400 साल पुरानी कपड़े की मंडी में अब मंदी का असर, 30 फीसदी घटा उत्पादन

- हर दिन 5 लाख मीटर होता था कपड़े का उत्पादन अब 3.5 तीन लाख पर आया
- फारुखी, मुगल और अंग्रेजों के दौर से बुरहानपुर में बन रहा कपड़ा
- विश्वव्यापी मंदी का असर

By: ranjeet pardeshi

Published: 08 Dec 2019, 12:20 PM IST

बुरहानपुर. 400 साल पुराने फारुखी और मुगल शासन के दौर से बुरहानपुर में बनी कपड़े की मंडी अब मंदी के दौर से गुजर रही है। पहले यहां का कपड़ा दुनियाभर में प्रसिद्ध रहा। अब विश्व व्यापी मंदी के होने से कपड़े की डिमांडघटगई। ऐसे में हर दिन 5 लाख मीटर कपड़े का उत्पादन घटकर 3.5 लाख मीटर पर आ गया। दूसरी बड़ी वजह चीन का सस्ता कपड़ा उपलब्ध होना है इस कारण बुरहानपुर के कपड़े की डिमांडकम है।
जीएसटी और नोटबंदी के बाद से कपड़ा उद्योग टूटने के बाद अब तक पूरी तरह पटरी पर लौटा नहीं है। अब भी 30 फीसदी कपड़े का उत्पादन कम हो रहा है। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि मंदी के कारण मार्केट में खरीदी कम हो गई। इससे उत्पादन पर भी असर पड़ा है। दूसरा बड़ा कारण चीन से जो कपड़ा आ रहा है, वह सस्ता पड़ता है, वह ाी सभी प्रकार का कपड़ा उपलब्ध करा रहा है, जबकि बुरहानपुर का कपड़ा महंगा होने से डिमांडपर असर है।
बड़े पावरलूम कारखानों पर असर
मंदी के कारण बड़े पावरलूम कारखानों पर असर पड़ा है। उत्पादन घटने से जहां २५ लूम चल रहे हैं, वहा सप्ताह में दो से तीन दिन १० लूम बंद पड़ जाते हैं। हालांकि जो चार से पांच लूम चला रहे हैं, उन्हें यार्नदिया जा रहा है, ताकि इनका काम प्रभावित न हो। लेकिन उत्पादन घटने से कपड़ा उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े ७० हजार लोगों पर भी इसका असर पड़ा है।
२० यूनिटों की सब्सिडी भी अटकी
केंद्र सरकार की योजना से प्रभावित होकर बुरहानपुर में पिछले पांच सालों में २० नईयूनिट दल गई। लेकिन इसका सब्सिडी का पैसा अब तक नहीं डला। योजना यह थी कि नई यूनिट डालने पर केंद्र से २० और प्रदेश से ४० फीसदी सब्सिडी मिलना है। केंद्र की जो एक मुश्त २० फीसदी सब्सिडी उसका तो कईसमय से ठिकाना नहीं है। राज्य की ४० प्रतिशत सब्सिडी है, वह हर साल १०-१० प्रतिशत मिल रही है। व्यापारियों ने कहा कि सरकार बढ़ावा देने के लिए स्कीम लागू कर देती है, लेकिन इसका क्रियान्वयन नहीं हो पाता।
सायजिंग प्रोसेस में भी काम ठंडा
बुरहानपुर में पावरलूम से बनने वाला कपड़ा सायजिंग और प्रोसेस में जाता है। यहां अस्तर और बेड शीट का कपड़ा तैयार होता है। जब माल लूम पर ही तैयार नहीं हो रहा है, तो यहां पर भी मंदी छा गई। जिस हिसाब से बाजार रहना चाहिए, वैसा नहीं रहा। व्यापारियों का कहना है कि हालात तो अब यह है कि पावरलूम कारखानों को बिजली बिल भरना भारी पड़ रहा है। पावरलूम संचालक कईसमय से सरकार से बिजली दर कम कर सब्सिडी बढ़ाने की मांग भी कर रहे हैं।
ऐसा है बुरहानपुर में कपड़ा मंडी का इतिहास
पुरातत्वविद होशंग हवलदार ने बताया कि फारुखी शासन से कपड़ा उत्पादन बुरहानपर में हो रहा है। हैंडलूम पर साडिय़ां बनती थी। पहले के जमाने में राजा पहरेदारों को पैरों में अंगूठी पहनाते थे, उस अंगूठी में से साड़ी निकल जाए वह सबसे महंगी कहलाती थी।
पुरातत्वविद शहजादा आसीफ खान ने बताया कि जैनाबाद में कपड़ा उत्पादन होता था और इसकी मंडी अंडा बाजार में ताना गुजरी मस्जिद के पास लगती थी। क्योंकि यहां पर अकबरी सराय है, जो मुगल काल में फाइव स्टार होटल हुआ करती थी, बाहर से आए मेहमान यही से कपड़ा खरीदते थे। पहले जो कपड़ा बनता था उस दौर में बंगलादेश के ढाका में बनने वाला मलमल का कपड़ा दुनियाभर में बहुत मशहूर था, जिसे बुरहानपुर का कपड़ा टक्कर देता था। फारुखी, मुगल और अंग्रेजों के जमाने तक यहां पर कपड़े की मंडी रही। बुरहानपुर के मलमल के कपड़े को अंग्रेज लोग अपनी दुल्हन के कपड़े भी बनवाते थे।
ऐसा होता गया बदलाव
आसीफ खान ने बताया कि १८५७ में जो गदर हुआ उससे कईलोग इधर से उधर हो गए। उस समय अन्य राज्यों से भी लोग यहां आए। कपड़ा मंडी को अपने हाथ में ले लिया था। धीरे-धीरे समय बदलता चला गया। १९३३ में हैंडलूम की जगह पावरलूम आ गए, जो अब तक चल रहे हैं। इसके अलावा चीनी लूमों ने भी दस्तक दे दी। कपड़े की गुणवत्ता बढ़ाने और कम समय में अधिक से अधिक उत्पादन के लिए चीनी लूम शहर में लगने लगे। अब भी ३५ हजार पावरलूम और २ हजार चीनी लूम है।
देश के ४७ शहरों में बुरहानपुर का नाम
देश के १५० शहर ऐसे हंै, जहां कपड़ा बनता है, इसमें ४७ शहरों में बड़े उद्योग है। इसमें बुरहानपुर का नाम भी शामिल है। देशभर में कपड़ा निर्यात होने के बाद बुरहानपुर की पहचान बन चुकी है। शहर के उद्योग की यह खासियत है कि ३५ हजार पावरलूम पर कपड़ा बनकर तैयार होने के बाद इसकी फिनिशिंग से लेकर पैकिंग तक का काम हो रहा है। यह खासियत अन्य शहरों में नहीं है।
देशभर से लेकर विदेशों तक कपड़ा पहुंच
देश में मुंबई, पाली, बलोतरा, जेतपुर तक बुरहानपुर का कपड़ा जाता है। इसके अलावा असाम, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित कई प्रदेशों में बुरहानपुर के माल की मंाग प्रभावित हुई है। चार साल पहले तक श्रीलंकर, नेपाल और बर्मातक कपड़ा गया है। शहर में धोती, रूमाल और कफन और शर्टिंग-शूटिंग का कपड़ा तैयार किया जाता है।
पॉवरलूम एक नजर में...
३५ लाख मीटर कपड़े का उत्पादन हर दिन
१९३३ में शुरुआत हुई थी बुरहानपुर में पॉवरलूम की
३५ हजार पॉवरलूम शहर में
१८०० चीनी लूम
७० हजार मजदूर जुड़े है उद्योग से
- कपड़ा उद्योग की मंडी में खासी मंदी है। खरीदी न होने से डिमांडकम हो गई। चीनी लूम का सस्ता कपड़ा भी टक्कर दे रहा है। मंदी के कारण अभी यही हाल बने रहना है।
- जेपी लखोटिया, उद्योगपति
- बुरहानपुर का कपड़ा देशभर सहित विदेशों में भी जाता रहा है। फिलहाल तो मंदी छाई हुई है। कपड़े का उत्पादन भी तीस फीसदी तक घटा है।
- प्रदीप तोदी, लघु उद्योग भारती अध्यक्ष

ranjeet pardeshi Bureau Incharge
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