स्वयंपाठी बनकर पूरा कर रहे उच्च शिक्षा का सपना

स्वयंपाठी बनकर पूरा कर रहे उच्च शिक्षा का सपना

DEVENDRA DEVERA | Updated: 22 May 2018, 03:38:40 PM (IST) Bundi, Rajasthan, India

12 वीं कक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की फिर भी उच्च शिक्षा के लिए स्वयंपाठी छात्र बनना पड़ रहा है।

नैनवां. 12 वीं कक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की फिर भी उच्च शिक्षा के लिए स्वयंपाठी छात्र बनना पड़ रहा है। सरकारी कॉलेज के अभाव ने कई प्रतिभाओं को उच्च शिक्षा का सपना पूरा करने के लिए स्वयंपाठी छात्र के रूप में अगले पायदान पर चढऩा पड़ रहा है। कॉलेज सरकारी होता तो ऐसी प्रतिभाओं को भी कॉलेज में नियमित पढ़ाई का मौका मिलता।

चेनपुरिया गांव निवासी हेमंत शर्मा ने 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी में पास की। अब सरकारी कॉलेज के अभाव में स्वयंपाठी छात्र बनकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। हेमंत ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नही व स्ववित्तपोषी महाविद्यालय में फीस अधिक होने से प्रथम वर्ष में प्रवेश नही ले पाया। आगे पढऩे की चाहत होने से स्वयंपाठी के रूप में बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा दी है। कॉलेज सरकारी होता तो कम फीस में प्रवेश मिल जाता।

दुगारी गांव निवासी तरूण शर्मा को भी स्वयंपाठी बनकर बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा दे रहा है। तरूण का कहना है कि 12 वीं कक्षा तो प्रथम श्रेणी में पास कर ली, लेकिन नैनवां के स्ववित्तपोषी महाविद्यालय में फीस अधिक होने से कॉलेज में प्रवेश नही ले पाया। उच्च शिक्षा प्राप्त करने की चाहत होने से स्वयंपाठी के रूप में परीक्षा देनी पड़ी है। कॉलेज सरकारी होता तो कम फीस में निमित छात्र के रूप में पढ़ाई करने का मौका मिल जाता।

नैनवां निवासी विक्रम गुर्जर ने कहा कि 2010 में ही प्रथम श्रेणी में 12वीं कक्षा पास कर ली थी। स्ववित्तपोषी महाविद्यालय में फीस अधिक होने से कॉलेज में प्रवेश नहीं ले पाने से पढ़ाई छोडऩी पड़ गई। स्ववित्तपोषी कॉलेज की जगह सरकारी कॉलेज की सुविधा मिल जाती तो उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहना पड़ता।

नैनवां निवासी पप्पूलाल सैनी को अपनी उच्च शिक्षा की चाहत को पूरा करने के लिए स्वयंपाठी छात्र के रूप में पढ़ाई करनी पड़ रही है। बीए द्वितीय वर्ष की परीक्षा स्वयंपाठी के रूप में ही दी है। पप्पूलाल का कहना है कि सरकारी कॉलेज नही होने व स्ववित्तपोषी महाविद्यालय में फीस अधिक होने से प्रवेश नहीं ले पाने से स्वयंपाठी छात्र के रूप में परीक्षा दे रहा है।

नैनवां निवासी तरूण जाटवा को भी सरकारी कॉलेज के अभाव में स्वयंपाठी छात्र के रूप में उच्च शिक्षा का सपना पूरा करना पड़ रहा है। तरूण ने इस वर्ष बीए तृतीय वर्ष की परीक्षा स्वयंपाठी छात्र के रूप में ही दी है। तरूण का कहना है कि सरकारी कॉलेज होता तो फीस कम लगती। कॉलेज स्ववित्तपोषी होने से फीस काफी ज्यादा होनेके कारण स्वयपाठी के रूप में परीक्षा देनी पड़ी है।

नैनवां निवासी दीपक चौपड़ा का कहना है कि सरकारी कॉलेज नहीं होने व स्ववित्तपोषी महाविद्यालय में फीस अधिक होने से उच्च शिक्षा के लिए प्रथम वर्ष में स्वयंपाठी छात्र बनना पड़ा है। फीस अधिक होने से उसकी तरह ही अन्य कई छात्रों को स्वयंपाठी के रूप में परीक्षा देनी पड़ रही है। कॉलेज सरकारी हो जाता तो नियमित छात्र के रूप में पढऩे का मौका मिल जाता।

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