अब व्यर्थ नहीं जाएगा बायीं मुख्य नहर की मोरी के गेटों से पानी

बूंदी जिले के सबसे बड़े गुढ़ा बांध के बायीं मुख्य नहर की मोरी से कई वर्षों से व्यर्थ बहने वाला पानी अब बेकार नहीं जाएगा। गत दिनों जल संसाधन विभाग द्वारा नए गेट लगाकर मुख्य गेट की मरम्मत करवा दी गई है।

By: pankaj joshi

Published: 12 Jul 2021, 08:13 PM IST

अब व्यर्थ नहीं जाएगा बायीं मुख्य नहर की मोरी के गेटों से पानी
जल संसाधन विभाग द्वारा लगाए नए गेट
चार दशक बाद हुआ कार्य
हिण्डोली. बूंदी जिले के सबसे बड़े गुढ़ा बांध के बायीं मुख्य नहर की मोरी से कई वर्षों से व्यर्थ बहने वाला पानी अब बेकार नहीं जाएगा। गत दिनों जल संसाधन विभाग द्वारा नए गेट लगाकर मुख्य गेट की मरम्मत करवा दी गई है। जानकारी के अनुसार गुढ़ा बांध निर्माण के बाद यहां पर दायीं और बायीं मुख्य नहर पर लोहे के गेट लगे थे। जिनसे रबी की फसल के दौरान सिंचाई के लिए नहरों में पानी छोड़ा जाता है, लेकिन गेट काफी पुरानी होने व लगातार खोलने बंद होने से गेट टेढ़े मेढे हो गए। ऐसे में उनमें पानी का रिसाव होने लगा था। कई बार पानी अधिक बहने से व्यर्थ ही जाता था।
जल संसाधन विभाग द्वारा कुछ समय पहले दायीं मुख्य नहर के गेटों की मरम्मत करवाकर उसे तो सही करवा दिया था, लेकिन बजट के अभाव में बायीं मुख्य नहर के गेट सही नहीं हो पाए। ऐसे में गत दो-तीन दशक से गेटों से पानी का रिसाव लगातार होता रहता था।
फरवरी माह में सिंचाई का पानी बंद करने के बाद भी गेट से पानी के रिसाव से विभाग के अधिकारी भी चिंतित रहते थे। कई बार तो मिट्टी के कट्टे डालने पड़ते थे। इस मामले को राजस्थान पत्रिका द्वारा कई बार उठाया। जिस पर जल संसाधन विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार कर बांध में पानी कम रहने पर बायीं मुख्य नहर के गेटों की मरम्मत करवा कर दोनों गेट नए लगा दिए हैं। अब बांध के गेट से व्यर्थ बहने वाले पानी पर भी रोक लग जाएगी।
जल संसाधन विभाग के सूत्रों की माने तो गेट का कार्य करीब चार दशक बाद पहली बार हुआ है। इसके प्रस्ताव काफी समय पहले लिए गए थे, लेकिन बजट के अभाव में परेशानी आ रही थी।
यह भी हुए कार्य
कनिष्ठ अभियंता बीएल मीणा के अनुसार बांध की बायीं मुख्य नहर के गेट पर गुनाइट करवाई, इसके अलावा यहां लगा गेज की रिपेयर कर नई लिखावट करवाई, साथ में सीढिय़ां व ऊपरी भाग पर सीसी करवाया गया।
नया गेट लगाया
बांध भरने के बाद बायीं मुख्य नहर के गेट से पानी का रिसाव होता था। कई बार गेटों को पूरी तरह बंद करने के बाद भी रिसाव जारी रहने से परेशानी आती थी। अब गेटों को नया लगा दिया है एवं दीवारों की मरम्मत करवा दी गई है। ऐसे में बांध का पानी व्यर्थ नहीं होगा।
जम्बू जैन, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग हिण्डोली।

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