Social pride - पायलेट बनने का सपना नहीं हुआ पूरा, तो विदेश यात्राएं कर पूरे कर रहे ख्वाब

विदेशियों को बताते हैं भारत की परंपरा, 12 देशों की यात्रा की पूरी

 

 

By: tarunendra chauhan

Updated: 26 Nov 2020, 06:15 PM IST

बुरहानपुर. बचपन में आसमान में प्लेन उड़ता देखता था, तभी से पायलेट बनने का शौक था। इसके लिए पढ़ाई भी की, यहां तक पायलेट बनने के लिए (पीएबीटी) पायलेट एप्ट्यिूटी बेटरी टेस्ट पास कर ली थी, लेकिन आगे की परीक्षाओं के मापदंड में खरे नहीं उतर सके तो आगे जाकर प्रोफेसर बन गए, लेकिन आसमान में उडऩे के सपने को अब विदेश यात्राओं पर जाकर पूरा कर रहे हैं। अब तक 12 देश घूम चुके और आगे भी यह यात्राएं जारी रहेगी। यह शख्सियत है बुरहानपुर के सेवा सदन कॉलेज में प्रोफेसर डॉक्टर संदीप पगारे।

प्रोफेसर पगारे ने बताया कि पायलेट बनने का शोक था। एनसीसी में रहकर वायु सैनिक कैंप दो बार अटेंड किए। ट्रेकिंग कैंप में भाग लिया, मेहनत बहुत की, लक्ष्य निर्धारित था, लेकिन समय ने प्रोफेसर बना दिया। अब विदेश यात्राओं पर जाकर अपने सपने पूरा कर रहा हूं। यहां तक पगारे अपने साथ पत्नी मनीषा पगारे, बेटा सोमित्र पगारे, बेटी सोमन्या पगारे को भी साथ ले जाते हैं। आगे अब पुर्तगाल, ऑस्ट्रियां हंगरी जाएंगे, ऑस्ट्रिया की उनकी यह दूसरी यात्रा होगी। उन्होंने यह यात्राएं 2002 से शुरू की थी।
ये यात्राओं पर जा चुके पगारे

प्रोफेसर पगारे अब तक इंगलैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्वीजरलैंड, ऑस्ट्रियां, इटली, बैल्जियम, हालैंड, दुबई, ग्रीस आदि की यात्राएं की है। वे अपने अनुभव में बताते हैं कि पूरी दुनिया में भारतीय लोग बसे हैं, जहां हर देश में भारतीय रेस्टोरेंट भी है। प्रोफेसर जहां भी जाते हैं, विदेशी लोग मिलने पर उन्हें भारतीय संस्कृति और भारतीय परंपराओं के बारे में भी बताते हैं।

ये देखने को मिला
प्रोफेसर बताते हैं कि यूरोपियन देशों में अनुशासन अच्छा है। कतार में लगकर ही लोग यहां सामान लेते हैं। भीड़ नहीं लगाते न ही नियम तोड़ते हैं। सफाई के मामले में भी यह देश बहुत आगे हैं। दूसरे विश्व युद्ध के बाद यहां का परिदृश्य बहुत बदला। यूरोपियन देशों में इटली, फ्रांस जो देश आते हैं, उनमें सीमाएं नहीं है। पता नहीं चलता एक देश से दूसरे देश में चले निकल जाते हैं। यूरोप देश में सूर्यास्त रात में दस बजे तक होता है। शाम हो जाती है, लेकिन सूर्यास्त नहीं होता है।

पूरी बचत यात्राओं में कर देते हैं खर्च
प्रोफेसर पगारे का कहना है कि वे हर माह वेतन में से ही बचत करते हैं, जो सालभर में जमा होती है, उसमें यात्राएं कर लेते हैं।

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