अब पॉवरलूम फेडरेशन में भी भाजपा-कांग्रेस नेताओं का है कब्जा

 35 हजार पॉवलूम, 150 सोसायटियां संचालित है यहां 70 हजार में से 240 सदस्यों को ही मताधिकार  सहकारी सोसायटियों को भी काम नहीं दे पाया फेडरेशन

बुरहानपुर. शहर में बुनकरों की हालत सुधारने के लिए पॉवरलूम फेडरेशन का गठन तो किया गया, लेकिन इसमें आम लोगों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। ज्यादातर सोसायटियां यहां पर नेताओं की ही काम कर रही है।
35 हजार पॉवरलूम के इस शहर में मात्र 150 समितियां ही फेडरेशन के साथ काम कर रही है। बड़ी बात यह है कि पिछले एक वर्ष से इन्हें भी पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है।
    शहर में पॉवरलूम बुनकर सहकारी संघ को कई बुनकरों को जोडऩे की आवश्यकता है। यहां पर नाममात्र के सोसायटियां बनी है। फेडरेशन से जुड़ी पॉवरलूम सोसायटियों को भी काम नहीं मिल पा रहा है। इससे शहर की आर्थिक धड़कन पॉवरलूम उद्योग की हालत चरमराई हुई है। जिले में बुनकरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है।
ये कैसा नियम मात्र 240 को मत का अधिकार
जिले में बुनकर संघ की मात्र 150 सोसायटियां संचालित हो रही है। 150 सोसायटियों के 240 सदस्यों को ही बुनकर संघ के चुनाव के मत डालने का अधिकार है। जबकि कई लोगों को इससे वंचित कर रखा है। नए सदस्यों को करीब 15 वर्षों से नहीं जोड़ा है। इसके चलते जिले में पॉवरलूम का विकास नहीं हो पा रहा है।
इधर फेडरेशन को सरकार के भंडार क्रय नियम से जोडऩे के आठ माह बाद भी इन सोसायटियों के पास पर्याप्त काम नहीं है। इससे करीब 1500 पॉवरलूमों के संचालकों को काम नहीं मिल पा रहा है।
भाजपा-कांग्रेस के नेताओं का कब्जा
समितियों में ज्यादातर भाजपा-कांग्रेस के नेताओं का कब्जा बना हुआ है। जबकि इसमें बुनकरों को दूर रखा है। बुरहानपुर में बुनकर नेताओं में कांग्रेस के इस्माइल अंसारी, भाजपा के जयंती भाई नवलखे के साथ ही भाजपा से सांसद और विधायक समर्थक लोग ही ज्यादातर है।
बुनकरों ने मांगी सदस्यता
बुनकरों ने पॉवरलूम फेडरेशन में सदस्यता मांगी है। ताकि उन्हें भी शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके। बुनकर हरीराम भावसार ने बताया कि यदि हमें पॉवरलूम संघ से जोड़ दिया जाता है तो बुनकरों का विकास हो सकेगा। शासन स्तर पर फेडरेशन के लिए सदस्यता अभियान चलाया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र में सुधरी हालत, बुरहानपुर में बिगड़ी
बुरहानपुर का पॉवरलूम उद्योग चरमरा गया है। मंदी के चलते बुनकरों के सामने आर्थिक संकट है। 35 हजार पॉवरलूम के शहर में बुनकरों को पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है। 52 सायजिंग प्रोसेस की हालत पतली है। 70 हजार लोगों के अच्छे दिन नहीं आए हैं। वर्तमान में पॉवरलूम का कारोबार घाटे का सौदा हो गया है। जबकि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के भिवंडी में पॉवरलूम स्थिति बेहतर है।
आंकड़े एक नजर में...
35000
पॉवरलूम है शहर में
70000
लोग जुड़े है पॉवरलूम उद्योग से
150
समितियां जुड़ी है पॉवरलूम संघ से
240
लोगों को ही है मत देने का अधिकार  

- फेडरेशन में पॉवरलूम समितियों को बढ़ाया जाए। यहां पर 35 हजार पॉवरलूम होने के बाद मात्र 150 समितियां ही काम कर रही है। इसका लाभ व्यापक तौर पर बुनकरों को मिलना चाहिए।
अब्दुल रब सेठ, बुनकर नेता
- पॉवरलूम बुनकर संघ में सभी लोग शामिल है। चुनाव के वक्त तो हर कोई अच्छे व्यक्ति का समर्थन करता है। यह समिति का चुनाव होता है, पार्टी स्तर पर कुछ नहीं होता।  सभी लोग बुनकरों के हित में काम करते हैं।
इस्माइल अंसारी, संचालक पॉवरलूम बुनकर संघ

- आठ माह से काम बंद हो गया था, बजट नहीं होने स्थिति खराब थी। अब इस माह से बेहतर स्थिति में आएंगे। करीब 40 करोड़ का काम हम समितियों को देते हैं। चुनाव का मेटर शासन स्तर का है।
मथूरा प्रसाद पटेल, प्रबंधक पॉवरलूम फेडरेशन
Editorial Khandwa
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