जागरुकता से आई एड्स के मरीजों में कमी, 12.6 का रेशो 1.6 पर आया, अब भी 44 नए मरीज मिले

- महिलाओं की तुलना में पुरुष ज्यादा एड्स रोगी
- २०१५ के बाद तेजी से लगा लगाम

बुरहानपुर. २०१५ के बाद से एचआईवी संक्रमण के नए मामलों की संया में कमी आई है और एड्स (एक्वायर्ड इयुनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम) के कारण होने वाली मौतों की संया में भी कमी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है लगातार अभियान और डिलेवरी महिलाओं की जांच से कर लोगों में इस बीमारी के प्रति जागरुकता फैलाने से कमी आई है। २००६ में एड्स का जांच संया के आधार पर रेशो १२.६ पॉजीटिव था, जो २०१६ में १.६ पर आ गया। इस पूरे आंकड़ों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संया एड्स रोगियों में ज्यादा है।
एड्स की बीमारी पर अब भी पूरी तरह रोक तो नहीं लगी है, लेकिन कई हद तक संया में कमी आई है। २०१९ की के आंकड़े देखे तो ७५५८ की जांच में ४४ नए मरीज मिले। विभाग का कहना है कि लोगों में एनजीआ, सामाजिक संस्थाआओं के माध्यम से जागरुकता फैलाना इसका प्रमुख कारण है। इसके लिए ५ एनजीओ काम कर रही है। सभी के अलग-अलग काम है।गर्भवती होने से लेकर महिलाओं की डिलेवरी तक एचआईवी का परीक्षणकर उन्हें समझाया जाता है। सामान्य महिलाएं है, लेकिन रिस्क एरिया चिन्हित है, तो उन्हें बीमारी के प्रति जागरुक किया जा रहा है।
एड्स पीडि़त हर साल पुरुषों की संया ज्यादा
एड्स बीमारी में सबसे अधिक पुरुष घिरे हुए हैं। २००६ में अप्रेल से दिसंबर तक के आंकड़े देखे तो ८२ पुरुष २७ महिलाएं एड्स पॉजिटीव पाईगई। अक्टूबर २०१९ में २७ पुरुष और १७ महिलाएं चिन्हित किए गए। २००८ में ही केवल ६० पुरुष और ६९ महिलाओं में एड्स रोग पाया गया था, इसके बाद से लगातार पुरुषों की संया ज्यादा निकल रही है।

एड्स की साल दर साल रिपोर्ट-
वर्ष जांच पॉजीटिव पुरुष महिला
२००६ ६४५ १०९ ८२ २७
२००७ २८५२ १८४ १०१ ८३
२००८ २६९० १२९ ६० ६९
२००९ ४०५१ १४८ ८९ ५९
२०१० ४१७० १२० ६२ ५८
२०११ ४७८८ ८७ ५१ ३६
२०१२ ७४४५ ८९ ५५ ३४
२०१३ ७४४५ ८४ ५५ २९
२०१४ ९१४६ ११८ ५७ ६१
२०१५ ८१९८ ७२ ४३ २९
२०१६ ८७५१ ६९ ४४ २५
२०१७ ८९८२ ५८ ३४ २४
२०१८ ८७३२ ६२ ३५ २७
२०१९ ७५७८ ४४ २७ १७
एड्स मरीज घबराए नहीं-
एड्स होने पर मरीज घबराए नहीं। दवाई लेने पर लंबे समय तक पीडि़त जिंदा रह सकता है। बुरहानपुर में सभी सुविधाएं दी जा रही है। आसानी से दवाई उपलब्ध हो जाती है।
- सुनील पाटिल, नोडल अधिकारी
- एड्स की बीमारी की रोकथाम के लिए जनचेतना आना चाहिए। जितने भी अस्पताल है उन्हें सत निर्देश दिए जाए कि डिस्पोजेबल सिरिन का उपयोग करें, एक बार जो इंस्ट्रुमेंट उपयोग हो गया, उसका उपयोग न करें। समय समय पर अस्पतालों का अवलोकन हो, जिससे पूरी तरह रोक लग सके।
- महेंद्र जैन, मानव अधिकार आयोग जिला संयोजक

ऐसे बचाया जा सकता है जीवन-
प्रशासन की गंभीरता
एक बड़ा जनजागृति अभियान चलाया जाए
ब्लड की जांच वृहद स्तर पर हो
एक ही व्यक्ति से लैंगिक संबंध पर जोर
प्रशिक्षित चिकित्सकों की नियुक्तियां
जांच की अधुानिक मशीनें
इसलिए एड्स खतरनाक-
६ से १० साल तक गंभीर अवस्था में पहुंचता है एड्स
अन्य संक्रमण घेरने लगते है मरीज को
बीमारी से लडऩे की क्षमता कम होती है।
आज निकलेगी जागरुकता रैली
एड्स दिवस पर १ दिसंबर को स्वयं सेवी संस्थाओं, महाविद्यालय व स्कूल के छात्र-छात्राओं की सहभागिता से रैली का आयोजन होगा। सावित्री बाईफुले कन्या हायर सेकंडरी स्कूल से निकलेगी। इसका समय सुबह ९.३० बजे का रहेगा। प्रमुख मार्गों से होते हुए रैली वापस स्कूल पहुंचेंगी। रैली के समापन पर एड्स, एचआईवी की जांच रोकथाम व नए एचआईवी संक्रमण को रोकने को लेकर प्रेरणा दी जाएगी।

ranjeet pardeshi
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