शिक्षक दिवस विशेष: जहां से बने, वहीं चल दिए...

शिक्षक दिवस विशेष: जहां से बने, वहीं चल दिए...

Suraksha Rajora | Publish: Sep, 05 2018 09:41:48 PM (IST) Bundi, Rajasthan, India

उनकी आंखों में दीप जल उठा है आखर का, अक्षर के आराधक बन चल पड़े फिर उसी डगर...

बूंदी. जिस स्कूल की पगडंडी नापकर जीवन में शिक्षा की ज्योत जलाई, आज उसी स्कूल के बच्चों को न सिर्फ शिक्षा बल्कि स्काउट-गाइड में नेतृत्व प्रदान करने ओर भारत के भावी निर्माता के रूप में तैयार करने वाले सैकड़ो बच्चे जो अपने अपने क्षेत्र में उच्च पदो पर पदस्थ है उन्हें देखकर सुकून महसूस करते हैं। नाम देवी सिंह सैनानी जो किसी परिचय के मोहताज नही। स्काउट-गाइड संगठन के लिए ही जीना ओर उसी के लिए मरना यह कहना है, सैनानी का।

 

उनके तरक्की की कहानी इसी स्कूल के गलियारों से शुरू होती है, बात चाहें बच्चों को शिक्षा देने की हो या स्कूल के विकास की। 19 साल तक बूंदी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में स्काउट-गाइड को मजबूत करने, स्कूल भवन और परिसर में पंचवटी का निमार्ण किया जो जिले मेंं कहीं नही। शिक्षक के पद पर सन् 1976 से शुरूआत हुई। अध्ययन काल से ही राष्ट्रपति अवार्ड प्राप्त कर चुके सैनानी का जीवन स्काउट-गाइड के प्रति समर्पित है।

 

रिटायर्ड होने के बाद मानो उन्होनें अपना जीवन संगठन की मजबूती में ही रमा लिया हो। इसके लिए परिवार तक की भी परवाह नही। 65 वर्षीय सेनानी उम्र के इस पड़ाव पर भी खुद को अपडेट कर युवा पीढ़ी के साथ कदम ताल करते है यही वजह है कि आज भी संगठन में उन्हें ही जिम्मेदारी दी जाती है। परिवार के कार्यो को छोड़ संगठन के अधिवेशन, विद्यार्थियों की टीम, उन्हें ट्रेनिग देने सहित सभी कार्य बिना स्वार्थ के अनवरत जारी है, खास बात यह है कि इन सब के लिए सेनानी कोई राशि नही लेते है। उन्होनें हजार से ज्यादा शिक्षक स्काउट गाइड संगठन के लिए तैयार कर दिए है।


यह मिली उपलब्धि-


रोवर अवार्ड, जम्बूरी कैंप में सेवाएं, राज्य स्तरीय सम्मान, शिक्षक रत्न से सम्मानित, 25 राष्ट्रपति अवार्ड सहित मंडल स्तर पर कई बार सम्मानति हो चुके। मलेशिया और नेपाल में भारत का प्रतिनिधित्व।

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