शादियां होने लगी रद्द, घोड़ी, बैंड, मैरिज गार्डन संचालकों पर पड़ी मार

गीत-संगीत, कलश उत्साह बैंड-बाजा और बारात। यह ही विवाह समारोह में खुशी के पल, लेकिन शायद इस खुशी के पल को कोरोना महामारी की नजर लग गई। शादियों का सीजन शुरू हो चुका, लेकिन कोरोना के चलते दहशत में आए लोग अब शादी समारोह सीमित या स्थगित करने लग गए।

By: pankaj joshi

Published: 02 May 2021, 10:00 PM IST

शादियां होने लगी रद्द, घोड़ी, बैंड, मैरिज गार्डन संचालकों पर पड़ी मार
बैंडबाजों की 90 फीसदी बुकिंग निरस्त, रोजी-रोटी पर मंडराया संकट
कोरोना संक्रमण के चलते स्थगित होने लगे शादी समारोह
बूंदी. गीत-संगीत, कलश उत्साह बैंड-बाजा और बारात। यह ही विवाह समारोह में खुशी के पल, लेकिन शायद इस खुशी के पल को कोरोना महामारी की नजर लग गई। शादियों का सीजन शुरू हो चुका, लेकिन कोरोना के चलते दहशत में आए लोग अब शादी समारोह सीमित या स्थगित करने लग गए। विवाह मंडप संचालकों के साथ ही शादी से जुड़े कारोबार करने वालों के सामने फिर से रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। बीते वर्ष भी इन लोगों को शादी के सीजन में कोरोना संक्रमण फैलने के कारण मुश्किलें झेलनी पड़ी थी। अब तक करीब 90 फीसदी बुकिंग कैंसिल हो चुकी। इतना ही नहीं मैरिज गार्डन, होटल और गेस्ट हाउस के संचालकों को उनका पैसा भी लौटाने की नौबत आ गई। वहीं कई लोगों ने शादियां नवम्बर-दिसम्बर तक आगे खिसका ली। यही नहीं बढ़ते कोरोना से मई-जून में होने वाली अधिकतर शादियां निरस्त हो गई।
सादगी पूर्ण और समझदारी ही सुरक्षा
कोरोनाकाल के इस संकट के समय सादगी पूर्ण आयोजनों में ही समझदारी और सुरक्षा होगी। यह लोगों की समझ में भी आने लगा। प्रशासन की ओर से विवाह समारोह में अधिकतम 50 लोगों को ही कोरोना एडवाइजरी की पालना करते हुए शामिल होने की छूट दी गई। ऐसे में पहले से भव्य समारोह के आयोजन की तैयारी में भवन पैलेस, घोड़ी, बैंड आदि की हुई एडवांस बुकिंग रद्द होनी शुरू हो गई। इनमें बैंड की तो 90 फीसदी बुकिंग निरस्त हो गई। डीजे वालों की भी 80 फीसदी निरस्त हो गई।
पिछले साल वाले हाल, पटरी पर आते ही मार
पिछला पूरा साल शादियों से जुड़े कारोबारियों का चौपट हो गया। बैंड, घोड़ी, लाइटिंग, सजावट जैसी सर्विस देने वाले ठाले बैठे थे। दिसम्बर में कोरोना नियंत्रण के साथ इनका काम चलना शुरू हुआ। शादियों का सीजन शुरू होते ही फरवरी से मई के बीच खूब बुकिंग मिलने की उम्मीद थी। इसी बीच मार्च में कोरोना की दूसरी लहर के आक्रमण के साथ ही सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। अब फिर से पिछले वर्ष जैसे हालात हो गए।
आधे रह गए मजदूर
बैंड संचालक निजाम व नाजिश ने बताया कि बूंदी शहर में अब 14 बैंड संचालक रह गए। पहले यह संख्या अधिक थी, लेकिन जैसे-जैसे पिछले कुछ वर्षों में डीजे का चलन बढ़ा, बैंड की टीम कम होती चली गई। अब महज एक दर्जन बैंड संचालक ही रहने से शादियों के सीजन में अच्छा काम रहने लगा था, लेकिन कोरोना वायरस ने इन पर भी रोक लगा दी। अप्रेल माह में 35 बुकिंग मिली थी, जिसमें से कोरोना के चलते 26 रद्द हो गई। अब मजदूर भी आधे रह गए।
डीजे का चलन बढ़ा, आधी रह गई कमाई
एक शादी में धोक कराने के लिए बैंड पार्टियां पहले 25 से 30 हजार रुपये लेती थी, लेकिन अब कोरोना के चलते 11 हजार से 15 हजार रुपये रह गए। एक रात में दो से तीन बारातों का धोक हो जाया करता था जो सारी रद्द हो गए। डीजे वालों ने कई आयोजनों की दरें आधी करा दी। बैंड संचालकों की माने तो वह आर्थिक बोझ तले दब गए।
फूलों के कारोबार पर ग्रहण
फूलों का कारोबार भी शादियों के साथ ही अच्छा चलता था, लेकिन कोरोना ने पूरे साल की कमाई पर पानी फैर दिया। पिछले वर्ष भी शादियों के सीजन में यही हाल बने, अब फिर से शादियां निरस्त होनी शुरू हो गई। जो हो रही उनमें भी फूल-मालाओं का उपयोग नहीं हो रहा।

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