जिले का एक मात्र विधि कॉलेज वेटिंलेटर पर...

जिले का एक मात्र विधि कॉलेज वेटिंलेटर पर...

Suraksha Rajora | Publish: Sep, 07 2018 08:32:48 PM (IST) Bundi, Rajasthan, India

शिक्षा की बर्बादी...प्रदेश में विधि शिक्षा की जमकर धज्जियां उड़ रही हैं।

बूंदी. प्रदेश में विधि शिक्षा की जमकर धज्जियां उड़ रही हैं। अलबत्ता बूंदी लॉ कॉलेज के हाल भी बद से बद्तर है। कॉलेज के पास नैक की ग्रेडिंग नहीं है। ऐसे में पंजीकरण नही होने से नव सत्र में फिर से दाखिलों पर तलवार लटक गई है। बदहाल विधि शिक्षा को लेकर अदालतों, ना बीसीआई ना राज्य सरकार गंभीर नजर आ रही हैं।


महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से सम्बद्धता और बार कौंसिल ऑफ इंडिया की मंजूरी के बिना दाखिले मुश्किल हैं। सरकार ने जल्द फैसला नहीं किया तो कॉलेज की मुसीबतें बढ़ेंगी। लॉ कॉलेज को 13 साल से बार कौंसिल ऑफ इंडिया से स्थाई मान्यता नहीं मिली है।

 

कॉलेज को प्रतिवर्ष महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से सम्बद्धता लेनी पड़ती है। बाद सम्बद्धता पत्र और निरीक्षण रिपोर्ट बार कौंसिल को भेजी जाती है। कौंसिल की मंजूरी के बाद प्रथम वर्ष में प्रवेश होते हैं। इस बार भी कमोबेश हालात वैसे ही हैं।

 

नहीं कर सकते दाखिले-


बीसीआई को दी गई अंडर टेकिंग के अनुसार सरकार को लॉ कॉलेज में स्थाई प्राचार्य, पर्याप्त व्याख्याता और स्टाफ और संसाधन जुटाने हैं। शर्तें पूरी किए बगैर दाखिलों की मंजूरी नहीं मिलेगी। बूंदी लॉ कॉलेज में पिछले दो सालों से प्रथम वर्ष में कोई नामांकन ही नही है। न स्टॉफ। दिलचस्प बात यह है कि लॉ कॉलेज सबंधी जानकारी भी समय पर मुहैया नही हो पाती। एक मात्र यूडीसी के भरोसे लॉ कॉलेज संचालित है, जिनको लॉ के बारे में एबीसीडी तक नही आती।

 

विधि शिक्षा की फुलने लगी सांसे-

लॉ कॉलेज में विधि शिक्षकों की स्थिति भी ठीक नही। फैकल्टी के रूप में राजकीय महाविद्यालय से संचालित इस कॉलेज के हालात ओर बिगड़ गए। न कॉलेज के पास अपना खुद का भवन न स्टॉफ। कहने को चित्तोड़ रोड़ पर गल्र्स कॉलेज का निर्मित भवन विधि को आवंटित कर दिया गया लेकिन वहां हालात यह है कि भवन की दीवारे और छते ही देखने को मिलती है। फर्श असमाजिक तत्वों की भेंट चढ़ चुका। अब 20 लाख रूपए मिले तो इस भवन को सुधारा जा सकता है।


संसाधन व स्टाफ की दरकार-


मौजूदा वक्त लॉ कॉलेजों में महज एक यूजीसी नियुक्त है। न प्राचार्य न स्टॉफ ऐसे में जर्जर भवन तालो में ही बंद है। पीजी कॉलेज परिसर में संचालित नाम का विधि कॉलेज में दो कक्ष व एक ऑफिस है जो पूरी तरह जर्जर हो चुके है। दरवाजे व खिड़किया टूटी हुई है। तमाम सुविधाओं की कमी से जुझते इस कॉलेज में शौचालय तक नही है।

 

यूजीसी के नियमानुसार किसी भी विभाग में एक प्रोफेसर, दो रीडर और तीन लेक्चरर होने चाहिए। लॉ कॉलेज में प्राचार्य सहित व्याख्यताओ व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की कमी है। एक कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर लगा रखा है उसकी पगार कॉलेज से उठ रही है। कॉलेज में शारीरिक शिक्षक, खेल मैदान, सभागार, और अन्य सुविधाएं नहीं हैं।

 

तीन साल की सम्बद्धता पर पेच-


बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने सभी विश्वविद्यालयों को लॉ कॉलेज को तीन साल की एकमुश्त सम्बद्धता देने को कहा है। यह मामला विश्वविद्यालयों और सरकार के बीच अटका हुआ है। विश्वविद्यालय अपनी स्वायत्तता छोडऩे को तैयार नहीं है।

 

साल 2005 में स्थापित लॉ कॉलेज से प्रतिवर्ष महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय प्रतिवर्ष सम्बद्धता फीस वसूलता है। इसके बाद वह टीम भेजकर कॉलेज का निरीक्षण कराता है। निरीक्षण रिपोर्ट में शिक्षक, संसाधन, पुस्तकालय, कम्प्यूटर, खेल मैदान और अन्य सुविधाओं का ब्यौरा होता है। इसके आधार पर कॉलेज को पाठ्यक्रम संचालन और दाखिलों के लिए एक साल की अस्थाई सम्बद्धता देता हैं। बूंदी लॉ कॉलेज साढ़े तीन लाख रूपए शुल्क जमा करवा चुका है। इसके लिए दिल्ली में भी चक्कर काटने के बाद भी अब तक कोई टीम ही नही आई।

 

अटकी हुई नए शिक्षकों की भर्ती

 

लॉ कॉलेजों के लिए नए 86 विधि शिक्षकों की भर्ती राजस्थान लोक सेवा आयोग में अटकी हई है। आयोग इनकी लिखित परीक्षा करा चुका है। साक्षात्कार की तिथियां अब तक तय नहीं हुई है। इसका खामियाजा सभी लॉ कॉलेज को भुगतना पड़ रहा है। पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण ही बार कौंसिल ऑफ इंडिया से इन्हें स्थाई सम्बद्धता नहीं मिल पाई है।


इनका कहना-


भवन और शिक्षको के अभाव में विद्यार्थी कोई रूचि नही दिखाते। जानकारी के लिए वरिष्ठ वकीलों की सेवाएं लेनी पड़ती है।
अंकुर माथुर तृतीय वर्ष लॉ

इतना बजट नही कि बाहर पढ़ाई कर सके। शहर में लॉ कॉलेज नाममात्र का रह गया जो एक शर्मनाक बात है। भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। शिक्षक नही तो विद्यार्थी कैसे आएगें।
नईम हुसैन तृतीय वर्ष लॉ



बीसीआई से मान्यता मिल जाए तो लॉ कॉलेज के हालातो में सुधार हो सकता है। स्टॉफ की कमी से विद्यार्थी परेशान है। मान्यता को लेकर शुल्क जमा करवा चुके है लेकिन अब तक कोई टीम नही आई।
किशन खत्री यूडीसी लॉ कॉलेज

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