कलम के सिपाहियों के हाथों में तगारी फावड़े,  मनरेगा में मजदूरी खेतों में काम कर रहे अतिथि शिक्षक

- 20 से अधिक अतिथि शिक्षक कर रहे काम
- मजबूरी

By: Amiruddin Ahmad

Updated: 29 Jun 2020, 12:16 AM IST

किशोर चौहान, डोईफोडिय़ा. जिन हाथों में कलम और बच्चों का भविष्य होता था, आज वहीं हाथ मिट्टी ढोने को मजबूर है, बेरोजगारी ने शिक्षकों को मनरेगा और खेतों में काम करने वाला मजदूर बना दिया।कोरोना वायरस संक्रमण काल में ऐसे कई शिक्षित बेरोजगार होकर इन दिनों मजदूरी करने को मजबूर हैं।
इतनी पढ़़ाई करने के बाद में जब कोई रोजगार नहीं मिला तो अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए बीए, बीएसी, एम, बीएड, डीएड पास अतिथि शिक्षकों ने मजदूरी का रास्ता चुन लिया है। जिन हाथों में चार महीने कोरोना से पहले तक कलम हुआ करती थी, तो आज वहीं हाथ मिट्टी ढोने को मजबूर हैं। प्रदेश शासन ने 30 अप्रैल को सभी अतिथि शिक्षकों को कायज़्मुक्त कर दिया। इसके बाद कई अतिथि शिक्षक बेरोजगार हो गए। खकनार ब्लॉक के 20 से अधिक अतिथि शिक्षक महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में काम कर रहे है।खकनार ब्लॉक के चार संकुलों के 20 से ज्यादा अतिथि शिक्षक कर रहे है मनरेगा में काम करने को मजबूर है।सिरपुर संकुल के चार, डोईफोडिय़ा संकुल के 5, खकनार संकुल के 5, तूकाईथड़ संकुल के 4 आतिथि शिक्षक मनरेगा में बेरोजगारी के चलते काम कर रहे है, लेकिन उन्होंने अपना नाम गुप्त रखने की बात की।
कलम छोड़कर थमी तगारी और फावड़ा
अतिथि शिक्षक मनोज पाटिल निवासी तलावड़ी शासकीय हाईस्कूल नागझिरी में कायज़्रत थे।एम, डीएड करने के बाद उसका सपना था कि वह एक अच्छा शिक्षक बने। कुछ हद तक उसका सपना पूरा भी हुआ और पास के गांव में अतिथि शिक्षक की नौकरी मिल गई। लॉकडाउन के दौरान प्रदेश शासन ने 30 अप्रैल को कायज़्मुक्त कर दिया।अतिथि शिक्षक मनोज की नौकरी भी चली जाने से वह बेरोजगार हो गया। लॉकडाउन में उसे कहीं नौकरी भी नहीं मिली तो माता.पिता, पत्नी व अपने बच्चों का पालन पोषण करने के लिए गांव में ही मजदूरी शुरू कर दी। मनोज ने बताया शिक्षक था तो उसे 7 हजार रुपए करीब महीना वेतन मिलता था, यहां 18 0 रुपए दिन की मजदूरी मिल रही है। परिवार का पेट पालना था तो कलम छोड़कर मजदूरी के लिए तगारी और फावड़ा उठा लिया और खेत मे मजदूरी कर रहा हुं।
गणित में बीएससी पास शिक्षक कर रहा मनरेगा में काम
गणित में बीएससी, डीएड की पढ़ाई करने के बाद आतिथि शिक्षक पूनम जाधव निवासी निमपड़ाव, चाकबारा में आतिथि शिक्षक था। लॉकडाउन के दौरान स्कूलें बंद होते ही सरकार बेरोजगार हो गए।अब कलम छोड़कर मनरेगा में मजदूरी कर तगारी फावड़ा उठा लिया। पिछले एक महीने से गांव में ही मनरेगा में काम उसे मिट्टी खोदकर फेंकने के 18 0 रुपए मिल रहे हैं।
खेत में काम कर चला रहे परिवार
मातापुर निवासी अशोक राठौड़ ने बताया कि वह हसीनाबाद के शासकीय हाईस्कूल में आतिथि शिक्षक था। बच्चों को हमेशा संकट का सामने करने की सीख दी। आज हमारे और परिवार के सामने ही रोजी रोटी का संकट खड़ हो गया। कभी नहीं सोचा था कि अचानक तीन माह के अंदर हम बेरोजगार होकर एक मजदूर की तरह खेत में काम करेगे। कोरोना के चलते सरकार को मई, जून का वेतन देना था, लेकिन अब तक आदेश नहीं दिया। अथिति शिक्षक बहुत ज्यादा तंगी से गुजर रहे है। अपने खेत मे काम कर रहा हुं जिससे परिवार चल सके।

Amiruddin Ahmad
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