43 तालाब की 67.79 मिलियन घन मीटर पानी की क्षमता, वह भी सूख गए

- 0.2 मिलियन घन मीटर पानी
- पिछले साल से बेहतर बारिश इस बार बिगड़े हालात

By: ranjeet pardeshi

Published: 03 Jul 2021, 11:34 AM IST

बुरहानपुर. मौसम की बेरुखी ने सभी को मुश्किल में डाल दिया। शहर में जहां लोग गर्मी रिटर्न होने से परेशान हैं, तो वहीं किसान फसलों को पानी नहीं मिलने से आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। बड़ी बात यह कि सरकार ने करोड़ों रुपए जो तालाब निर्माण पर लगाए वह भी सूखे पड़े हैं। 43 तालाबों में 67.79 मिलियन घन मीटर पानी की क्षमता होने के बाद भी इसमें केवल 0.2 मिलियन घन मीटर पानी बचा है, वह भी तीन इंच के करीब जो पानी बरसा उससे जमा हुआ। याने अब इन तालाबों ने भी दम तोड़ दिया।
इस बार मानसून बुरहानपुर से रूठा हुआ है। अब तक बेहतर बारिश का ठिकाना नहीं है। पिछले पांच दिन से तो बादल बुरहानपुर में बरसे ही नहीं है। बीच में जरूर कुछ देर के लिए बूंदाबांदी होकर बादल चले गए। पिछले सप्ताह दिन जो जोरदार बारिश हुई वह नजारा देखकर किसानों ने खेतों में बोवनी तो कर दी, लेकिन अब पानी नहीं होने से चिंता में है। अब वे आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
तीन डिग्री पारा भी बढ़ा
मौसम की बेरुखी के कारण फिर गर्मी का मौसम आ गया। कभी काले बादल तो कभी तेज धूप से लोग हलाकान हो रहे हैं। पिछले सप्ताह तक अधिकतम पारा 30 डिग्री तक पहुंच गया था, जो अब 32 से 33 डिग्री तक जा रहा है।
यह है बारिश के हालात
अब तक बुरहानपुर में 116 एमएम बारिश हुई है। इसमें बुरहानपुर में 126.7, नेपानगर में 119.3 और खकनार में 102.2 एमएम पानी बरसा है। जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 163.2 एमएम पानी गिर चुका था।

यह है तालाबों के हालात
43 कुल तालाब
23 बैराज
6 बिना नहर वाले तालाब
20 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित का लक्ष्य
67.79 मिलियन घन मीटर पानी की क्षमता
0.2 मिलियन घन मीटर पानी बचा

करोड़ रुपए खर्च हुए है तालाब निर्माण पर
पानी को संचय करने के लिए तालाब पर अब तक करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं। लेकिन आसमान से जब पानी नहीं आता हैं तो यह तालाब भी जवाब दे जाते हैं। जबकि इन तालाबों पर अरबों रुपए खर्च हो चुके हैं। छोटे तालाब निर्माण में ही 5 से 10 करोड़ का खर्चा आता है।

यह है फसल का रकबा हेक्टेयर में
फसल रकबा
कपास 4400
सोयाबीन 18500
मक्का 14000
उड़द मूंग 2400
अरहर 7000
ज्वार 7500

कृषि विभाग ने जारी की एडवायजरी
कृषि विकास विभाग उपसंचालक एमएस देवके ने किसानों के लिए एडवायजरी जारी की है। सूखे की स्थिति में फसल को बचाने के लिए किसान ड्रिप एवं स्प्रिंकलर या अन्य से सिचंाई करें। डोरा कोल्पा, हस्तचलित अन्य साधन से गुढाई करें, जिससे कि भूमि में नमी बनी रहे। जैविक मल्च, सोयाबीन, गेंहूं आदि का भूसा उपलब्ध हो तो सोयाबीन की कतारों के बीच मल्च 5 टन प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करें।
सोयाबीन की फसल जहां पर 15 से 25 दिन की हो गई हो वहां पर खरपतवार नियंत्रण आवश्यक करें। खरपतवार नियंत्रण अन्य विधियों या बोवनी के बाद खड़ी फसल में उपयोगी खरपतवारनाशक 1 लीटर प्रति हेक्टेयर या क्लोरीमुरान इथाइल दर 36 ग्राम प्रति हेक्टेयर रासायनिक का छिड़काव कर खरपतवार नियंत्रण करें। सोयाबीन की फसल 20 से 25 दिन की हो गई हो वहां कीटों का प्रकोप होने पर अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव कर नियंत्रण करें।

ranjeet pardeshi Bureau Incharge
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