जिला पशु क्रूरता निवारण समिति पर मंडराया संकट, प्रशासन के आदेश ने पैदा कर दी भ्रांति

सरकार के निर्देश पर गठित जिला पशु क्रूरता निवारण समिति पर संकट के बादल मंडरा गए।

By: Nagesh Sharma

Published: 23 Apr 2018, 01:24 PM IST

बूंदी. सरकार के निर्देश पर गठित जिला पशु क्रूरता निवारण समिति पर संकट के बादल मंडरा गए। जिला प्रशासन ने बीते चार वर्षों से रजिस्टर्ड समिति के पदाधिकारियों की राय जाने बिना एक ओर नई समिति का गठन कर भ्रम पैदा कर दिया। जबकि पूर्व की समिति को ना तो भंग किया गया और ना ही किसी भी प्रकार की कोई शिकायत पायी गई। ऐसे में अब पूर्व की समिति के पदाधिकारियों के सामने भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। वहीं पशु कल्याण के लिए समिति की ओर से किए जा रहे समस्त कार्य ठप हो गए। इन हालातों में अब समिति के सभी पदाधिकारी व कार्यकारिणी सदस्य एकजुट हो गए। वे प्रशासन के इस आदेश के खिलाफ सरकार के स्तर पर लड़ाई लडऩे की तैयार में जुट गए हैं।

कब और कैसे हुआ गठन
सूत्रों के अनुसार उच्च न्यायालय के आदेश पर 5 मार्च 2014 को रजिस्टर्ड तरीके से जिला पशु क्रूरता निवारण समिति का गठन हुआ। जिसकी अध्यक्ष तत्कालीन जिला कलक्टर आनंदी, उपाध्यक्ष तत्कालीन पुलिस अधीक्षक पंकज चौधरी, तत्कालीन पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ.रामानंद रावत को मंत्री, पुरुषोत्तम लाल पारीक को कोषाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता मदन लाल जैन को कानूनी सलाहकार बनाया था। इसके अलावा नगर परिषद सभापति महावीर मोदी, भगवान लाडला, हुकुमचंद सोनी व अजय नुवाल सहित कुल 160 सदस्य बनाए गए थे। समिति में शहरभर की प्रमुख महिलाएं, अधिवक्ता, अल्पसंख्क, किन्नर, समाज सेवी सहित हर तबके के लोगों को शामिल किया गया था। 3 दिसम्बर 2015 को पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक ने तत्कालीन जिला कलक्टर को उक्त समिति के गठन व क्रियाशीलता की सूचना दी थी। समिति की ओर से 15 जून 2016 को पशु सेवा व गो सेवा के लिए भूमि आवंटन की मांग की गई। 27 जुलाई 2016 को पशु पालन निदेशालय जयपुर ने भी बूंदी से समिति के गठन को लेकर जानकारी मांगी थी।

कानूनी राय के बाद भी नहीं चेत रहे
गत 7 दिसम्बर 2017 को जिला कलक्टर की अध्यक्षता में बैठक हुई। जिसमें समिति के सदस्य भगवान लाडला, हुकुमचंद सोनी, डॉ.पूर्णिमा दीक्षित, पुरुषोत्तम लाल पारीक ने 21 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन जिला कलक्टर की ओर से जारी किए गए आदेश को लेकर पैदा हो रही भ्रांति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उक्त आदेश में एक ओर जिला पशु क्रूरता निवारण समिति के गठन का आदेश निकाला है। जिसमें 11 सदस्य बनाए गए हैं। इस आदेश की प्रति को रजिस्ट्रार ने संस्था की पत्रावली में शामिल कर लिया है। ऐसे में यह समझ नहीं आ रहा कि उक्त समिति किन नियमों के तहत बनाई गई। उन्होंने प्रशासन से उक्त मामले में स्पष्टीकरण व कानूनी राय लेने की मांग की। समिति के कानूनी सलाहकार वरिष्ठ अधिवक्ता मदन लाल जैन ने कहा कि पूर्व में रजिस्टर्ड समिति का गठन कर लिया गया। विधिवत विधान बनाकर उसे रजिस्टर्ड करा लिया। इसके बाद नई समिति का गठन करना या उसका फिर से रजिस्ट्रेशन कराना उचित नहीं।

मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत
भाजपा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व जिला पशु क्रूरता निवारण समिति सदस्य भगवान लाडला व सदस्य एडवोकेट अजय नुवाल ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी है। जिसमें उन्होंने कहा कि समिति के सदस्यों की राय जाने बिना एक तदर्थ समिति का गठन किया है। जो पूर्व में गठित समिति पर अतिक्रमण व अनुचित है।

जिला पशु क्रूरता निवारण समिति शहर की आम जनता ने बनाई थी, लेकिन अचानक से प्रशासन ने एक ओर समिति के गठन का आदेश जारी कर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी। इससे संस्था के पशु सेवा के मूल काम में रुकावट पैदा हो गई। नियमानुसार दूसरी संस्था नहीं बनाई जा सकती। फिर भी उसे लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। जिसे समिति के लोग कतई सहन नहीं करेंगे।
पुरुषोत्तम लाल पारीक, समिति कोषाध्यक्ष

प्रकरण अब सामने आया है, इसकी जांच करवा लेंगे।
ममता तिवारी, अतिरिक्त जिला कलक्टर सीलिंग, बूंदी

 

Nagesh Sharma Bureau Incharge
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