वेंटिलेटर पर लॉ कालेज, जानिए क्या हुआ ऐसा जो बिगड़ते जा रहे हालात

वेंटिलेटर पर लॉ कालेज, जानिए क्या हुआ ऐसा जो बिगड़ते जा रहे हालात

Dhiraj Kumar Sharma | Publish: Sep, 04 2018 12:32:56 PM (IST) Bundi, Rajasthan, India

प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में कानून की पढ़ाई के हाल ठीक नहीं रहे।

बूंदी. प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में कानून की पढ़ाई के हाल ठीक नहीं रहे। बूंदी में लॉ कॉलेज के तो हाल बद से बद्तर हो गए। कॉलेज को नैक की ग्रेडिंग तक नहीं मिली। पंजीकरण नहीं होने से कॉलेज में नव सत्र को लेकर अभी तक कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए। बदहाल विधि शिक्षा को लेकर ना बीसीआई और न ही राज्य सरकार गंभीर नजर आ रही हैं।
सम्बद्धता और बार कौंसिल ऑफ इंडिया की मंजूरी के बिना दाखिले मुश्किल हैं। सरकार ने जल्द फैसला नहीं किया तो कॉलेज की मुसीबतें बढ़ेंगी। लॉ कॉलेज को 13 साल से बार कौंसिल ऑफ इंडिया से स्थाई मान्यता नहीं मिली है। कॉलेज को प्रतिवर्ष महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से सम्बद्धता लेनी पड़ती है। बाद सम्बद्धता पत्र और निरीक्षण रिपोर्ट बार कौंसिल को भेजी जाती है।
संसाधन व स्टाफ की दरकार
मौजूदा वक्त लॉ कॉलेजों में महज एक यूडीसी नियुक्त है। न प्राचार्य न स्टॉफ ऐसे में जर्जर भवन तालों में ही बंद है। पीजी कॉलेज परिसर में संचालित नाम का विधि कॉलेज में दो कक्ष व एक ऑफिस है जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। दरवाजे व खिड़कियां टूटी हुई है। तमाम सुविधाओं की कमी से जूझते इस कॉलेज में शौचालय तक नहीं है। जबकि यूजीसी के नियमानुसार किसी भी विभाग में एक प्रोफेसर, दो रीडर और तीन लेक्चरर होने चाहिए। लॉ कॉलेज में प्राचार्य सहित व्याख्याताओं एवं सहायक कर्मचारी की कमी है। एक कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर लगा रखा है उसकी पगार कॉलेज से उठ रही है। कॉलेज में शारीरिक शिक्षक, खेल मैदान, सभागार और अन्य सुविधाएं नहीं हैं।
नहीं कर सकते दाखिले
बीसीआई को दिए गए अंडर टेकिंग के अनुसार सरकार को लॉ कॉलेज में स्थाई प्राचार्य, पर्याप्त व्याख्याता और स्टाफ और संसाधन जुटाने हैं। शर्तें पूरी किए बगैर दाखिलों की मंजूरी नहीं मिलेगी। बूंदी लॉ कॉलेज में पिछले दो वर्षों से प्रथम वर्ष में कोई नामांकन ही नहीं है। न स्टॉफ। दिलचस्प बात यह कि लॉ कॉलेज संबंधी जानकारी भी समय पर मुहैया नहीं हो पाती। एक मात्र यूडीसी के भरोसे लॉ कॉलेज संचालित है।
विधि शिक्षा की फूलने लगी सांसें
लॉ कॉलेज में विधि शिक्षकों की स्थिति भी ठीक नहीं। फैकल्टी के रूप में राजकीय महाविद्यालय से संचालित इस कॉलेज के हालात और बिगड़ गए। न कॉलेज के पास अपना खुद का भवन न स्टॉफ। कहने को चित्तौडऱोड पर गल्र्स कॉलेज का निर्मित भवन विधि को आवंटित कर दिया, लेकिन वहां हालात यह है कि भवन फोरलेन सडक़ के नीचे दफन हो गया।
तीन साल की सम्बद्धता पर पेच
बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने सभी विश्वविद्यालयों को लॉ कॉलेज को तीन साल की एकमुश्त सम्बद्धता देने को कहा है। यह मामला विश्वविद्यालयों और सरकार के बीच अटका हुआ है। विश्वविद्यालय अपनी स्वायत्तता छोडने को तैयार नहीं है। वर्ष 2005 में स्थापित लॉ कॉलेज से प्रतिवर्ष महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय प्रतिवर्ष सम्बद्धता फीस वसूलता है। इसके बाद वह टीम भेजकर कॉलेज का निरीक्षण कराता है।
बूंदी लॉ कॉलेज साढ़े तीन लाख रुपए शुल्क जमा करवा चुका है। इसके लिए दिल्ली में भी चक्कर काटने के बाद भी अब तक कोई टीम ही नहीं आई।

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