ईद के बाजार में सन्नाटा, न नए कपड़े, न जूते, न ही हार श्रृंगार

- कोरोना के चलते फीकी हुई ईद

By: Amiruddin Ahmad

Published: 21 May 2020, 01:24 PM IST

बुरहानपुर. कोरोना संक्रमण ने इस बार ईद की खुशियां ही छीन ली। लॉकडाउन और कर्यू के चलते शहर में त्योहारों की रौनक गुम हो गई। रमजान में गुलजार रहने वाले बाजारों में सन्नाटा पसरा है। बाजारों से पूरी तरह चहल पहल गायब है। अब जब ईद आने को है और लॉकडाउन ३१ मई तक बढ़ गया है, तो इसका असर बाजार पर भी पड़ा है।
शायद यह पहली बार ऐसी ईद होगी, जिसको लेकर कोई उत्साह नहीं है।मां-बाप बच्चों को न नए कपड़े दिला पाए, न जूते और न ही महिलाओं और बेटियों के लिए हार-श्रृंगार का सामान खरीदा। न ही घरों को सजाने की वस्तुएं खरीदी गई। त्योहार की संगत कहीं गुम सी हो गई। लॉकडाउन की वजह से बाजार पूरी तरह बंद है। इस बीच कई पर्व और त्योहार चले गए, लेकिन रौनक नहीं दिखी। मंदिर और मस्जिद में भी सन्नाटे है। रमजान के दौरान गुलजार रहने वाले बाजार सूने पड़े है। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में नवरात्रि मे मंदिरों के कपाट बंद हो गए थे। मस्जिदों के आसपास होने वाली रौनक नहीं दिखी।गर्मी के दिनों में अब रास्तों पर छबीले नहीं लग पाई है।
कपड़ा बाजार की गलियां सूनी, करोड़ो का नुकसान
कोरोना वायरस ने इस बार ईद के उत्साह को फीका कर दिया है। डॉकडाउन के कारण बाजार में दुकानें बंद है। लोग ईद को लेकर किसी प्रकार की खरीदारी में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। शहर के मांडा गली कपड़ा बाजार में इस समय पैर रखने की जगह हीं होती थी, लेकिन गलियों में दुकानें बंद होने से सन्नाटा पसरा हुआ है। कपड़ा व्यापारी शेख सद्दाम ने बताया कि लॉकडाउन के चलते लगभग ५ करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।रमजान के दिनों में कपड़ा बाजार देर रात तक गुलजार रहता था। लोग खरीदारियों में व्यस्त रहते थे। लेकिन इस बार वैसा कुछ नहीं है। ईद पर्व को मात्र ४ से ५ दिनों का समय शेष बचा हुए है।

Amiruddin Ahmad
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