जिला अस्पताल में मर्ज पर अव्यवस्थाओं का ताला

जिला अस्पताल के नि:शुल्क दवा वितरण केंद्रों पर अव्यवस्थाएं देखने को मिल रही है।

By: Nagesh Sharma

Published: 13 May 2018, 01:05 PM IST

बूंदी. जिला अस्पताल के नि:शुल्क दवा वितरण केंद्रों पर अव्यवस्थाएं देखने को मिल रही है। यहां पर हो रही मनमर्जी से आम रोगियों को दवा के लिए धक्के खाने की नौबत आ रही है। सप्ताह के अंतिम दिन शनिवार को आउटडोर समय में दो दवा वितरण केंद्रों पर ताले लटके मिले। इनमें दवा वितरण केंद्र नम्बर दो व वरिष्ठ नागरिक दवा वितरण केंद्र बंद था। अस्पताल प्रशासन ने दोनों महत्वपूर्ण दवा वितरण केंद्रों को खुलवाने की कोई व्यवस्था नहीं की। यहां रोगियों की परेशानी को ध्यान नहीं रखा गया।सुबह के समय अस्पताल में पहुंचे रोगी बंद दवा केंद्रों के बाहर खड़े रहे, वे दवा मिलने का इंतजार करते नजर आए।
वरिष्ठ नागरिकों को भी केंद्र बंद होने से दवा के लिए लाइनों में धक्के खाने पड़े। प्राप्त जानकारी के अनुसार अस्पताल में रोगियों की इस पीड़ा पर कोई भी ध्यान देने वाला नहीं दिखा। कई रोगी बिना दवा के लौट गए, उन्हें बाजार से दवा खरीदनी पड़ी।

महत्वपूर्ण दो नम्बर काउंटर, फिर भी...
सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल में दवा वितरण केंद्र नम्बर एक व दो सबसे महत्वपूर्ण हैं। शनिवार को अस्पताल प्रशासन ने एक नम्बर तो खोल दिया, लेकिन दो नम्बर केंद्र को नहीं खुलवाया। जबकि दो नम्बर केंद्र आउटडोर में चिकित्सक परामर्श कक्ष से नजदीक है, यहां पर काफी मात्रा में रोगी दवा लेने पहुंचते हैं। इसके बावजूद इस केंद्र को खोलने के बजाए अस्पताल के अंतिम छोर पर स्थित दवा वितरण केंद्र नम्बर तीन को खोला गया। जहां तक रोगी बहुत कम पहुंचते हैं। तीन नंबर केंद्र रोगी को आसानी से नहीं मिलता। ये केंद्र अस्पताल के दूसरे प्रवेश द्वार के यहां पर स्थित है। जहां पर रोगी को लोगों से पूछते हुए जाना पड़ता है।

पंद्रह मिनट देरी से खोला
नि:शुल्क दवा वितरण केंद्र तीन नम्बर शनिवार को देरी से खोला गया। सुबह 8 बजकर 15 मिनट के बाद ही दवा वितरण केंद्र खोला गया। यहां पर केंद्र को खोलने के लिए समय की भी कोई पाबंदी नहीं है। ऐसे में अस्पताल में समय पर आने जाने को लेकर प्रशासन भी ढिलाई बरत रहा है।

जिम्मेदार बरत रहे लापरवाही
उल्लेखनीय है कि दवा वितरण केंद्रों की व्यवस्था नर्सिंग अधीक्षक के जिम्मे होती है, लेकिन वे इस व्यवस्था को संभालने में कथित अनदेखी बरत रहे हैं। जिससे आम रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पीएमओ की जिम्मेदारी होती है कि वे अव्यवस्थाओं को सुधारे, लेकिन जिला अस्पताल में स्थायी पीएमओ नहीं होने से व्यवस्थाएं दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है।

रोगी को आसानी से दवा मिलनी चाहिए, तीन नम्बर की जगह दो नम्बर खोलना चाहिए था। दवा वितरण केंद्र के कम्प्यूटर ऑपरेटर परीक्षा देने गए हैं, इस कारण भी समस्या आने की बात सामने आई है। फिर भी जो भी कारण हैं उनका पता लगाया जाएगा। ताकि दुबारा अव्यवस्था नहीं हो।
डॉ.टी.सी. महावर, कार्यवाहक पीएमओ जिला अस्पताल, बूंदी

 

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Nagesh Sharma Bureau Incharge
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