चम्बल घडिय़ाल में चोरी छुपे हो रहा अवैध बजरी खनन, घडिय़ाल प्रजनन हो रहा प्रभावित

जलीय जीव जंतुओं को भी पहुंच रहा नुकसान

By: Abhishek ojha

Published: 28 Dec 2020, 09:36 PM IST

कापरेन. राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य में इन दिनों फिर से अवैध बजरी खनन जोर पकड़ता जा रहा हैं। प्रशासन की मिलीभगत के चलते अभयारण्य क्षेत्र में रात के समय चंबल नदी के आसपास दोनों किनारों पर बेखौफ अवैध बजरी का खनन हो रहा हैं। वन विभाग के अधिकारियों द्वारा अवैध खनन करने वाले लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं करने और मिलीभगत होने से अवैध खनन करने के हौसले बुलन्द होते जा रहे हंै। जिससे घडिय़ालों का प्रजनन प्रभावित हो रहा हैं और जलीय जीव जंतुओं को नुकसान पहुंच रहा हैं। वहीं नदी का प्राकृतिक सौंदर्य भी नष्ट होता जा रहा है।
केशवपाटन उपखंड क्षेत्र में चंबल नदी के दोनों ओर एक किमी की सीमा में घडिय़ाल अभयारण्य घोषित किया हुआ है और इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का खनन कार्य प्रबन्धित है। इसकी सुरक्षा के लिए चम्बल घडिय़ाल अभ्यारण्य, वन विभाग,एवं स्थानीय पुलिस प्रशासन को देखरेख की जिम्मेदारी सौंप रखी हैं और घडिय़ालों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा लाखों रुपए का खर्चा किया जा रहा हैं। इसके बावजूद लम्बे समय से प्रशासन की मिलीभगत होने से क्षेत्र में चम्बल के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर बेखौफ खनन हो रहा हैं। जिससे घडिय़ालों की संख्या लगातार कम होती जा रही हैं और इससे घडिय़ालों की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लग गया हैं।
नेस्टिंग पॉइंट के समीप हो रहा खनन
चंबल नदी में चोरी छुपे हो रहे अवैध बजरी खनन से चंबल घडिय़ाल संरक्षित क्षेत्र में जलीय जीवों का सुकून गया है। हाल यह है कि घडिय़ालों से महज 20 मीटर दूरी पर ही बजरी का खनन किया जा रहा हैं। जलीय जीव यहां बजरी में अंडे देते हैं। नदी क्षेत्र के रोटेदा, डोलर, जगदरी, बालोद, बंधा की खेड़ली के पास घडिय़ालों के नेस्टिंग पाइंट हैं, लेकिन मिलीभगत के चलते कई दिनों से रात के समय यहां चोरी छुपे बजरी खनन हो रहा है।
चौकियां हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं
चम्बल में बजरी खनन सहित मत्स्य आखेट एव अन्य अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने और घडिय़ालों व जलीय जीव जंतुओं को बढ़ावा देने के लिए, देखरेख के लिए नाका ,चौकियां बना रखी है और जाप्ता लगा रखा है, लेकिन मिलीभगत के चलते अवैध खननकर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई नहीं होने से इनके हौसले बुलंद हैं।
रोक के लिए खाई लगाने में भी मिलीभगत
विभाग द्वारा बजरी खनन को रोकने के लिए चम्बल नदी के किनारों पर जेसीबी से खाई खुदवाई जाती हैं, लेकिन इसमें भी खननकर्ताओं से मिलीभगत नजर आती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों द्वारा खाई लगाने का दिखावा किया जाता हैं। खनन वाले मार्ग में खाई लगाने के दौरान ट्रैक्टर ट्रॉलियों के निकलने के लिए रास्ते में कुछ जगह छोड़ दी जाती है। जिससे बजरी से भरे टै्रक्टर ट्रॉली बजरी तक आसानी से पहुंच सके।
संसाधनों की भी है कमी
अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए चौकियां बनी हुई हैं, लेकिन क्षेत्र बड़ा होने से सूचना के बाद भी विभाग के कर्मचारी समय पर मौके पर नहीं पहुंच पाते हंै। विभाग के पास पर्याप्त संख्या में कर्मचारी एव वाहन भी नहीं है। केशवरायपाटन से लेकर इंद्रगढ़ तक पांच चौकियां केशवरायपाटन, डोलर, देहीखेड़ा, चाण्दा खुर्द और इन्द्रगढ़ बनी हुई हैं। कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी पर्याप्त संसाधन नहीं है। जिससे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं।
सुमित कुमार फोरेस्टर चंबल घडिय़ाल अभयारण्य केशवरायपाटन ने बताया कि खनन माफिया का नेटवर्क इतना मजबूत है कि खनन की सूचना के बाद जैसे ही कार्रवाई के लिए निकलते हैं तो ट्रैक्टर ट्रॉलियां खाली कर मौके से भाग छूटते हैं। फिर भी समय समय पर कार्रवाई की जाती हैं। खनन को रोकने के लिए रोटेदा ,जगदरी में चम्बल के निकट खाई लगवाई गई हैं। पांच दिन पूर्व ही दो बजरी से भरी ट्रॉलियां जप्त कर कार्रवाई की गई हैं।

Abhishek ojha
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