उड़ान के लिए नहीं मिल रहा उच्च शिक्षा का मैदान

गांवों में प्रतिभाओं की कमी नही है। आवश्यकता है तो उनको उच्च शिक्षा की सुविधा की। सरकारी कॉलेज ही प्रतिभाओं की उड़ान के लिए पंख लगा सकता है।

By: Devendra

Published: 16 May 2018, 03:45 PM IST

नैनवां. गांवों में प्रतिभाओं की कमी नही है। आवश्यकता है तो उनको उच्च शिक्षा की सुविधा की। सरकारी कॉलेज ही प्रतिभाओं की उड़ान के लिए पंख लगा सकता है। नैनवां में सरकारी कॉलेज नही होने से आर्थिक कमजोरी के चलते गांव के कई प्रतिभावान छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे है। संविधान में शिक्षा को मूल अधिकारी का दर्जा दिया है। सकारी कॉलेज नही होने से बेटे-बेटियों का शिक्षा का मूल अधिकार नही मिल पा रहा। पंचायतीराज के जनप्रतिनिधि बोले कि नैनवां क्षेत्र के पिछड़ेपन कारण ही उच्च शिक्षा का अभाव रहा है। गांवों के बेटे व बेटियां 12 पास करने के बाद ही घर बैठना पड़ जाता है।

नैनवां पंचायत समिति की प्रधान प्रसन्न बाई मीना का कहना है कि सकरात्मक सोच बनाकर सरकार नैनवां में सरकारी कॉलेज की स्थापना करे। नैनवां पंचायत समिति में 33 ग्राम पंचायतों में उच्च माध्यमिक विद्यालय है, लेकिन उसके बाद उच्च शिक्षा के लिए सरकारी कॉलेज नहीं होने से शिक्षा के क्षेत्र में बेटे-बेटियों की उड़ान आगे नहीं बढ़ पाती। जो बेटियां आगे पढऩा तो चाहती है, लेंकिन स्ववितपोषी महाविद्यालय में फीस अधिक होने व अभिभावक बेटियों को पढऩे के लिए बाहर भेजने को तैयार नहीं होते। नैनवां में कॉलेज की स्थापना के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सरकारी पर दबाव बनाने की आवश्यकता है।

बांसी ग्राम पंचायत के सरपंच ओमप्रकाश जैन का कहना है नैनवां का स्ववित्तपोषी महाविद्यालय ही इस क्षेत्र का एक मात्र महाविद्यालय है। क्षेत्र के गरीब प्रतिभावान छात्रों का भविष्य इस कॉलेज के सरकारी होने पर ही निर्भर करता है। कॉलेज सरकारी होने से गरीब प्रतिभावान विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा अवसर मिलेगा। बेटियों को भी उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। सरकार बेटे-बेटियों के हित में महाविद्यालय को शीघ्र सरकारी करे।

डोडी पंचायत के सरपंच शांतिलाल मीणा का कहना है कि स्ववित्तपोषी महाविद्यालय को सरकारी दर्जा प्रदान कर वापस स्ववित्तपोषी करने के बाद से ही फीस पांच से आठ गुना बढ़ जाने से विद्यार्थियों की संख्या कम हो गई। संविधान में शिक्षा को मूल अधिकारों में शामिल कर रखा है जबकि यहां के सरकारी किए कॉलेज को वापस स्ववित्तपोषी कर बेटे-बेटियों के शिक्षा के अधिकार को छीन लिया। सरकार को अपनी सोच बदलकर बेटे-बेटियों के हित में कॉलेज को सरकारी करे या कोई दूसरा सरकारी कॉलेज खोले। सरकारी कॉलेज खोलकर राजनीतिक लाभ प्राप्त कर सकती है।

मरां ग्राम पंचायत के सरपंच हंसराज गुर्जर का कहना है कि उच्च शिक्षा के मामले में पिछडऩे कारण ही सरकारी कॉलेज का नहीं होना है। सरकार नैनवां के स्ववित्तपोषी महाविद्यालय को वापस सरकारी दर्जा प्रदान कर छात्र हित में कदम उठाना चाहिए। जिले में मात्र बूंदी जिला मुख्यालय पर ही सरकारी कॉलेज है। सैकड़ों विद्यार्थी प्रतिवर्ष 12वीं पास करते है उसके बाद सरकारी कॉलेज नही होने से इनमें से आधे से ज्यादा विद्यार्थी घर बैठ जाते हैं। नैनवां में सरकारी कॉलेज की स्थापना करना विद्र्यााियों के हित में सरकार का परोपकारी कार्य होगा।

रजलावता ग्राम पंचायत की सरपंच रामघणी बैरवा का कहना है कि सरकारी कॉलेज नही होने से मेरी ही तरह कई अन्य बेटियां को भी उच्च शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है। सरकारी कॉलेज के अभाव में 12वी कक्षा पास करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश लेने की इच्छा होने के बाद भी घर बैठना पड़ता है। दलित परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने व स्ववित्तपोषी महाविद्यालय में फीस अधिक होने से अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश नहीं दिला पाते। कॉलेज सरकारी हो जाए तो फीस कम लगने से अपनी बेटियों को पढ़ा सके।

खानपुरा ग्राम पंचायत के सरपंच छोटूलाल बैरवा का कहना है कि सरकारी कॉलेज के अभाव में सभी वर्गो के निर्धन परिवारों के बेटे-बेटियों को उच्च शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है। हमारी ग्राम पंचायत में ही कई ऐसे छात्र-छात्राएं जिनको 12वीं पास करने बाद सरकारी कॉलेज के अभाव में आगे की पढाई छोडऩी पड़ी है। कॉलेज को सरकारी दर्जा प्रदान कर निर्धन तबके परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा का रास्ता खोल सकती है।

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