court verdict - हत्या के आरोपी का जमानत आवेदन निरस्त

शराब पीने के विवाद में पत्थर मार कर की गई थी हत्या
लोक अभियोजक की आपत्ति पर अर्जी निरस्त

By: tarunendra chauhan

Published: 16 Sep 2020, 03:34 PM IST

बुरहानपुर. उसारनी में शराब पीने की बात पर हुए हत्या के मामले में आरोपी की जमानत आवेदन निरस्त कर दिया गया। अति. लोक अभियोजक जिला अभियोजन अधिकारी सुनील कुरील द्वारा आपत्ति करने पर अति जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके पाटीदार के न्यायालय ने हत्या के आरोपी रामसिंग पिता खुमसिंग का जमानत आवेदन निरस्त कर दी। अभियोजन अधिकारी सुनील कुरील ने बताया कि घटना 6 सितंबर की है। ग्राम उसारनी में आरोपी रामसिंग ने शराब पीने की बात पर झगड़ा कर तुलसीराम उर्फ लट्या को पत्थर से सिर में मार दिया, जिसके कारण तुलसीराम की मृत्यु हो गई थी। थाना खकनार में आरोपी के विरुद्ध धारा 302 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है।

मंगलवार को न्यायालय के समक्ष जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिस पर इस आधार पर आपत्ति ली कि आरोपी द्वारा किया गया अपराध हत्या से सबंधित होकर गंभीर स्वरूप का अजमानतीय है। यदि आरोपी को जमानत का लाभ दिया जाता है तो इस प्रकार के अपराधों में वृद्धि होगी, आरोपी साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है तथा साक्षियों को डरा धमका सकता है एवं आरोपी के फरार होने की संभावना है। आरोपी के जमानत आवेदन पर आपत्ति से सहमत होते हुए न्यायालय ने हत्या के आरोपी का जमानत आवेदन निरस्त किया।

छेड़छाड़ करने वाले आरोपियों की जमानत न्यायालय ने की निरस्त
अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी रामलाल रंधावे द्वारा आपत्ति करने पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केएस बारिया ने नाबालिक बालिका से छेड़छाड़ करने वाले आरोपीगण संतोष पिता सुखदेव उम्र लगभग 22 वर्ष आकाश पिता दिलीप उम्र लगभग 21 वर्ष का जमानत आवेदन निरस्त किया।

रंधावे ने बताया कि घटना 1 अगस्त की है। मामले में थाना लालबाग में पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। आरोपियों के अधिवक्ता द्वारा न्यायालय के समक्ष जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिस पर जिला अभियोजन अधिकारी, विशेष लोक अभियोजक रामलाल रंधावे द्वारा इस आधार पर आपत्ति ली कि आरोपीगण के द्वारा नाबालिग बालिका से छेड़छाड़ से सबंधित होकर गंभीर स्वरूप का है। यदि जमानत का लाभ दिया जाता है तो इस प्रकार के अपराधों में वृद्धि होने की संभावना है तथा आरोपी के फरार होने की संभावना है। आपत्ती को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने आरोपीगण का तर्क विश्वास योग्य नहीं माना और आरोपियों की जमानत आवेदन निरस्त की।

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tarunendra chauhan Desk
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