जन सुनवाई में समस्या लेकर आने वालों पर भड़की कलेक्टर

जन सुनवाई में समस्या लेकर आने वालों पर भड़की कलेक्टर

Editorial Khandwa | Updated: 02 Feb 2016, 11:54:00 PM (IST) Burhanpur, Madhya Pradesh, India

हुई रेलमपेल और धक्का-मुक्की तो ठोंकी टेबल  ओवर टाईम हुई जनसुनवाईजन सुनवाई में भी कई बार जाने के बाद आसानी से नहीं होता है समस्या का समाधान  आखिर जनता किसे बताए समस्या-

बुरहानपुर.  कलेक्टोरेट कार्यालय के सभागृह में मंगलवार को अजीब नजारे देखने को मिले। करीब-करीब अव्यवस्थाओं के बीच दो घंटे तक चली जनसुनवाई में तीन बार कलेक्टर जेपी आयरिन सिंथिया लोगों पर बिफर गई। अंतत: अधिकारियों को बुलवाकर उन्होने व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया।
    आमतौर पर दोपहर एक बजे तक चलने वाली जनसुनवाई में मंगलवार को दोपहर ढाई बजे चली। इस दौरान कलेक्टर ने लोगों की शिकायतें भी सुनी, लेकिन वे ज्यादातर लोगों पर भड़कती हुई दिखाई दी।
भीड़ बढ़ी तो हुई नाराज    
मंगलवार को दोपहर 12 बजे बाद अचानक शिकायतकर्ताओं की भीड़ बढऩे लगी। इससे करीब-करीब व्यवस्थाएं डगमगा गई और खूब शोर-शराबा होने लगा। इससे व्यवस्थाओं में लगे कलेक्टोरेटके कर्मचारी भी इस शोर गुल को रोकने में असमर्थसाबित हुए। इससे परेशान होकर कलेक्टर सिंथिया को 3 बार कुर्सी छोड़कर खड़े होकर शिकायतकर्ताओं को शांत कराना पड़ा। अंतत: सहयोग के लिए 2 अधिकारियों को फोन कर बुलवाया।
इस तरह पहुंचे अधिकारी
कलेक्टर ने बढ़ते भीड़ के दबाव और अनियंत्रित होते शोर को कम करने के लिए फोन लगाकर आबकारी अधिकारी राजेन्द्र शर्मा तथा श्रम अधिकारी गोपाल स्वामी को बुलवाया। दोपहर 12.40 बजे सभागृह में पहुंचे ये अधिकारी भी अव्यवस्था को दूर करने में अक्षम साबित हुए। क्योंकि इन अधिकारियों को मांगने पर भी लोग ज्ञापन देने और शिकायतें सुनाने में परहेज कर रहे थे। हाल में मौजूद हर शिकायतकर्ता कलेक्टर सिंथिया को ही अपना ज्ञापन देना और शिकायत सुनाना चाह रहा था। करीब 20 मिनट तक इन अधिकारियों द्वारा किए गए प्रयास निरर्थक साबित हुए।
टेंबल ठोंकने लगी कलेक्टर
दोपहर एक बजे कलेक्टर सिंथिया के सब्र का बांध टूट गया और वे कुर्सी से खड़ी होकर टेबल ठोंकने लगी। लोगों पर नाराजगी जताते हुए शोर-शराबा बंद करने के लिए कहा। कर्मचारियों से भीड़ को कतारबद्ध करने के निर्देश दिए और अधिकारियों को भी शिकायतें देने के लिए लोगों से कहा। इसके बाद कुछ स्थितियां बदली और दोपहर ढाई बजे तक कलेक्टर ने लोगों की शिकायतें सुनी।
 पत्रिका व्यू...
समस्या का हो समाधान, तो क्यों आए आपके पास
जिले में ज्यादातर विभागों के मामलों का ग्रामीण और शहरी स्तर पर निराकरण नहीं होता है। इसलिए लोग न्याय की उम्मीद में कलेक्टर के पास ही पहुंचते हैं। जबकि यहां पर वे डांट खाने, आगे-पीछे होने और अन्य तरीके से परेशान होते हैं। जिला कलेक्टर यदि अधिकारियों को उनके कार्य समय सीमा में निपटाने का निर्देश दे तो यहां पर परेशानी नहीं होगी।
बॉक्स आयटम...
यहां चार बार जन सुनवाई, नतीजा सिफर
जन सुनवाई में कितनी समस्याओं का समाधान होता है, इसका उदाहरण निगम के मामले में देखा जा सकता है। निगम के कर्मचारी नियमितिकरण की मांग को लेकर चार बार जनसुनवाई में कलेक्टर से मिलकर ज्ञापन सौंप चुके हैं। लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
...इन्होंने सुनाई समस्याएं
- एमागिर्द पंचायत के मलिक अशरफ ने बताया कि उसने या उसके परिवार के किसी सदस्य ने मनरेगा योजना में कभी कोईमजदूरी नहीं कि है लेकिन उनके और अन्य रिश्तेदारों के नाम से राशी का आहरण किया गया है।
- आहूखाना क्षेत्र निवासी सोमेश्वर तथा सुभाषचंद चौधरी ने सोयाबीन की फसल बोने और प्राकृतिक दिक्कतों के चलते उसमें हुए नुकसान के एवज में सहायता राशी मिलने की बात कही
- रास्तीपुरा क्षेत्र के श्रीराम मंदिर के पास से आम रास्ता रोकने का विरोध करते हुए दर्जनभर से ज्यादा महिला पुरुषों ने कलेक्टर को शिकायत की

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