बूंदी आखिर कैसे जिए यहां तो अस्पताल भी है बीमार ...

अस्पताल में यदि इलाज करवाने जा रहें है तो सावधान! कहीं ऐसा न हो कि यहां से आपकों स्वस्थ होने के बजाय बीमार ही लौटना पड़े

By: Suraksha Rajora

Published: 20 Jul 2018, 03:02 PM IST

बूंदी. अस्पताल में यदि इलाज करवाने जा रहें है तो सावधान! कहीं ऐसा न हो कि यहां से आपकों स्वस्थ होने के बजाय बीमार ही लौटना पड़े ऐसा इसलिए, क्येाकि अस्पताल परिसर में भरे ऐसे गड्डे है, जो मच्छरो के लिए प्रजजन स्थली बने हुए है।

 

लोगो को साफ-सफाई की नसीहत देने वाले दोनो ही जिम्मेदार विभाग आंखे मूंदे बेठा है। ऐसा भी तब है जब शहर ही नही जिले में मौसमी बीमारियों ने अपना असर दिखना शुरू कर दिया है। अस्पताल में बड़ी संख्या में बुखार और डेगूं और मलेरिया के लक्षण सहित नित नए मरीज पहुंच रहें है।


पर उपदेश कुशल बहुतेरे-


एक तरफ तो चिकित्सा विभाग शहर में अभियान चलाकर घरों में सर्वे कर एंटी लार्वा एक्टिविटी करवा रहा है, ड़ेगू-मलेरिया से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए लोगो को जागरूक कर रहा है वही अस्पताल जहां सबसे ज्यादा मरीज है, वहां बीमारियां पल रही है।

 

चिकित्सा विभाग का खुद अपने घर ध्यान नही है, और शहर की चिंता कर रहा है। अस्पताल परिसर में गंदगी का आलम साफ देखा जा सकता है।
एक ही परिसर में चलने वाले अस्पताल में ऐसे छोटे-बड़े गड्डे है जहां गंदा पानी जमा है। इनमें मच्छरों को भिनभिनाते व गंदगी में सूअरों को मुंह मारते देखा जा सकता है। तीमारदारों को मुंह सिकोडकऱ यहां से गुजरना पड़ता है।

 

कहंा कहा है हालात-


जिला अस्पताल के मुख्य गेट से ही गंदगी से लोगो का सामना हो जाता है। यहां भरे बारिश के पानी में अब मच्छर का खतरा मंडरा रहा है, तो आसपास का कचरा यहां देखा जा सकता है। कहने को वैसे निगम परिषद ने दो कचरा पात्र लगा रखे है लेकिन इन कचरा पात्रों से कचरा खाली नही होता ऐसे में लोग भी अपने जिम्मेदारियों को भुल कचरा अस्पताल के मुख्य गेट के किनारे यूं ही फैंक देते है। इनमें प्लास्टिक की थैलियों की सबसे ज्यादा भरमार है जो नालियों को जाम करने के लिए काफी है।


आयुवेर्दिक अस्पताल का भी यहीं आलम-


यहां परिसर में जमा बारिश का पानी मुसीबत बना है। कीचड़ और गंदगी से आने जाने में परेशानी होती है।

 

यहां इफेक्शन का खतरा-


अस्पताल परिसर में ही जमा गंदगी के बीच महिनों से बायोमेडिकल वेस्ट फैका जा रहा है। इनमें संक्रमित सुई, ड्रीप की बोतल व खून से सनी पट्टियों के बीच गाय मुहं मारती नजर आती है। लेकिन आज तक भी चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को कोई ध्यान नही।

Suraksha Rajora
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