कोरोना के प्रभाव के चलते विश्व विरासत दिवस की लोगों को नहीं लग पा रही जानकारी

कोरोना के कारण गुपचुप निकल रहा विश्व धरोहर सप्ताह
पहले दिन किले पर था नि:शुल्क प्रवेश, किसी को जानकारी तक नहीं

By: tarunendra chauhan

Published: 20 Nov 2020, 06:47 PM IST

बुरहानपुर. शहर में ऐसे कई ऐतिहासिक धरोहर और भ्रमण स्थल हैं जो प्राचीन भारतीय लोगों की संस्कृति और परंपरा के प्रतीक है। महत्वपूर्ण स्मारक कुंडी भंडार, शाही किला और आदि पवित्र स्थल है, लेकिन इनकी पहचान मप्र टूरिज्म तक सिमित है। अब विश्व विरासत सप्ताह 19 से शुरू हुआ है, लेकिन इस बार कोरोना के कारण यह सप्ताह गुपचुप तरीके से निकल रहा है। यहां तक सप्ताह के पहले दिन शाही किले में नि:शुल्क प्रवेश था, लेकिन इसकी भी पर्यटकों को जानकारी न होने से किले पर सन्नाटा पसरा रहा।

सूफी-संतों का शहर रहे बुरहानपुर का इतिहास बहुत पुराना है। राजा महाराजा से लेकर अंग्रेजों तक की निशानी बुरहानपुर में है। इसकी गाथा प्राचीन धरोहरें करती है। इसे देखने के लिए भारत से लेकर विदेशों तक के पर्यटक यहां आते हैं, लेकिन बुरहानपुर की विशिष्ठ पहचान अब तक नहीं बन सकी है।
-विश्व धरोहर सप्ताह मनाने का कारण

विश्व धरोहर सप्ताह मनाने का मुख्य उद्देश्य देश की सांस्कृतिक धरोहरों और स्मारकों के संरक्षण और सुरक्षा के बारे में लोगों को प्रोत्साहित करना और जागरूकता बढ़ाना है। प्राचीन भारतीय संस्कृति और परंपरा को जानने के लिए ये बहुत आवश्यक है कि अमूल्य विविध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्मारकों की रक्षा की जाए और उन्हें संरक्षित किया जाए।
-यह धरोहर बुरहानपुर में

आसीरगढ़ किला
बुरहानपुर से लगभग 20 किमी दूर सतपुड़ा पहाड़ के शिखर पर आसीरगढ़ किला बना हुआ है। यह किला आज भी अपने वैभवशाली अतीत की गुणगाथा कर रहा है।

शाही किला
ताप्ती नदी के पश्चिमी तट पर विशाल शाही किला स्थित है। फारुकी शासन काल की प्रसिद्ध यादगारों में से यह किला एक है। इसे मीरा एना आदिल शाह फारुकी बादशाह ने निर्मित कराया था। जहां मुमताज की यादें आज भी ङ्क्षजदा है।

कुंडी भंडारा
शहर से 8 किमी दूर कुंडी भंडारा जहां भूमिगत जल प्रणाली विश्व में एक मात्र जीवित धरोहर हैं। मुगल शासन काल में सूबेदार अब्दुल रहीम खान खाना ने 1695 ई में इसका निर्माण कराया था।

पवित्र स्थल
गुरुद्वारा बड़ी संगत, प्राचीन जैन मंदिर, दरगाह ए हकीमी, जामा मस्जिद, स्वामी नारायण मंदिर, कबीर मंदिर, असीरगढ़ में स्थित प्राचीन शिव मंदिर, धूलकोट रोड पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर, गुप्तेश्वर मंदिर आदि स्थान है।

tarunendra chauhan Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned