पर जाने वाले कई बुजुर्गो ने एक समिति का गठन कर इसकी सार संभाल का जिममा लिया है। डेम के समीप पार्कमें उन्होंने करीब 100 से अधिक पौधे लगाए है और उनकी नियमित सारसंभाल करते है। पार्क में फैले पत्थरों को हाथों से एकत्रित कर ढेर भी लगा रखे है। अफसोस की बात यह है कि पालिका प्रशासन जागरूक लोगों द्वारा किए गए श्रमदान का महत्व नहीं समझता और उनको वहां से हटाने में भी रूचि नहीं दिखा रहा। यही स्थिति डेम की साफ सफाई को लेकर है वहां पर इंटरलॉक खुरंजे पर गिट्टी फैली हुई है जो मार्निंग वाक करने वालों के पैरों में चुभती है। इस ओर भी पालिका का ध्यान नहीं है।
पानी आने के रास्ते है अवरूद्ध
डेम का भरना वर्तमान में बरसात पर ही निर्भर है और 80 के दशक से पूर्व सीमेट उद्योग ने मेज नदी से पाइप लाइन डाल रखी थी जिससे डेम नियमित रूप से भरता था और वही से वो अपने आवश्यकता का पानी लेती थी। तब डेम की सार संभाल होती थी और बडा मनोरम दृश्य होता था बाद में उद्योग ने डेम से पानी लेना छोड़ दिया । एक वर्ष अत्याधिक बरसात होने से डेम टूट गया तो सीमेंट उद्योग ने इसे सिंचाई विभाग को सौंप दिया , तब से ये उसी के अधीन चल रहा है। इसके पानी आने के पहाड़ी रास्ते पर जगह जगह अतिक्रमण हो गया और उनका स्वरूप भी बिगड़ गया है। जिससे पूर्व में डेम में आने वाला बरसाती पानी रामधन चौराहे के समीप से नाले में निकल कर मेज नदी में पहुंच जाता है।

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