महादेव की आराधना में डूबी ‘छोटीकाशी’,72 घंटे का अखंड कीर्तन से भक्तिमय हुआ माहौल

pankaj joshi | Updated: 14 Jul 2019, 01:32:24 PM (IST) Bundi, Bundi, Rajasthan, India

‘शंभो ओमकारा अविनाशी गंगाधर कैलाशी...’ की धुन पर नृत्य करती महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है। शहर के लंकागेट स्थित रेतवाली महादेव मंदिर में चल रहे 72 घंटे के अखंड कीर्तन में बूंदी शहर के लोग शामिल हो रहे हैं।

- 101 दीपकों से हो रही महाआरती
बूंदी. ‘शंभो ओमकारा अविनाशी गंगाधर कैलाशी...’ की धुन पर नृत्य करती महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है। शहर के लंकागेट स्थित रेतवाली महादेव मंदिर में चल रहे 72 घंटे के अखंड कीर्तन में बूंदी शहर के लोग शामिल हो रहे हैं।
शिव कीर्तन मंडल व शिव महिला कीर्तन मंडल की ओर से अच्छी बारिश और खुशहाली की कामना को लेकर किए जा रहे अखंड कीर्तन में सूरत से भी बड़ी संख्या में लोग बूंदी आए हैं।कीर्तन में शहरभर से आई महिलाएं शनिवार को सामूहिक रूप से नृत्य करती रही। कीर्तन की गूंज से आस-पास के इलाके में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। मंदिर में रोजाना भगवान शिव का पुष्पों से आकर्षक शृंगार किया जा रहा है। वहीं राधा-कृष्ण की प्रतिमा पर सूरत से लाई गई नई पोशाक रोजाना धारण कराई जा रही है। नियमित रूप से भगवान की झांकियां सजाई जा रही है। रोजाना शाम को 101 दीपों से भगवान शिव की महाआरती की जा रही है।
अमरनाथ बाबा की झांकी व पूर्णाहुति आज
शिव कीर्तन मंडल संरक्षक शोभाराम गुलाबवानी ने बताया कि रविवार रात को 10.15 बजे 72 घंटे के अखंड कीर्तन की पूर्णाहुति होगी। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर बाबा अमरनाथ की झांकी सजाई जाएगी। वैद्यनाथ ट्रस्ट समिति अध्यक्ष सत्यनारायण सोमानी ने बताया कि सभी तैयारियां पूरी कर ली है।
सूरत में रहते बूंदी से जुड़े तार
मंदिर में हर वर्ष अखंड कीर्तन किया जाता है। कीर्तन में सूरत के श्रद्धालुओं का भी पूरा सहयोग रहता है। सूरत से कीर्तन में शामिल होने के लिए इस बार भी कई श्रद्धालु बूंदी पहुंचे हैं। बूंदी वासी सूरत प्रवासी रमेश कटारिया, जेठानंद कटारिया, हरीश कुमार टेकवानी, पवन कुमार हरचंदानी, चेतन दास खत्री, राजकुमार गंगवानी, मोहनदास दरियानी, ईश्वरलाल दरियानी, नोतन गुलाबवानी, गुलाब विशनानी, लेखराज लालवानी, मोरदमल दासानी का आज भी कीर्तन से जुड़ाव है।
मंदिर का इतिहास
लंकागेट स्थित वैद्यनाथ महादेव मंदिर की स्थापना 1242 ईस्वी से पूर्व हुई थी। सरस्वती भंडार के रिकार्ड के अनुसार शिव मंदिर की स्थापना गुजरात के राजा सोलंकी सिद्धराव जय सिंह की रानी ने ग्यारहवीं शताब्दी में करवाई थी। गुजरात के राजा किसी युद्ध में काफी घायल हो गए थे। उनका कारवां इस मार्ग से उन्हें अचेत अवस्था में लेकर जा रहा था। तभी मंदिर में लाकर उन्हें ढुकाया और पूजा अर्चना की। इस पर राजा के शरीर में चेतना लौट आई थी। इसके बाद उनकी रानी ने यहां पर मंदिर निर्माण करवाया था।

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