scripttajmahal mumtaz begum death anniversary | मुमताज के प्यार की दास्तां बताती हैं यहां की दीवारें, यहीं पर ली थी अंतिम सांस | Patrika News

मुमताज के प्यार की दास्तां बताती हैं यहां की दीवारें, यहीं पर ली थी अंतिम सांस

यह वही स्थान है जहां मुमताज के ताबूत को रखा गया था, यहीं पर अंतिम सांस ली थी...।

बुरहानपुर

Updated: June 07, 2022 05:11:49 pm

बुरहानपुर। ये तो सब जानते हैं कि दुनिया का सातवां अजूबा आगरा का ताजमहल शाहजहां और मुमताज के प्यार की दास्तां बयां करता है, जिसे शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल के लिए बनवाया था। सबको ये भी पता है कि इसी ताजमहल में मुमताज की कब्र बनी है, जहां उसे दफनाया गया था। लेकिन मुमताज ने अंतिम सांस बुरहानपुर में ली थी, और छह माह तक बुरहानपुर में दफनाया गया था। इसे देखने के लिए तो दूरदराज से पर्यटक आते हैं, लेकिन यहां पहुंचने के लिए न अच्छा रास्ता है न यहां पहुंचने के बाद जगह का कोई संरक्षण है। खंडहर हालात में यह आहुखाना मुमताज की यादों की कहानी बयां कर रहा है।

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बुरहानपुर राजघाट से महज 2 किमी की दूरी पर बना आहूखाना। जहां मुमताज को छह माह तक दफनाया गया था। जब यहां पत्रिका की टीम पहुंची तो आहुखाना खंडहर हालात में मिला। बाउंड्रीवॉल की हालात ऐसी की गिरने की स्थिति में हो। जब अंदर पहुंचे तो उजड़ा हुआ गार्डन, खंडहर किला और दीवारें प्रेमी आशिकों के नाम से खुदी हुई मिली। फिर भी इसकी नक्काशी और निर्माण की कलाकारी बयां कर रही थी कि मुमताज महल के समय यह आहुखाना कितना खूबसूरत होगा।

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ये है इतिहास

आसिफ खान बताते हैं कि मुमताज की सगाई 14 साल की उम्र में ही शाहजहां के साथ कर दी गई। सगाई के पांच साल बाद 10 मई वर्ष 1612 को शाहजहां और मुमताज का निकाह हो गया और मुमताज शाहजहां की तीसरी और पसंदीदा बेगम बनीं। 1631 में शाहजहां मुमताज को लेकर बुरहानपुर आ गया था। उस वक्त मुमताज गर्भवती थी, वह अपनी चौदहवीं संतान को जन्म देने वाली थी। 7 जून 1631 में इसी बच्चे को जन्म देने के दौरान उनकी मौत हो गई। उन्हें वहीं आहुखाना के बाग में ही दफना दिया गया। इसके बाद आगरा ले जाकर ताजमहल में दफनाया गया।-

अब तक जीर्णोद्धार नहीं

आहुखाने का अब तक जीर्णोद्धार नहीं किया गया। इसके संरक्षण के लिए जरूर यहां रिपेयरिंग का मटेरियल मिला और कुछ मजदूर यहां काम करते दिखे। चूना, ईंट का चूरा जैसी पुरानी पद्धति से इसकी मरम्मत का काम होता देखा गया।

बुरहानपुर में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। यहां पर धरोहरों को संरक्षित किया जाना चाहिए। पहुंच मार्ग भी बनाए जाना चाहिए।
- आसिफ खान, आयोजनकर्ता मुमताज महल फेस्टिवल

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