scriptCondition of dams in bundi | बूंदी : बांधों के लिए सरकार ने बांधे हाथ, मरम्मत के लिए नहीं मिल रहा बजट | Patrika News

बूंदी : बांधों के लिए सरकार ने बांधे हाथ, मरम्मत के लिए नहीं मिल रहा बजट

बांधों की मरम्मत नहीं होने से बढ़ रही चिंता

बूंदी

Published: October 23, 2021 03:25:48 pm

बूंदी. इस बार मानसून की मेहरबानी रही और बांध भर गए। लेकिन अब अधिकतर बांधों से पानी रिस रहा है। ऐसे में इन बांधों के आस-पास बसे लोगों को इनकी चिंता सताने लग गई है। कुछ बांध तो जल संसाधन विभाग के अधीन होने से कभी-कभार संभाल लेने अभियंता पहुंच जाते हैं, लेकिन ग्राम पंचायतों के अधीन बांध तो अब भगवान भरोसे हो गए। सरकार इन बांधों की सुरक्षा के लिए बजट जारी करने में हाथ खेंचने लगी है। इनकी सुरक्षा नरेगा कार्यों के भरोसे हैं। जिले के चांदा का तालाब बांध की बात करें तो बांध रिसाव के चलते अभी से खाली हो रहा है।
बूंदी : बांधों के लिए सरकार ने बांधे हाथ, मरम्मत के लिए नहीं मिल रहा बजट
बूंदी : बांधों के लिए सरकार ने बांधे हाथ, मरम्मत के लिए नहीं मिल रहा बजट
संभाल तो लिए मरम्मत किससे करें
हिण्डोली की रामसागर झील, गोकुलपुरा बांध, बूंदी के निकट शंभूसागर, फूलसागर, रूण का खाळ, बासनी, रंगपुर, विजयगढ़़ सहित कई छोटे-बड़े बांध राज्य सरकार ने वर्ष 2003 में पंचायतीराज संस्थाओं को मजबूत करने के लिए जलसंसाधन विभाग से ग्राम पंचायतों को सौंप दिए। अब इनकी मरम्मत सिर्फ नरेगा के भरोसे हो रही है। इन बांधों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस योजना नहीं बन पा रही है। पिछले कुछ वर्षों में जायका योजना के तहत हुए मरम्मत कार्यों को छोड़ दें तो ज्यादातर बांध आज भी अच्छे हाल में नहीं हैं। जबकि इनसे सिंचाई होती है।

कब कौनसा बांध क्षतिग्रस्त हुआ
1958 - भीमलत बांध क्षतिग्रस्त हुआ। गुढ़ानाथावतान तक के कई गांवों में पानी भर गया था।
1995 - बरधा बांध की सुरक्षा दीवार तेज बरसात से क्षतिग्रस्त हो टूट गई। जल संसाधन विभाग की ओर से करीब 100 फीट लम्बी व 10 फीट ऊंची दीवार की मरम्मत करवाई गई।
2001 - नैनवां क्षेत्र का माछली बांध निर्माण के पहले साल ही टूट गया था। 1 जुलाई 2001 को बांध तीन स्थानों से टूटा था।
2003 - हिण्डोली क्षेत्र के गुढा बांध की पाल क्षतिग्रस्त हुई। जिसे समय रहते दुरुस्त कर दिया गया।
2007 - अभयपुरा बांध की कच्ची दीवार में रिसाव हो गया था। मरम्मत पर 85 लाख रुपए खर्च हुए।
2007 - देई ग्राम पंचायत के बांक्या बांध की पाल क्षतिग्रस्त हो गई थी। जिसे मिट्टी के कट्टों से भरवाकर बांध को बचाया।
2010 - 15 अगस्त को गरड़दा बांध की सौ फीट ऊंची और 350 फीट चौड़ी दीवार पानी के साथ बह गई थी।
2014 - 11 अगस्त को अभयपुरा बांध की दीवार में सुराख हो गया था। इससे क्षेत्र में जल पलावन हो गया। मेघारावत की झोपडिय़ा गांव खाली कराना पड़ा।

एक नजर में जिले के बांध
बांध क्षमता निर्माण
जैतसागर 17.25 स्टेट टाइम
इंद्राणी 18.00 1984
गुढ़ा 34.50 1958
बरधा 21.03 स्टेट टाइम
पाईबालापुरा 25.00 1957
गोठड़ा 24.59 1957
रोणीजा 24.00 1965
पेचकी बावड़ी 18.00 1958
दुगारी 09.00 स्टेट टाइम
माछली 13.00 2008
मोतीपुरा 17.00 1965
चांदाका तालाब 24.60 1997
मेंडी 10.50 1998
नारायणपुरा 29.84 1996
बटावदी 10.00 1968
मरडिया 18.04 1995
बंसोली 09.00 1972
डाबी 19.70 1982
देईगंगासागर 08.00 1976
रूण का खाळ 16.40 1982
खोड़ी 15.20 1983
अन्नपूर्णा 22.00 1999
(जलस्तर फीट में।)

गुरूजनिया व बांक्या बांध की नहीं हुई मरम्मत
बसोली ग्राम पंचायत के ओवण स्थित गुरूजनिया बांध में गत पांच वर्ष से पाल की मरम्मत की दरकार है। वर्ष 2001 में राज्य सरकार ने 40 लाख की लागत से सिंचाई के लिए बांध का निर्माण करवाया था। अब पाल कमजोर होने लगी है। पाल पर अंग्रेजी बबूलों की भरमार हो गई। केकड़ों ने पाल के अन्दर छेंद कर दिए। यही हाल बांक्या बांध के हैं।

किस बांध से कितने क्षेत्र की सिंचाई
बरधा बांध से 3800, अभयपुरा से 1440, भीमलत बांध से 1458, गुढ़ा से 11380, गोठड़ा से 5560, दुगारी से 2251, चांदा का तालाब से 484, बांक्या खाळ से 377.86, मेंडी से 579, मरडिया से 792, नारायणपुरा से 352.50, पेच की बावड़ी से 1037, रोणिजा से 1200, इंद्राणी से 832, बंसोली से 1012.10, बटावदी से 527.43, माछली से 796, मोतीपुरा से 477.43 एवं पाइबालापुरा बांध से 1899 हैक्टेयर में सिंचाई होती है।

गरड़दा अब तक नहीं बना
डेढ़ अरब की लागत से बूंदी तहसील के होलासपुरा गांव में मेज नदी की सहायक नदी मांगली, डूंगरी व गणेशीनाला पर बना गरड़दा बांध 15 अगस्त 2010 को टूटा था। बांध का करीब 100 फीट ऊंचा एवं 350 फीट चौड़ा हिस्सा पानी टूटा हुआ है। बांध अभी तक ठीक नहीं हुआ।
अन्नपूर्णा, खोड़ी बांध
जजावर क्षेत्र में खोडी बांध में हर वर्ष रिसाव की परेशानी आती है। इसकी मरम्मत की दरकार है। अन्नपूर्णा बांध की नहर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। इसकी मरम्मत के लिए ग्राम पंचायत को बजट नहीं मिलता।
बूंदी के ठीक ऊपर बना शंभू सागर, दीवारों से रिसाव
बूंदी के जैतसागर झील के ऊपर शंभू सागर बांध है जो ग्राम पंचायत के अधीन है। इसकी दीवारों से पानी का रिसाव हो रहा है। बांध की पाल कई जगहों से खोखली हो चुकी है। इससे बांध को खतरा बना रहने लगा है।

सरकार सालाना बजट देती है। जिन बांधों को मरम्मत की अधिक आवश्यकता है, उनके प्रस्ताव बनाकर भेजे हुए हैं। नरेगा से भी समय-समय पर काम कराते हैं। बरसात में बांधों पर पूरी निगरानी रखते हैं। ग्राम पंचायतों के अधीन के बांधों का ग्राम पंचायत प्रशासन ध्यान रखती है।
आर.के. पाटनी, अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग, बूंदी

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

बड़ी खबरें

रेलवे का बड़ा फैसला: NTPC और लेवल-1 परीक्षा पर रोक, रिजल्‍ट पर पुर्नविचार के लिए कमेटी गठितRepublic Day 2022 LIVE updates: राजपथ पर पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राष्ट्रगान और 21 तोपों की सलामी के साथ परेड शुरूRepublic Day 2022: गणतंत्र दिवस पर दिल्ली की किलेबंदी, जमीन से आसमान तक करीब 50 हजार सुरक्षाबल मुस्तैदRepulic Day 2022: जानिए क्या है इस बार गणतंत्र दिवस की थीमBudget 2022: कोरोना काल में दूसरी बार बजट पेश करेंगी निर्मला सीतारमण, जानिए तारीख और समयLucknow Super Giants : यूपी की पहली आईपीएल टीम का नाम है लखनऊ सुपर जाइंट्सअप्राकृतिक संबंध बनाने से इंकार करने पर मासूम की हत्या, 20 साल के दरिंदे ने मुरुम में दबा दिया था शवRepublic Day 2022: गणतंत्र दिवस पर इस बार परंपराओं में बदलाव, जानिए परेड में आपको पहली बार कौन सी चीजें दिखेंगी
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.