अफसरों ने काटी सरकार की छुट्टी

चाइल्ड केयर लीव के लिए आवेदनों का ढ़ेर लगा

By: Suraksha Rajora

Published: 20 Jul 2018, 05:32 PM IST

बूंदी. महिला शिक्षकों की लंबी मांग चाइल्ड केयर लीव पर सरकार ने अमलीजामा पहनाकर भले महिला कर्मचारियों को खुश कर दिया हो लेकिन महिला शिक्षकों की यह लीव विभाग ओर जिम्मेदारी पर भारी पड़ती नजर आ रही है।

 

 

 

दरअसल शिक्षा सत्र की शुरूआत के साथ शैक्षणिक गतिविधियों को पूरा करते हुए विद्यालय के कई महत्पवूर्ण कार्यो का लेखा जोखा निदेशालय को जाने लगा है जिससे जिले में बेहतर रैकिंग मिल सके। जिले के अधिकतर सरकारी स्कूलों का जिम्मा महिला कर्मचारियों के ही भरोसे है, ऐसे में उनका चाइल्ड केयर लीव ओर, लेना विभाग के आला अधिकारियों को खल रहा है।

 

 

 

जिला ही नही प्रदेश भर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यलयों में महिला कार्मिको का चाइल्ड केयर लीव के लिए आवेदनों का ढ़ेर लगा हुआ है, लेकिन अब तक इन आवदेनों पर आला अधिकारियों के स्वीकृति की मुहर नही लग पाई है। जिले की अगर बात करें तो यहां संस्था प्रधान सहित व्याख्याता, शिक्षक के करीब आधा दर्जन से अधिक चाइल्ड केयर लीव के लिए आवदेन आए हुए है।

 

 

 

लेकिन अभी किसी को अवकाश की स्वीकृति नही मिली है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने बजट घोषणा मे महिला कार्मिको के लिए चाइल्ड केयर लीव का प्रावधान किया गया जिसमें राज्य मे कार्यरत सात लाख कर्मचारियों मे से पौने दो लाख महिला कार्मिको को ये तोफहा मिला था।

 

 

 

इसमे महिला कार्मिक को बच्चो की आयु 18 वर्ष होने तक देखभाल के लिए दो वर्ष की चाईल्ड केयर लीव का प्रावधान किया गया है। जिले में यह नियम 22 मई 2018 से लागू होने के साथ महिला कार्मिको में खुशी ही लहर दौड़ पड़ी और इसके लिए विभाग में आवेदन करना भी शुरू कर दिया लेकिन अब महिला कार्मिको ने जब चाईल्ड केयर लीव के लिए आवेदन किया तो उनके आरहण वितरण अधिकारी लीव देने मे आनाकानी कर रहे हैं।

 

 

 

 

शिक्षा विभाग मे महिला कार्मिक अधिक संख्या होने के कारण इस विभाग मे चाईल्ड केयर लीव को देने मे संस्था प्रधान कतरा रहें है। विधालय मे प्रवेशोत्सव और विधार्थियों की पढाई का हवाला दे कर लीव अप्रव्यू नही की जा रही है।


नियमों में जटिलता-


शिक्षकों का कहना है कि इस प्रकिया को इतना जटिल कर दिया की महिला शिक्षको से कई तरह के सर्टिफिकेट तथा स्टाम्प मांगे जा रहे हैं उसके बाद भी लीव स्वीकृत नहीं की जा रही। वहीं सरकार की ओर से इस योजना में एक पेंच यह भी आ रहा है कि बच्चें के लिए मिलने वाली 360 दिनों के अवकाश में चाइल्ड केयर की 180 लीव को भी शामिल किया गया है।

 

 

 

 

राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम प्रदेश महिला मंत्री गणेश कंवर ने बताया कि प्रदेशभर से महिला शिक्षको की शिकायतें आ रही हैं ,उन्हे चाईल्ड केयर लीव नही मिल रही हैं जो कि मुख्यमंत्री की महिला कार्मिको प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए चाईल्ड केयर लीव लागू की है।

 

 

 

बूंदी जिले से भी कई महिला अधिकारी बाहर काम कर रही हैैै। लीव के बारे में भी अधिकारियों को स्पष्ट जानकारी नही है। जिसके अभाव में महिला कार्मिको को अवकाश देने में हिचकिचा रहें है। यह भी सामने आ रहा है कि कुछ महिला शिक्षक नियमों की पालना करते हुए लीव नही ले रही जो भी अवकाश में रूकावट पैदा कर रहा है।

 

 

यह आ रही समस्या-


चाइल्ड केयर लीव के नाम पर महिला कार्मिक एक साथ अवकाश ले रही है, ऐसे में सबसे ज्यादा सरकारी विद्यालय में परेशानी होगी। उनकी पढ़ाई बाधित होने के साथ व्यवस्था बेपटरी हो जाएगी। लीव लेने वालों में वो भी शामिल है जिनके बच्चें 18 साल की उम्र में आ गए। अधिकारियों का मानना है कि महिलाओं को सुविधा दी गई है लेकिन व्यवस्था न बिगड़े उसका भी ध्यान रखा जाए।



चाइल्ड केयर लिव देने के लिए निर्देश मिले है। इसके लिए आवेदन भी आए है। अब अवकाश देने के लिए पहले व्यवस्था देखनी होगी। प्रवेशोत्सव व विद्यालय में शिक्षा गतिविधियां शुरू हो चुकी है विद्यार्थियों को कोई पेरशानी न हो सभी को देखना होगा। स्कूल लेवल से 8 और कार्यालय से संस्था प्रधान का लीव आवेदन आया है।
जिला शिक्षा अधिकारी तेजकंवर

Suraksha Rajora
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