बांधों का पानी नहरों में प्रवाहित की तिथियां तय

हिण्डोली क्षेत्र के बांधों की नहरों में रबी की फसल में सिंचाई के लिए नवंबर माह में जल प्रवाह किया जाएगा, लेकिन कई बांधों में पर्याप्त पानी नहीं होने से किसानों को फसल सिंचाई के लिए एक या दो बार ही पानी मिल पाएगा।

By: pankaj joshi

Published: 26 Oct 2020, 07:13 PM IST

बांधों का पानी नहरों में प्रवाहित की तिथियां तय
रबी की फसल को मिलेगा एक या दो बार सिंचाई का पानी
हिण्डोली. हिण्डोली क्षेत्र के बांधों की नहरों में रबी की फसल में सिंचाई के लिए नवंबर माह में जल प्रवाह किया जाएगा, लेकिन कई बांधों में पर्याप्त पानी नहीं होने से किसानों को फसल सिंचाई के लिए एक या दो बार ही पानी मिल पाएगा। जल संसाधन विभाग के आधिकारिक सूत्रों की माने तो इस बार बारिश कम होने के कारण क्षेत्र के अधिकांश जल स्रोत लबालब नहीं हो पाए थे। हालांकि गत वर्ष का पानी बचने के कारण जल स्रोतों में पानी की ठीक-ठाक आवक हो गई थी। जिस कारण किसानों को सिंचाई के लिए एक या दो बार पानी मिल जाएगा । जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता दीपक चतुर्वेदी ने बताया कि बाक्या बांध में एक दिसम्बर से जल प्रवाह किया जाएगा। यहां किसानों को एक बार ही पानी मिल पाएगा। मरडिय़ा बांध का पानी पांच नवंबर को नहर में प्रवाहित किया जाएगा, यहां के किसानों को दो बार ही पानी मिल सकेगा। इसी प्रकार पेच की बावड़ी व नारायणपुर बांध में भी 5 नवंबर को जल प्रवाह होगा। पेच की बावड़ी क्षेत्र के किसानों को एक बार ही सिंचाई के लिए पानी मिल पाएगा। वहीं नारायणपुर के किसानों को तीन बार रबी की फसल के लिए पानी मिल सकेगा। मेण्डी बांध का पानी 15 नवंबर को प्रवाहित होगा। यहां के किसानों को भी फसल के लिए मात्र एक ही बार पानी मिले पाएगा। गुढ़ा बांध के सहायक अभियंता जंबू जैन ने बताया कि रोणीजा में 5 नवंबर को नहरों में जल प्रवाह होगा। वहीं गोठड़ा बांध का पानी 12 नवंबर को नहरों में प्रवाह किया जाएगा। वहीं जल संसाधन विभाग के अभियंताओं ने किसानों से आग्रह किया कि सिंचाई के दौरान पानी की एक-एक बूंद का महत्व समझते हुए पानी को व्यर्थ नहीं जाने दें।
जिला कलक्टर की बैठक के बाद होगा गुढ़ा बांध में जल प्रवाह का निर्णय
जल संसाधन विभाग के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि गुढ़ा बांध दाईं व बाईं मुख्य नहर में जल प्रवाह को लेकर बूंदी जिला कलक्टर कार्यालय में स्थित सभा भवन में बैठक होगी। वहां पर जल उपयोक्ता संगमों के अध्यक्ष व विभाग के अधिकारियों के बीच चर्चा के बाद नहरों में जल प्रवाह की तिथि तय की जाएगी। उधर उपयोगिता संघ अध्यक्ष ने बताया कि दशकों से गुढा बांध की नहरों में जल प्रवाह करने का निर्णय सथूर स्थित कनिष्ठ अभियंता कार्यालय परिसर में आयोजित बैठक में होता था, लेकिन कुछ समय जल उपयोक्ता संगम के अध्यक्षों की बैठक बूंदी में हो रही हैं।
इस बार बांधों में पानी लबालब नहीं भरा होने के कारण सिंचाई के लिए दिया जाने वाले पानी की एक-एक बूंद का महत्व किसानों को समझना होगा। पानी व्यर्थ नहीं जाए पानी पूरी तरह सिंचाई में लिया जाए ।
आरके पाटनी, अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग बूंदी।

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