डॉ. सैयदना साहब ने कहा, मिल-जुलकर रहें और एक-दूसरे की मदद करें, देखें VIDEO

बोहरा समाज के 53वें धर्मगुरु का बुरहानपुर आगमन, दुनिया को दिया वाअज

By: tarunendra chauhan

Published: 16 Oct 2020, 03:22 PM IST

बुरहानपुर. मैं सात माह बाद मिल रहा हूं। आप सभी के बीच आया हूं, औरंगाबाद से लेकर बुरहानपुर तक जगह-जगह मेरे बुजुर्ग पुरुष-महिलाएं, जवान बच्चे मेरे दीदार के लिए दो तीन घंटे खड़े रहे, इंतजार किया। आप से मिलकर आपको देखकर बहुत खुशी हुई। आप सभी की बहुत याद आ रही थी। यह बात दाउदी बोहरा समाज के 53वें दाई डॉक्टर सैयदना आलीकदर मुफद्दल सैफुद्दीन साहब ने कही। बुरहानपुर की दरगाह-ए-हकीमी से पूरी दुनिया के समाजजनों को दिए गए वाअज में सभी के लिए दुआएं भी की।

 

अंजुमन जकवी कमेटी के प्रवक्ता तफजुल हुसैन मुलायमवाला ने बताया कि सैयदना साहब ने इमाम हसन की शहादत पर वाअज फरमाया, जिसे दुनिया भर में उनके अनुयायियों ने सुना। उन्होंने शहादत पर पूरी जानकारी दी। इमाम हसन की याद में मातम भी हुआ। सभी बुरहानपुरवासियों की तरक्की के लिए दुआ की। उन्होंने कहा, माल, व्यापार, सेहत और तामिल में बरकत हो। देश की तरक्की के लिए भी दुआएं की। साथ ही हकीमुद्दीन मौला साहब के जीवन पर प्रकाश डाला। बच्चों की तरबीयत के बारे में बताया। कहा, अड़ोसी पड़ोसियों से मिलकर रहो, आपस में प्रेम बांटों। कोरोना जैसी महामारी के बारे में कहा, शासन के नियम का पालन करें, जो अपने आसपास के लोगों की आर्थिक स्थिति बिगडऩे से दुखी हुए हैं, उनका सहयोग करें ताकि उनके दुख कम हो सके। वाअज से पहले दरगाह में बने सैयदना हकीमउद्दीन मौला साहब, सैयदना जकीउद्दीन मौला साहब, सैयदना जीवनजी मौला साहब के रोजे पर जियारत भी की।

 

बुरहानपुर के केवल 10 लोग शामिल

मौला साहब के आगमन पर जहां दुनियाभर के अनुयायियों के पहुंचने से पूरे बुरहानपुर में खासी भीड़ रहती, वहीं अब कोरोना के कारण यहां सन्नाटा रहा। यहां तक दरगाह के बाहर की पूरी दुकान बंद रही। दरगाह का मेन गेट बंद रहा। किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं थी। केवल दरगाह में वाअज के समय 150 के करीब लोग थे जो अंदर रहे। यह भी मौला साहब के साथ आए हुए और पहले से दरगाह प्रबंधन के लोग शामिल थे। बाकी बुरहानपुर के केवल 10 लोगों को अंदर एंट्री रही। वे भी पूरे सोशल डिस्टेंस के साथ रहे। बाकी समाजजनों ने अपने घरों पर ही मौला साहब का वाअज सुना। मौला साहब के आगमन से 15 दिन पहले ही दरगाह में रहने वालों को क्वॉरंटीन कर दिया गया था। मौला साहब पूरे लॉकडाउन में खंडाला और मुंबई में रहे। अनलॉक होने के बाद वे सभी दरगाह पर जा रहे हैं। औरंगाबाद से वे बुरहानपुर पहुंचे। यहां वे तीन से पांच दिन ठहरने की संभावना है। कोरोना के कारण किसी को भी उनके दीदार की अनुमति नहीं है।

 

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