राजस्थान का रण : भाजपाइयों ने मना किया तो राजस्थान की इस विधानसभा में दिग्गज नेता ने नहीं लिया सिम्बल

Narendra Agarwal

Publish: Nov, 07 2018 02:30:04 PM (IST) | Updated: Nov, 07 2018 02:30:05 PM (IST)

Bundi, Bundi, Rajasthan, India

नागेश शर्मा. सूर्यनारायण शर्मा
बूंदी.नैनवां. जिले की नैनवां विधानसभा सीट परिसीमन के दौरान वर्ष 2008 में टूट गई। यह सीट 1977 में बनी थी। परिसीमन के पहले बूंदी जिले में चार विधानसभा क्षेत्र थे। नैनवां विधानसभा क्षेत्र के टूटने से इस क्षेत्र के आधा दर्जन नेताओंं का राजनीतिक करियर भी चौपट सा हो गया। नैनवां विधानसभा से तीन बार विधायक रहे रामनारायण मीणा को जगह बदलनी पड़ी। मीणा वर्ष 1990, 1993 और 2003 में नैनवां से विधायक रहे थे।
परिसीमन के बाद मीणा उनियारा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े। नैनवां से भाजपा विधायक रहे प्रभुलाल करसोल्या को सीट टूटने के बाद नई जगह नहीं मिली। कांगे्रस से विधायक रहे सूर्यकुमार जैन राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन सीट नहीं होने से विधायक की दावेदारी नहीं कर पाते।
बूंदी के पूर्व जिला प्रमुख महावीर मीणा भी नैनवां विधानसभा से ही लंबे समय तक विधायक की दावेदारी जता रहे थे। 1977 से 2008 तक रही नैनवां सीट के और भी कई रोचक तथ्य रहे हैं जो आज भी लोगों की स्मृति में हैं।

सिर्फ नामांकन ही किया दाखिल
विधानसभा चुनावों में दो बार ऐसे मामले सामने आए जब टिकट मिलने व नामांकन भरने के बाद भी ऐनवक्त पर उम्मीदवार बदल दिए गए। इस स्थिति से हाड़ौती की राजनीति के दिग्गज कृष्णकुमार गोयल को भी गुजरना पड़ा। बात 1993 की है। भाजपा की ओर से नैनवां विधानसभा क्षेत्र से कृष्णकुमार गोयल को टिकट दिया तो नैनवां पहुंचकर गाजे-बाजे के साथ नामांकन दाखिल किया। गोयल का स्थानीय भाजपाइयों ने विरोध कर दिया। विरोध के बाद गोयल ने सिम्बल पार्टी को लौटा दिया। तब भाजपा ने ऐनवक्त पर प्रभुलाल करसौल्या को उम्मीदवार घोषित किया। हालांकि करसौल्या चुनाव नहीं जीत पाए। वहीं गोयल ने कहीं से भी चुनाव नहीं लड़ा। बाद में सरकार भाजपा की बनी और गोयल को वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया गया।

यहां भी ऐसा ही हुआ
परिसीमन के बाद 2008 में नैनवां विधानसभा क्षेत्र का तीन चौथाई क्षेत्र हिण्डोली विधानसभा में मिल गया। इस चुनाव में भाजपा ने पहले नाथूलाल गुर्जर को प्रत्याशी घोषित किया। गुर्जर ने गाजे-बाजे के साथ नामांकन दाखिल कर दिया था, लेकिन दूसरे ही दिन भाजपा ने प्रत्याशी बदलकर प्रभुलाल सैनी को घोषित कर दिया। हालांकि सैनी चुनाव
भी जीते।

बाइक से पहुंचे शेखावत
1977 में विधानसभा का पहला चुनाव हुआ। नैनवां विधानसभा सीट से जनता पार्टी ने माणकलाल ठाकोर को प्रत्याशी बनाया। ठाकोर के समर्थन में सभा को संबोधित करने भैरोंसिंह शेखावत को आना था। उस समय टोंक से नैनवां तक सडक़ नहीं थी। टोंक से आते समय शेखावत की जीप नैनवां से 15 किमी पहले ही सतवाड़ा गांव के पास खराब हो गई। तब जनता पार्टी के नेता आशिक भाई शेखावत को बाइक पर नैनवां लेकर आए। इसके बाद सभा शुरू हुई।

 

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