लावारिस बच्चे मिले तो किसे बताएं... जिले में नही चाइल्ड लाइन

लावारिस बच्चे मिले तो किसे बताएं... जिले में नही चाइल्ड लाइन

Suraksha Rajora | Publish: Sep, 05 2018 10:09:04 PM (IST) Bundi, Rajasthan, India

बडा आसान होता है यह लिखना कि मां अपने गुमशुदा बच्चे के बिछडने का गम झेल रही है, लेकिन बहुत कठिन होता है, उस मन की थाह ले पाना जिसका अपना कोई उसकी नजरों से ओझल हो गया हो।

बूंदी. बडा आसान होता है यह लिखना कि मां अपने गुमशुदा बच्चे के बिछडने का गम झेल रही है, लेकिन बहुत कठिन होता है, उस मन की थाह ले पाना जिसका अपना कोई उसकी नजरों से ओझल हो गया हो। खासकर अगर वह बच्चा है तो परिवार के सदस्यों का कलेजा की फट जाता है। बूंदी जिले में अगर कोई लावारिस बच्चा किसी को मिले तो उसे उसके घर तक पहुंचाना कोई आसान काम नहीं है।

 

लावारिस बच्चे की पुलिस को सूचना देने पर सामान्यत: थानों से कोई मददगार जवाब नहीं मिलता है। पुलिसकर्मियों को बच्चों के साथ ‘डील’ करने का तरीका भी पता नहीं होता। ऐसे में मुसीबतशुदा बच्चों की मदद के लिए जरूरत होती है चाइल्ड हैल्प लाइन की और यही व्यवस्था बूंदी जिले में नहीं है। इसकी कमी बरसों से खल रही है। प्रशासन की जानकारी में भी है,लेकिन इसे शुरू करने लिए प्रयास नहीं हुए। नतीजा पुलिस की मानव तस्करी निरोधी यूनिट को यह काम करना पड़ रहा है। वे ही लावारिस बच्चों को उनके बिछडों से मिलवा रहे हैं।

 


अब समस्या यह है कि मानव तस्करी निरोधी यूनिट के पास इस तरह की सूचनाएं ही नहीं आती है। राज्य के सभी जिलों में स्थापित चाइल्ड हैल्प लाइन का इतना प्रचार है कि पुलिस की इस इकाई के बारे मे ंलोगों को जानकारी ही नहीं’ है।

 

यूनिट का ट्रेक रिकार्ड


बूंदी जिले में गत वर्ष 2016 में 12 लडके लापता हुए, जिसमें से 11 वापस मिल गए, लडकियों में स्थिति इतनी अच्छी नहीं रही साल भर में 60 लडकियां गायब हुई है। जिसमें से 52 अपने परिजनों के पास पहुंचा दी गई है। बालश्रम से पीडित पांच बच्चों को मुक्त कराया गया। 117 बच्चों से भिक्षा वृति करा रहे मामले पकडे गए और बच्चों को मुक्त कराया गया।

 

यह होती है व्यवस्था


चाइल्ड हैल्प लाइन पर 1090 टोल फ्री नंबर पर फोन करने पर संस्था के सदस्य मुसीबत में फंसे बच्चे की मदद के लिए आ जाते हैं।

इसलिए भी है जरूरी


बूंदी जिले में अनेक स्थानों पर देह व्यापार के डेरे चलते हैं। ऐसे डेरों में बच्चों की खरीद फरोख्त की आशंका रहती है। बूंदी में पुलिस ने गत वर्ष 2016 में बालिकाओं के खरीद फरोख्त के तीन मामले भी पकड़े। यह मामले किसी अन्य मामले से जुड़े हुए थे। जानकारों का कहना है कि जिले में बच्चो और महिलाओ की मदद से जुड़े व्यवस्था अधिक से अधिक मजबूत की जानी चाहिए।

 

मानव तस्करी निरोधी यूनिट के अधिकारी बताते है कि चाइल्ड लाइन यूनिट काफी मददगार होती है, लोग एकाएक पुलिस पर विश्वास नही करते ऐसे में चाइल्ड लाइन ही बेहतर कांउसलिंग कर पाती है फिलहाल इन मामलों को भी हम अपने स्तर पर हेंडल कर रहे है।

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