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Rajasthan के Bundi से होकर निकल रहा एक्सप्रेस-वे, यहां बन रहा देश में अनूठा, पढ़ें खास बातें

98 हजार करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा 1 हजार 380 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे

बूंदी

Published: October 23, 2021 05:30:34 pm

बूंदी. बूंदी जिले के लाखेरी के बिशनपुरा से निकल रहे दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस-वे (डीएमई) के निर्माण की गति बढ़ गई। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात राज्यों से गुजरने वाला 98 हजार करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा 1 हजार 380 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा।
Rajasthan के Bundi से होकर निकल रहा एक्सप्रेस-वे, यहां बन रहा देश में अनूठा, पढ़ें खास बातें
Rajasthan के Bundi से होकर निकल रहा एक्सप्रेस-वे, यहां बन रहा देश में अनूठा, पढ़ें खास बातें
यह अपनी तरह का विशिष्ट राजमार्ग होगा जिसमें पारिस्थितिकी और पर्यावरण संरक्षण के साथ ही विकास की संकल्पना की गई। यह राष्ट्रीय राजधानी, दिल्ली और वित्तीय राजधानी मुम्बई के बीच सम्पर्क (कनेक्टिविटी) को बढ़ाएगा और दूरियों को पाटेगा। यह एक्सप्रेस-वे एशिया में पहला और दुनिया में दूसरा होगा जिसमें वन्यजीवों की अप्रतिबंधित आवाजाही की सुविधा के लिए पशु हवाई पुल (ओवरपास) की सुविधा होगी। डीएमई में 3 वन्यजीव और 5 हवाई पुल (ओवरपास) होंगे जिनकी संयुक्त लम्बाई 7 किमी होगी और यह वन्यजीवों के निर्बाध आवागमन के लिए समर्पित होंगे।

यह एक्सप्रेस-वे क्षेत्र के शहरी केंद्रों को दिल्ली-फरीदाबाद-सोहना खंड के गलियारे (कॉरिडोर) के साथ-साथ जेवर एयरपोर्ट और मुम्बई में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट को एक छोटे संपर्क मार्ग (स्पर) के जरिए जोड़ेगा। इसके अलावा, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के छह राज्यों से गुजरने वाला यह एक्सप्रेस-वे जयपुर, किशनगढ़, अजमेर, कोटा, चित्तौडगढ़़, उदयपुर, भोपाल, उज्जैन, इंदौर, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत जैसे आर्थिक केंद्रों से कनेक्टिविटी में सुधार लाने के साथ ही लाखों लोगों के लिए आर्थिक समृद्धि लेकर आएगा।
एक्सप्रेस-वे की शुरुआत 2018 में 9 मार्च 2019 को आधारशिला रखने के साथ हुई थी। 1 हजार 380 किलोमीटर में से 1 हजार 200 किलोमीटर से अधिक के लिए पहले ही ठेके दिए जा चुके और कार्य भी शुरू हो गए।
16 हजार 600 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले इस पूरे एक्सप्रेस-वे का 374 किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरेगा।
374 किलोमीटर के ठेके पहले ही दिए जा चुके। राज्य की बढ़ती आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए यह कॉरिडोर अलवर, भरतपुर, दौसा, सवाईमाधोपुर, टोंक, बूंदी और कोटा जिलों से होकर गुजरेगा। इसके अलावा, दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेस-वे को पूरा करने और दिल्ली व जयपुर के बीच आवागमन समय को 4 घंटे से घटाकर 2 घंटे से कम करने के लिए बुंदीकुई से जयपुर के लिए एक अतिरिक्त सम्पर्क मार्ग (स्पर) की योजना प्रस्तावित है।
निर्बाध होकर गुजरेंगे वन्यजीव
एक्सप्रेस-वे रणथंभौर टाइगर रिजर्व और चंबल अभयारण्य से होकर गुजरेगा। पारिस्थितिकी तंत्र पर न्यूनतम प्रभाव पड़े इसके लिए कई कदम उठाए गए। एक्सप्रेस-वे एशिया में पहला और दुनिया में दूसरा होने का दावा करते हुए बताया कि वन्यजीवों की अप्रतिबंधित आवाजाही की सुविधा के लिए पशु हवाई पुल (ओवरपास) की सुविधा होगी। डीएमई में 3 वन्यजीव और 5 हवाई पुल (ओवरपास) होंगे जिनकी संयुक्त लंबाई 7 किमी होगी जो वन्यजीवों के निर्बाध आवागमन के लिए समर्पित होंगे। इस एक्सप्रेस-वे में भारत की पहली प्रतिष्ठित 8 लेन 4 किमी सुरंग भी शामिल होगी जो इस क्षेत्र में लुप्तप्राय जीवों को परेशान किए बिना मुकुंदरा अभयारण्य से होकर गुजरेगी। इसके अलावा, राज्य की नदियों पर बाणगंगा नदी, बनास नदी, मेज नदी और चंबल नदी जैसे कई पुल बनेंगे।
बांध पर बनेगा एलिवेटेड स्ट्रेच
बूंदी जिले के चाकन बांध के पार एक प्रतिष्ठित 11 सौ मीटर लंबे ऊंचाई के खंड (एलिवेटेड स्ट्रेच) की योजना बनाई गई है, जो एक इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण होगा। राजस्थान राज्य में सभी पैकेज दिल्ली-जयपुर (दौसा)-लालसोट खंड के साथ 214 किलोमीटर के मार्च 2022 तक पूरा करने और यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य है। लालसोट से कोटा तक के शेष खंड को लक्षित किया है जिसे मार्च 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।
ऐसे खास है यह एक्सप्रेस-वे
नए एक्सप्रेस-वे से दिल्ली और मुंबई के बीच आवागमन के समय को लगभग 24 घंटे से घटाकर 12 घंटे करने और दूरी में 130 किलोमीटर की कमी होने की उम्मीद है। इससे 32 करोड़ लीटर से अधिक के वार्षिक ईंधन की बचत होगी और कार्बनडाई ऑक्साइड उत्सर्जन में 85 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी जो कि 4 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की प्रतिबद्धता के तहत राजमार्ग के किनारे 40 लाख से अधिक पेड़ और झाडिय़ां लगाने की योजना है। एक्सप्रेस-वे में दो प्रतिष्ठित 8 लेन सुरंगें भी शामिल होंगी जो देश के इंजीनियरिंग कौशल का एक उत्कृष्ट प्रदर्शन होगा, इसमें से पहली मुकुंदरा अभयारण्य के माध्यम से 4 किलोमीटर के क्षेत्र में लुप्तप्राय जीवों को संकट में डाले बिना और दूसरी माथेरान पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (इको सेंसिटिव जोन) में 4 किमी 8 लेन-सुरंग से गुजरेगी। यह अनूठी परियोजना बेहतरीन अभियान्त्रिकी (इंजीनियरिंग) का ही उदाहरण है।
कनेक्टिविटी बढ़ाने और लोगों को निकालने के लिए हेलीपैड भी होंगे
एक्सप्रेस-वे का एक अन्य अनूठा पहलू गलियारे के साथ उपयोगकर्ताओं की सुविधा और सुरक्षा में सुधार के लिए राजमार्ग के साथ बनाई गई 94 सुविधाओं (वे साइड अमेनिटीज -डब्ल्यूएसए) की स्थापना है। रास्ते के किनारे की सुविधाओं में पेट्रोल पंप, मोटल, विश्राम क्षेत्र, रेस्तरां और दुकानें होंगी। इन वे साइड सुविधाओं में चिकित्सा आपात स्थिति के मामले में कनेक्टिविटी बढ़ाने और लोगों को निकालने के लिए हेलीपैड भी होंगे।

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